लेखपाल ने Revenue Inspector रहते 45 जमीनों का पत्नी और बच्चों के नाम करा दिया अवैध रूप से बैनामा
इलाहाबाद हाई कोर्ट का बर्खास्त लेखपाल के खिलाफ विजिलेंस जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2019-2024के दौरान Revenue Inspector रहते हुए कानपुर नगर के पदावनत लेखपाल आलोक दूबे द्वारा अपने व पत्नी बच्चों के नाम 45 जमीनो का बैनामा कराने की एडीजी, एसटीएफ की अध्यक्षता में गठित टीम को जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कमिश्नर कानपुर नगर व याची लेखपाल को जांच में पूरा सहयोग करने का भी आदेश दिया है.
कोर्ट ने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए आदेश की प्रति डीजीपी को भेजने का भी निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने बर्खास्त लेखपाल (Revenue Inspector) आलोक दूबे की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता आर के ओझा व शिवेंदु ओझा व अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा.
याची अधिवक्ता का कहना है कि याची लेखपाल पद पर तैनात था कि कानपुर जिले का विभाजन हुआ और उसने कानपुर नगर चुना. उसे 5 मई 93 को Revenue Inspector पद पर पदोन्नति दी गई. सितंबर 23 में संदीप सिंह ने शिकायत की. जिसकी जांच की गई. जिसमें खुलासा हुआ कि याची ने Revenue Inspector रहते हुए अपने व पत्नी व दो बच्चों के नाम 45 जमीनों का बैनामा कराया है. जिसमें कानून का पालन न करने के आरोप की पुष्टि की गई.
जिलाधिकारी ने Revenue Inspector को पदावनति देकर लेखपाल बना दिया
जिलाधिकारी ने Revenue Inspector को पदावनति देकर लेखपाल बना दिया. इसके खिलाफ अपील की सुनवाई करते हुए कमिश्नर ने सजा बढ़कर बर्खास्तगी आदेश पारित किया. दोनों आदेशों को याचिका में चुनौती दी गई है. याची के वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि सजा बढ़ाते समय कारण बताया जाना चाहिए था और याची को नोटिस देकर सुनवाई का मौका देना था. अफसरों ने इस व्यवस्था का पालन नहीं किया जो नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है.
सरकार का कहना था कि आरोप की गंभीरता व सिस्टम पर जनविश्वास बनाये रखने के लिए दिया गया दंड उचित है. याची अधिवक्ता ने 30 अक्टूबर 25 का एक आदेश दिखाया जिसमें अधीक्षक भ्रष्टाचार निरोधक पुलिस कानपुर ने एसडीएम को विजिलेंस जांच कराने का अनुरोध किया है. जिस पर कोर्ट ने विजिलेंस टीम से जांच रिपोर्ट मांगी है.
डीसीपी आगरा व प्रमुख सचिव गृह से कोर्ट ने मांगा जवाब, पूछा सुप्रीम कोर्ट आदेश का उल्लघंन कर पुलिस विभाग क्यों दे रहा आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट से तय विधि मामले में पुलिस विभाग द्वारा विपरीत आदेश पारित करना न केवल ऐसा आदेश अवैध है अपितु यह अवमाननाकारी भी है. कोर्ट ने डीसीपी पुलिस मुख्यालय आगरा व प्रमुख सचिव गृह लखनऊ से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और पूछा है कि किन परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत आदेश पुलिस विभाग से लगातार पारित किए जा रहे हैं. याचिका की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने हरगोविंद सिंह यादव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.
याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर ने बहस की. इनका कहना था कि पुलिस विभाग ने वर्ष 2008 में याची के गलत वेतन निर्धारण किये जाने के आधार पर पेंशन में कटौती की है. जो 16 जनवरी 2007 के शासनादेश व सुशील कुमार सिंघल केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लघंन है. जिसमें कहा गया है कि रिटायर होने के 13 साल पहले किए गये गलत वेतन निर्धारण के आधार पर सेवानिवृत्ति में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा अक्सर ऐसे आदेश के खिलाफ याचिकाएं आ रही.ऐसे आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लघंन है.