गलत वेतन भुगतान की Retirement के बाद वसूली आदेश रद, कटौती की राशि 1 माह में वापस करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिशासी अभियंता मध्य गंगा नहर निर्माण खंड बुलंदशहर को सेवानिवृत्त याचियों के Retirement परिलाभों से की गयी लाखो रुपए की कटौती राशि एक माह में वापस करने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि तय समय में भुगतान नहीं किया तो 7 फीसदी की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा. कोर्ट ने सरकार को छूट दी है कि यदि याची ने गलत बयानी कर आदेश प्राप्त किया है तो वह दो माह के भीतर इस आदेश को वापस लेने की अर्जी दे सकेगा.
यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने सतीष कुमार व किरणपाल सिंह (Retirement) की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है. कोर्ट ने याचियों के देयों से क्रमशः रूपए 8,29,890 और रूपये 12,57,370 कटौती करने के अधिशासी अभियंता के 16 जनवरी 26 को पारित आदेश को रद कर दिया है.
याची अधिवक्ता इरफान अहमद मलिक ने बहस की कि गलत वेतन निर्धारण के कारण अधिक भुगतान किया गया. जिसमें याची की कोई भूमिका नहीं रही है. विभाग अपनी गलती का दंड याचियों को नहीं दे सकता. Retirement परिलाभों से वसूली आदेश सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह केस के फैसले का खुला उल्लघंन है. जिस पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है.
ACP आगरा से कोर्ट ने मांगी सफाई, Retirement के देयों से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ क्यों की वसूली
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिटायर्ड कर्मचारी से अधिक वेतन भुगतान की Retirement benefits से वसूली को सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह केस का उल्लघंन माना और सहायक पुलिस कमिश्नर आगरा से तीन हफ्ते में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर सफाई मांगी है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही की जाय.
पुलिस अधिकारी पर स्थापित विधि के विपरीत आदेश पारित करने का आरोप है. याचिका की अगली सुनवाई 6 मई को होगी. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने विशाल सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर ने बहस की.
इनका कहना है कि गलत वेतन निर्धारण के कारण रिटायरमेंट (Retirement) के बाद देयों से 1 सितंबर 25 के आदेश से 6,16,413 रूपये की कटौती कर ली गई जो सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह केस के आदेश का खुला उल्लघंन है. जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया और सफाई मांगी है.