इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्टडी पाथवे Fraud के 8 मामलों की जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शिक्षा परामर्श फर्म स्टडी पाथवे द्वारा कई लोगों से की गई कथित Fraud के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आठ अलग-अलग Fraud cases की जांच आर्थिक अपराध शाखा लखनऊ सौंप दी है. जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस पद्म नारायण मिश्रा की बेंच ने आचार्य राजेश त्रिपाठी व 9 अन्य की ओर से दायर आपराधिक याचिका को निस्तारित करते हुए यह आदेश पारित किया है.
याचियों ने प्रयागराज, लखनऊ और उन्नाव के विभिन्न थानों में दर्ज Fraud के आठ मुकदमों की जांच एक विशेष एजेंसी से कराने की मांग की थी. सभी मुकदमों में “स्टडी पाथवे” नामक शैक्षणिक परामर्श फर्म के लगभग एक ही आरोपियों का नाम है. प्रयागराज के जॉर्ज टाउन और पुरामुफ्ती थाने, लखनऊ के साइबर क्राइमग और विभूति खंड थाने तथा उन्नाव के कोतवाली थाने में वर्ष 2023 से 2026 के बीच दर्ज Fraud की कुल 8 एफआईआर दर्ज हुई है जिसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंपी गई हैं.
Fraud की सभी एफआई आर में अधिकांश नामजद आरोपी एक ही
कोर्ट ने पाया कि Fraud की सभी एफआई आर में अधिकांश नामजद आरोपी एक ही है. सभी मुकदमों का मूल आधार एक समान है. Fraud मामले में बड़े पैमाने पर मनी ट्रेल शामिल है, जिसकी जांच विशेष एजेंसी से ही संभव है.
पुलिस इसकी सही जांच नहीं कर सकती.याची प्रथम आचार्य राजेश त्रिपाठी ने स्वयं कोर्ट में पेश होकर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया और जांच स्थानांतरित करने की मांग की. राज्य सरकार के वकील ने भी जांच ट्रांसफर पर कोई आपत्ति नहीं जताई. कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द जांच पूरी कर बीएनएसएस की धारा 193(3) के तहत पुलिस रिपोर्ट दाखिल करे.