मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना Insurance योजना की लाभ न देने पर जिलाधिकारी चित्रकूट 14 मई को तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना Insurance योजना का लाभ देने पर विचार का तीन अवसर देने के बावजूद अस्वीकार करने पर जिलाधिकारी चित्रकूट को 14मई को हाजिर होने तथा स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है कि बतायें कि उनका आदेश कैसे कायम रहने लायक है. यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने राजवतिया की याचिका पर दिया है.
याचिका पर अधिवक्ता जयदीप त्रिपाठी ने बहस की. याची के पति किसान थे. मौत के बाद उसने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना Insurance योजना के अंतर्गत मुआवजे की मांग की. स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर उसने हाई कोर्ट की शरण की और याचिका दाखिल की. इस याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को उसने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना Insurance योजना के अंतर्गत मुआवजे पर निर्णय लेने का निर्देश दिया. प्रतिकूल आदेश के खिलाफ याचिका पर कोर्ट ने जिलाधिकारी को योजना के अनुसार विचार कर निर्णय लेने का आदेश दिया.
कृषक दुर्घटना Insurance योजना के अंतर्गत मुआवजे की मांग में डीएम के यहां ब्योरा देते हुए प्रत्यावेदन दिया
कोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने कृषक दुर्घटना Insurance योजना के अंतर्गत मुआवजे की मांग में डीएम के यहां ब्योरा देते हुए प्रत्यावेदन दिया. इसके बाद भी जिलाधिकारी ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि बटाई पर लेने वाले का हलफनामा अर्जी के साथ न देकर एक साल बाद में दिया गया. जिससे संदेह पैदा होता है. जिलाधिकारी के इस आदेश को कोर्ट करते हुए कोर्ट ने कहा अर्जी Insurance योजना की मंशा के विपरीत निरस्त की गई है. इसी के चलते कोर्ट ने जिलाधिकारी के आदेश को संतोषजनक नहीं माना और जिलाधिकारी को तलब किया है.
कोर्ट ने कहा स्पीडी ट्रायल अभियुक्त का मूल अधिकार, हनन पर जमानत पाने का हकदार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी की दहेज हत्या करने के आरोपी थाना गुलहरिया, गोरखपुर के सूरज गुप्ता की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है. कोर्ट ने कहा आपराधिक केस का त्वरित विचारण अभियुक्त का मूल अधिकार है, इसके उल्लघंन की दशा में वह जमानत पाने का हकदार हैं.
कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषी करार होने तक हर अभियुक्त के निर्दोष होने की अवधारणा है. ट्रायल पूरा होना अनिश्चित है और आरोपी 4 दिसंबर 23 से जेल में बंद हैं. अदालत की रिपोर्ट के अनुसार सम्मन जा रहा किंतु गवाह हाजिर नहीं हो रहे. जिस पर कोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर कर ली. यह आदेश जस्टिस समीर जैन ने याची अधिवक्ता मयंक कृष्ण सिंह चंदेल को सुनकर दिया है.
इनका कहना था कि घटना के चार साल पहले शादी हुई थी. दोनों खुशहाल थे. एक बेटी भी पैदा हुई. अचानक पत्नी की हार्ट अटैक से मौत हो गई. मायके वालों को सूचना दी गई और ग्राम प्रधान की सलाह पर अंतिम संस्कार शुरू किया गया. शिकायतकर्ता व अन्य लोग मौके पर मौजूद थे.
शिकायत पर पुलिस आई और अधजली लाश उठा लिया. एफआईआर दर्ज कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर जला होने से मौत के कारण का पता नहीं चल सका. दहेज उत्पीड़न व हत्या का आरोप लगाया गया. पुलिस चार्जशीट पर केस का ट्रायल चल रहा है. 20 गवाहो में से अभी तक पांच का बयान दर्ज किया गया है. कोर्ट ने कहा याची ट्रायल की देरी के लिए जिम्मेदार नहीं हैं. स्पीडी ट्रायल के उसके अधिकार का उल्लघंन किया जा रहा है इसलिए सशर्त जमानत पर छोड़ा जाय.
मऊ-रतनपुरा यार्ड में सब वे बनाने में हीलाहवाली पर हाईकोर्ट की रेलवे को फटकार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के अंतर्गत मऊ के रतनपुरा यार्ड में लिमिटेड हाइट सब वे निर्माण में देरी पर फटकार लगायी.और 17जुलाई तक प्रोजेक्ट पूरा होने की जानकारी मांगी है. यह आदेश चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने देवेंद्र प्रसाद मिश्र की जनहित याचिका पर दिया है.
रेलवे की ओर से दलील दी गई कि प्रस्ताव मंजूरी की प्रक्रिया में है. कुछ और समय मांगा. कोर्ट ने कहा, रेलवे द्वारा कोई ठोस फैसला लिए बिना मामले को लटकाने की कोशिशों से साफ जाहिर है कि कुछ नहीं हुआ. पहले कहा गया कि रेलवे विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) यह काम करेगा तथा प्रोजेक्ट पहले ही मंजूर है.
जब आरवीएनएल ने इससे इन्कार किया तो पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई. कई पुनर्गठन प्रस्तावित हुए और बजट बढ़ाकर 8.70 करोड़ कर दिया गया. मामला 2023 से लटका है. रेलवे ने देरी की वजह दोहरीकरण/मल्टी-ट्रैकिंग काम और यार्ड के ढांचे में बदलाव के कारण डिजाइन बदलना बताया है.