Rules and Procedures के विपरीत चयन प्रक्रिया अवैध, 3 लिपिकों की सेवा समाप्ति का हाई कोर्ट ने दिया आदेश
21 साल पहले राजकीय काष्ठकला औधोगिक प्रशिक्षण संस्थान कटरा, प्रयागराज में हुई थी नियुक्तियां, याचिका में दी गई थी चुनौती

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने Rules and Procedures को दरकिनार कर नियुक्ति किये जाने को अवैध करार दिया है. राजकीय काष्ठकला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, कटरा प्रयागराज में लिपिक पद पर की गयी तीन नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका को जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने निरस्त करते हुए नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश सुनाया है. बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि यदि कोई रिक्ति भरने हेतु शेष रहती है तो उसे Rules Procedures के अनुसार नया विज्ञापन जारी करके पुनः भरा जाएगा.
यह रिट याचिका जूनियर क्लर्क के पद के लिए 3.12.2004 को पूरी हुई संपूर्ण Selection Procedures को रद्द करने की मांग करते हुए विनय कुमार पांडेय की ओर से दायर की गई थी, जिस Procedures के तहत प्रतिवादी संख्या 4 और 5 का चयन किया गया था और उन्हें ‘सरकारी वुडक्राफ्ट औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, कटरा, इलाहाबाद’ में नियुक्ति दी गई थी.
बाद में प्रतिवादी संख्या 4 का स्थानांतरण जिला रोजगार कार्यालय देवरिया में कर दिया गया. इसके बाद प्रतिवादी संख्या 3 ने जूनियर क्लर्क के पद पर प्रतिवादी संख्या 6 का चयन किया. Selection Procedures में हुई अनियमितताओं से व्यथित होकर विनय कुमार पांडेय ने यह रिट याचिका दायर की.
याचिकाकर्ता की ओर से पूरक हलफनामे के माध्यम से रिकॉर्ड पर कुछ विश्वसनीय दस्तावेज प्रस्तुत किए जिनमें Selection Procedures में हुई अनियमितताओं पर 2007 में करायी गयी एक जांच की रिपोर्ट भी शामिल थी. यह जांच उप निदेशक (प्रशिक्षण) द्वारा करके रिपोर्ट निदेशक को सौंपी गई थी. Selection Procedures में हुई अनियमितताओं पर जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रिंसिपल गवर्नमेंट वुडक्राफ्ट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, कटरा, इलाहाबाद को भी निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी.
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि क्लर्क पद पर चयन के लिए पूरी Selection Procedures नियमों और विज्ञापन के विपरीत थी. संस्थान में जूनियर क्लर्क के 6 स्वीकृत पद थे. जून और जुलाई 2004 के महीनों में दो क्लर्कों का तबादला हो गया जिसके परिणामस्वरूप दो रिक्तियां उत्पन्न हो गईं. शेष 4 जूनियर क्लर्कों में से एक OBC श्रेणी और 3 सामान्य श्रेणी के थे.

संस्थान के प्रिंसिपल ने दो रिक्त पदों पर Selection Procedures की अनुमति मांगी. निदेशक ने संस्थान के प्रिंसिपल को निर्देश दिया कि वे दो पद सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से भरें. इसके अनुपालन में विज्ञापन प्रकाशित किया गया जिसमें आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई थी. प्रतिवादी संख्या 4 ने अपने आवेदन में जन्म तिथि 11.1.1969 बताई थी. उसका दावा था कि वह बिहार राज्य में OBC श्रेणी का उम्मीदवार था और उसने उत्तर प्रदेश राज्य में OBC प्रमाण पत्र बाद में जमा करने की अनुमति भी मांगी थी.
कोर्ट ने माना कि आवेदन के दिन प्रतिवादी संख्या 4 आवेदन करने के लिए पात्र नहीं था और Selection Procedures में उसके आवेदन को सीधे तौर पर अस्वीकृत कर दिया जाना चाहिए था. इसके बजाय, उसे टाइपिंग टेस्ट और इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति दी गई और अंततः उसका चयन कर लिया गया. इन परिस्थितियों को देखते हुए, इस न्यायालय की सुविचारित राय में चूंकि प्रतिवादी संख्या 4 उक्त विज्ञापन के तहत आवेदन करने के लिए बिल्कुल भी पात्र नहीं था (क्योंकि उसकी आयु सीमा पार हो चुकी थी), इसलिए Selection Procedures में उसके आवेदन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए था.
बेंच ने कहा कि शिक्षा उप निदेशक द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट है कि टाइपिंग टेस्ट या इंटरव्यू आयोजित होने से पहले जूनियर क्लर्क/लाइब्रेरी क्लर्क के एक पद को समाप्त कर दिया गया था. इस स्थिति में संस्था के प्रधानाचार्य को शुद्धिपत्र जारी करना चाहिए था. वे जूनियर क्लर्क के पद पर दो व्यक्तियों का चयन करने की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सकते थे.
उन्होंने अवैध रूप से और कानून के प्रावधानों के विपरीत जाकर दो उम्मीदवारों का चयन कर लिया. इसके अतिरिक्त, प्रतिवादी संख्या 4 के स्थानांतरण के उपरांत, उन्होंने तीसरे उम्मीदवार को जूनियर क्लर्क के रूप में चयनित कर लिया जो कि बिना किसी नए विज्ञापन के कानूनन अनुमेय नहीं था. इसी के चलते प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई भी की गयी.
कोर्ट ने माना कि परिस्थितियों को देखते हुए 2004 के विज्ञापन के अनुसरण में किए गए समस्त चयन रद्द किए जाने योग्य हैं. कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 4, 5 और 6 की सेवाएं समाप्त करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया है.प्रकरण के तथ्यों के अनुसार 24.8.2004 के विज्ञापन के माध्यम से सामान्य श्रेणी के जूनियर क्लर्कों के दो पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया गया था.
जिसे सरकारी वुडक्राफ्ट औद्योगिक प्रशिण संस्थान के प्रधानाचार्य द्वारा भरा जाना था. विज्ञापन में प्रावधान था कि सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा 1.7.2004 को 18 से 35 वर्ष के बीच होगी. विज्ञापन के अनुसरण में याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या 4, 5 और 6 सहित विभिन्न उम्मीदवारों ने आवेदन किया था.
कुल 40 उम्मीदवारों में से केवल 27 उम्मीदवारों ने टाइपिंग टेस्ट में भाग लिया और 19 उत्तीर्ण हुए. इसमें से 17 उम्मीदवार साक्षात्कार में शामिल हुए. इसके बाद प्रतिवादी संख्या 4 और 5 को चयनित घोषित किया गया और उन्हें नियुक्ति दी गई. बाद में प्रतिवादी संख्या 4 का स्थानांतरण जिला रोजगार कार्यालय देवरिया में कर दिया गया. इसके बाद प्रतिवादी संख्या 3 ने जूनियर क्लर्क के पद पर प्रतिवादी संख्या 6 का चयन किया. चयन प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं से व्यथित होकर विनय कुमार पांडेय ने यह रिट याचिका दायर की.
याचिकाकर्ता की ओर से पूरक हलफनामे के माध्यम से रिकॉर्ड पर कुछ विश्वसनीय दस्तावेज प्रस्तुत किए जिनमें 2007 में करायी गयी एक जांच की रिपोर्ट भी शामिल थी. यह जांच उप निदेशक (प्रशिक्षण) द्वारा करके रिपोर्ट निदेशक को सौंपी गई थी. जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रिंसिपल गवर्नमेंट वुडक्राफ्ट इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, कटरा, इलाहाबाद को भी निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी.
Selection Procedures Rules और विज्ञापन के विपरीत
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि क्लर्क पद पर चयन के लिए पूरी Selection Procedures Rules और विज्ञापन के विपरीत थी. संस्थान में जूनियर क्लर्क के 6 स्वीकृत पद थे. जून और जुलाई 2004 के महीनों में दो क्लर्कों का तबादला हो गया जिसके परिणामस्वरूप दो रिक्तियां उत्पन्न हो गईं. शेष 4 जूनियर क्लर्कों में से एक OBC श्रेणी और 3 सामान्य श्रेणी के थे.
संस्थान के प्रिंसिपल ने दो रिक्त पदों को भरने की अनुमति मांगी. निदेशक ने संस्थान के प्रिंसिपल को निर्देश दिया कि वे दो पद सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से भरें. इसके अनुपालन में विज्ञापन प्रकाशित किया गया जिसमें आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई थी. प्रतिवादी संख्या 4 ने अपने आवेदन में जन्म तिथि 11.1.1969 बताई थी. उसका दावा था कि वह बिहार राज्य में OBC श्रेणी का उम्मीदवार था और उसने उत्तर प्रदेश राज्य में OBC प्रमाण पत्र बाद में जमा करने की अनुमति भी मांगी थी.
कोर्ट ने माना कि आवेदन के दिन प्रतिवादी संख्या 4 आवेदन करने के लिए पात्र नहीं था और उसके आवेदन को सीधे तौर पर अस्वीकृत कर दिया जाना चाहिए था. इसके बजाय, उसे टाइपिंग टेस्ट और इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति दी गई और अंततः उसका चयन कर लिया गया. इन परिस्थितियों को देखते हुए, इस न्यायालय की सुविचारित राय में चूंकि प्रतिवादी संख्या 4 उक्त विज्ञापन के तहत आवेदन करने के लिए बिल्कुल भी पात्र नहीं था (क्योंकि उसकी आयु सीमा पार हो चुकी थी), इसलिए उसके आवेदन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए था.
बेंच ने कहा कि शिक्षा उप निदेशक द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट है कि टाइपिंग टेस्ट या इंटरव्यू आयोजित होने से पहले जूनियर क्लर्क/लाइब्रेरी क्लर्क के एक पद को समाप्त कर दिया गया था. इस स्थिति में संस्था के प्रधानाचार्य को शुद्धिपत्र जारी करना चाहिए था. वे जूनियर क्लर्क के पद पर दो व्यक्तियों का चयन Procedures को आगे नहीं बढ़ा सकते थे.
उन्होंने अवैध रूप से और Rules के Procedures के विपरीत जाकर दो उम्मीदवारों का चयन कर लिया. इसके अतिरिक्त, प्रतिवादी संख्या 4 के स्थानांतरण के उपरांत, उन्होंने तीसरे उम्मीदवार को जूनियर क्लर्क के रूप में चयनित कर लिया जो कि बिना किसी नए विज्ञापन के कानूनन (Rules) अनुमेय नहीं था. इसी के चलते प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई भी की गयी.
कोर्ट ने माना कि परिस्थितियों को देखते हुए 2004 के विज्ञापन के अनुसरण में किए गए समस्त चयन रद्द किए जाने योग्य हैं. कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 4, 5 और 6 की सेवाएं समाप्त करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया है.