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173(4) बीएनएसएस की अर्जी पर मजिस्ट्रेट द्वारा Complaint Case कायम करने के आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं: हाई कोर्ट

173(4) बीएनएसएस की अर्जी पर मजिस्ट्रेट द्वारा Complaint Case कायम करने के आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं: हाई कोर्ट

एससी एसटी एक्ट के तहत अपराध की एफआईआर दर्ज कर विवेचना का आदेश देने की मांग में दाखिल धारा 173(4) की अर्जी पर Complaint Case कायम करने का मजिस्ट्रेट का आदेश किसी भी तरह से अवैधानिक नहीं है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यह मजिस्ट्रेट का विवेकाधिकार है कि वह अर्जी पर एफआईआर दर्ज कर विवेचना का आदेश दे या स्वयं Complaint Case कायम कर साक्ष्य पेश करने का आदेश दें.

कोर्ट ने यह भी कहा हालांकि मजिस्ट्रेट को Complaint Case की सुनवाई के दौरान पुलिस विवेचना का आदेश देने का भी अधिकार है. कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश न देकर Complaint Case कायम करने के विशेष जज गोरखपुर के 29 जुलाई 25 के आदेश की वैधता की चुनौती में दाखिल शिकायतकर्ता की अपील खारिज कर दी है. यह आदेश जस्टिस मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने एम्स गोरखपुर में एमबीबीएस के छात्र जितेन्द्र भाटी की अपील को खारिज करते हुए दिया है.

मजिस्ट्रेट को Complaint Case की सुनवाई के दौरान पुलिस विवेचना का आदेश देने का भी अधिकार

अपीलार्थी का कहना था कि छात्र अभिषेक रंजन, उसके भाई राहुल रंजन ने साथियों के साथ उसे मारा पीटा और जातिसूचक गालियां दी और कई दिन जान से मारने की धमकी दी. घटना एम्स में वार्षिक समारोह की है जब अपीलार्थी 27 नवंबर 24 को स्टेज पर आ गया जहां गायक गाना गा रहे थे तब उसके साथ अभद्रता की गई. तीन दिन बाद 30 नवंबर 24 को क्लासमेट ने गालियां दी. इसकी जानकारी उन्होंने डीन व हास्टल वार्डन को दी तो भरोसा मिला कि गार्ड से सुरक्षा के लिए कहेंगे.

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इसके बाद पीजी ब्वायज हास्टल में उसे उन्ही छात्रों ने मारा-पीटा. पुलिस को जानकारी दी किन्तु कोई कार्रवाई नहीं की गई तो अदालत में अर्जी दी जिसपर मजिस्ट्रेट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बजाय Complaint Case  कायम कर लिया जो कानून के खिलाफ पीड़ित के मूल अधिकारों का हनन है. हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले से कहा मजिस्ट्रेट का Complaint Case का आदेश विधि विरुद्ध नहीं है. यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं है.

वित्त नियंत्रक पुलिस मुख्यालय लखनऊ को जमानती वारंट जारी, 27 मई को पेश होने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिवपूजन सिंह वित्त नियंत्रक पुलिस मुख्यालय लखनऊ के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर 27 मई को पेश होने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने दाताराम की अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता इरफान अहमद मलिक ने बहस की.

इनका कहना है कि याची मैनपुरी में पुलिस उप निरीक्षक पर से सेवानिवृत्त हुआ. इसके बाद यह कहते हुए उसके सेवानिवृत्ति परिलाभो से 607435 रूपये की कटौती कर दी गई कि गलती से अधिक वेतन का भुगतान किया गया था. हाईकोर्ट ने इसके खिलाफ याचिका को स्वीकार करते हुए काटीं गई राशि एक माह में छः फीसदी ब्याज सहित वापस करे.

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जिसका पालन नहीं किया गया तो शिवपूजन सिंह वित्त नियंत्रक पुलिस मुख्यालय लखनऊ व विनोद कुमार एसपी मैनपुरी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की. कोर्ट ने विपक्षी को नोटिस जारी की. कार्यालय रिपोर्ट में बताया गया कि नोटिस विपक्षी पर सर्व हो चुकी है. इसके बाद भी कोई विपक्षी की तरफ से नहीं आया. जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया और सीजेएम लखनऊ के मार्फत वित्त नियंत्रक को जमानती वारंट जारी किया है. याचिका की अगली सुनवाई 27 मई को होगी.

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