अपनी मर्जी से शादी करने वाले Adult couple की गिरफ्तारी पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Adult लड़की याची के अपनी मर्जी से याची दो के साथ विवाह कर रहने के आधार पर झूठे आरोप में दर्ज एफआईआर को रद करने की मांग में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार व शिकायतकर्ता से चार हफ्ते में जवाब मांगा है और याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 20 जुलाई नियत की है. कोर्ट ने कानपुर नगर के साध थाने में 3 अप्रैल 26 को दर्ज एफआईआर के तहत याची Adult दीपिका व अन्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.
Adult लड़की है जो अपनी मर्जी से 2 अप्रैल 26 से याची से शादी कर उसके साथ रह रही है
यह आदेश जस्टिस राजीव गुप्ता और जस्टिस डॉ अजय कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने याची अधिवक्ता निर्विकल्प पांडेय व प्रारब्ध पांडेय को सुनकर दिया है. इनका कहना था कि याची 19 साल की Adult लड़की है जो अपनी मर्जी से 2 अप्रैल 26 से याची से शादी कर उसके साथ रह रही है. किसी प्रकार की जबरदस्ती करने का आरोप नहीं है. दोनों Adult हैं अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं. कोई अपराध नहीं बनता. इसलिए एफआईआर रद की जाय. कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है.
गैंगस्टर एक्ट केस के अभियुक्त की गिरफ्तारी पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केवल एक आपराधिक केस के आधार पर गैंगस्टर केस की एफआईआर की कानूनी वैधता की चुनौती याचिका पर अभियुक्त की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और मुद्दे को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार सहित विपक्षियों से जवाब मांगा है.
यह आदेश जस्टिस राजीव गुप्ता और जस्टिस डा अजय कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने कमाल वीर आत्मज की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता चंद्र केश मिश्र व वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस मिश्र ने बहस की. इनका कहना है कि एक आपराधिक केस पर गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही कानून के खिलाफ है. इसलिए 14 मार्च 26 को दर्ज एफआईआर रद की जाय. एफआईआर मुरादाबाद के मझोला थाने में दर्ज है जिसे याचिका में चुनौती दी गई है.
असंज्ञेय अपराध में पुलिस केस कार्यवाही रद, मजिस्ट्रेट को कंप्लेंट केस दर्ज कर सुनवाई का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ जिले के हलधरपुर थाना पुलिस की चार्जशीट व मजिस्ट्रेट के उस पर संज्ञान लेने के आदेश सहित पूरी केस कार्रवाई को रद करने की मांग में दाखिल याचिका को स्वीकार कर लिया है. याची अधिवक्ता वीके चंदेल व मयंक कृष्ण सिंह चंदेल का कहना है कि असंज्ञेय अपराध में पुलिस केस नहीं चलाया जा सकता. नियमानुसार इसमें कंप्लेंट केस कार्यवाही ही की जा सकती है.
अदालत ने पुलिस चार्जशीट पर संज्ञान लेकर सम्मन जारी कर विधिक गलती की है. इसलिए केस कार्यवाही रद की जाय और अदालत को कंप्लेंट केस दर्ज कर सुनवाई करने का आदेश दिया जाय. कोर्ट ने 16 जनवरी 26 को न्यायिक मजिस्ट्रेट मऊ द्वारा जारी सम्मन, संज्ञान आदेश व पुलिस चार्जशीट रद कर दी और मजिस्ट्रेट को कंप्लेंट केस कायम कर सुनवाई करने का निर्देश दिया है
यह आदेश जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने बजरंगी सहाय व अन्य की याचिका पर दिया है.याची अधिवक्ता का कहना था पुलिस ने कंप्लेंट केस में चार्जशीट दाखिल की है और मजिस्ट्रेट ने संज्ञान भी ले लिया है जो कानून के खिलाफ है. असंज्ञेय अपराध में पुलिस केस कायम नहीं किया जा सकता.