Madrasas की एटीएस से जांच कराने के लिए याचिका, इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2 जजों की बेंच करेगी सुनवाई

Madrasas की एटीएस से जांच कराने के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इस मामले को हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए 4 मई 2026 की तारीख तय की है. यह आदेश जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने दिया है. याची मदरसा (Madrasas) प्रबंधन समिति ने 9 दिसंबर 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें संबंधित Madrasas की जांच एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) से कराने का निर्देश दिया गया था.
याचिकाकर्ता Madrasas की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा (Madrasas) एजुकेशन अधिनियम, 2004 तथा उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियम, 2016 के तहत कार्य कर रहे हैं.
26 दिसंबर 2025 को जारी जांच संबंधी मांग में ऐसा कोई तथ्य या प्रश्न शामिल नहीं है, जिससे यह संदेह हो कि Madrasas को किसी बाहरी स्रोत से फंडिंग मिल रही है. इसलिए एटीएस से जांच कराने का आदेश पूरी तरह निराधार और मनमाना है तथा इसमें अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता है.
Madrasas को किसी बाहरी स्रोत से फंडिंग मिल रही है
राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि यह याचिका समय से पहले दायर की गई है, क्योंकि अभी केवल जांच कराने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि यदि जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिलता है तो उसी के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जाएगी. मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने राज्य को इस संबंध में अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए मामले को 4 मई 2026 को ताजा सूची में सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया है.
फर्म के सेल्समैन के खिलाफ धोखाधड़ी केस कार्यवाही पर रोक, राज्य सरकार व शिकायतकर्ता फर्म से तीन हफ्ते में मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्म के सेल्समैन योगेश सक्सेना के खिलाफ विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मेरठ की अदालत में चल रहे धोखाधड़ी केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार सहित विपक्षियों से याचिका पर जवाब मांगा है. याचिका की अगली सुनवाई 15 मई को होगी. यह आदेश जस्टिस च्यवन प्रकाश की सिंगल बेंच ने याची अधिवक्ता बी डी निषाद भूपेंद्र को सुनकर दिया है.
इनका कहना था कि याची योगेश सक्सेना फर्म में सेल्समैन था. एकाउंटेंट अतुल कुमार ने फर्म का धन अपने रिश्तेदारों के खाते में स्थानांतरित कर गबन किया है. याची ने अपने रिश्तेदारों के नाम एक भी पैसा नही भेजा है. उसके खिलाफ आरोप का कोई साक्ष्य नहीं है फिर भी पुलिस ने चार्जशीट में उसे शामिल किया है. मजिस्ट्रेट ने पुलिस चार्जशीट पर संज्ञान लेकर सम्मन जारी किया है. प्रथमदृष्टया याची के खिलाफ कोई केस नहीं बनता. कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है.