प्रदेश के मेडिकल-नर्सिंग Colleges में 500 से अधिक पद संविदा, सरकार को नियमावली जल्द अधिसूचित करने का निर्देश

महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के हलफनामे को कोर्ट ने “दयनीय स्थिति” बताया. हलफनामे के अनुसार प्रदेश में मेडिकल-नर्सिंग Colleges में 500 से अधिक पद संविदा पर हैं और केवल 2 से 3 प्रतिशत पद नियमित हैं. मेडिकल-नर्सिंग Colleges में प्राचार्यों की सूची में भी करीब 25 प्रतिशत पदों पर कार्यवाहक प्राचार्य तैनात हैं.
मेडिकल-नर्सिंग Colleges में 25 प्रतिशत पदों पर कार्यवाहक प्राचार्य
कोर्ट ने माँगे जाने के बावजूद विभागाध्यक्षों का ब्योरा नहीं दिया गया. कोर्ट ने कहा कि नियमावली के लिए सरकार से केवल मार्गदर्शन माँगने से लगता है कि सरकार और विभाग के स्तर पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई है और गंभीर प्रयास नहीं हुए.
कोर्ट ने 15 अप्रैल 2022 के शासनादेश का उल्लेख किया, जिसके अनुसार संविदा नियुक्ति तीन साल से अधिक नहीं चल सकती. कोर्ट ने कहा कि अस्थायी व्यवस्था को अनिश्चित काल तक खींचना न्याय के हित में नहीं है और इससे संविदा कर्मियों के शोषण की आशंका रहती है. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जग्गो बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया, जिसमें ऐसी प्रथा को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना गया है.
कोर्ट ने महानिदेशक से अगली सुनवाई पर नया व्यक्तिगत हलफनामा माँगा है, जिसमें बताना होगा कि मेडिकल-नर्सिंग Colleges में प्रोफेसर न होने से एसोसिएट/असिस्टेंट प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष बनाए जाने के कितने मामले हैं. उनका चार्ज बनाकर पेश करना होगा.
इसके अलावा कोर्ट ने प्रदेश के मेडिकल-नर्सिंग Colleges में प्रोफेसर के रिक्त पदों की संख्या, रिक्त पदों के लिए भेजे गए अधियाचन का ब्योरा, जारी विज्ञापन और उनकी वर्तमान स्थिति तथा जिन पदों का विज्ञापन नहीं हुआ उसके कारण कार्यवाहक प्राचार्यों वाले पदों का विज्ञापन हुआ या नहीं का भी ब्यौरा हलफनामे में बताने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 को होगी.