11508 पदों पर सहायक अध्यापक भर्ती में Age limit में छूट न देने पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग और सरकार से जवाब मांगा

यह आदेश जस्टिस विनोद दिवाकर ने शिव सिंह व अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता संजय कुमार यादव को सुनकर दिया है. याचिका के अनुसार उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने गत 15 सितंबर को सहायक अध्यापक (शहरी) के 11508 पदों पर विज्ञापन जारी किया था जिसमें अधिकतम Age limit में कोई छूट प्रदान नहीं की गई है.
विज्ञापन में अधिकतम Age limit में कोई छूट प्रदान नहीं की गई
अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अन्य भर्तियों में उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए Age limit का शिथिलीकरण) नियमावली 1992 के नियम 3 के आलोक में निर्धारित Age limit में सभी वर्गों के लिए अपवाद स्वरूप एक बार के लिए आयु में शिथिलीकरण प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है.
वर्तमान सहायक शिक्षक भर्ती (शहरी) में राज्य सरकार ने अधिकतम Age limit में कोई छूट प्रदान नहीं की. उन्होंने कहा कि इसके पूर्व शिक्षक भर्ती वर्ष 2018 में आई थी. उसके बाद लंबे अंतराल पर आठ साल बाद अब 2026 में आई है. सुप्रीम कोर्ट में शिक्षा मित्रों के मामले पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक हलफनामा दाखिल किया था कि जिसमें बताया गया था कि एक बड़ी भर्ती 52000 पदों की जल्द ही करने वाले है लेकिन आठ साल तक कोई भर्ती नहीं निकाली गई.
अब जब 2026 में भर्ती आई है तो ज्यादातर अभ्यर्थी ओवरेज हो गए. 2018 में जिसका बीएड/ बीटीसी पूर्ण हुआ, वे एक भी सहायक अध्यापक भर्ती में शामिल नहीं हुए और ओवरेज हो गए. याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर नियत की गई है.
गृह सचिव की जगह डिप्टी डायरेक्टर के हलफनामे से कोर्ट नाराज, सुनवाई 16 नवंबर को

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव के बजाय भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के एक उप निदेशक (डिप्टी डायरेक्टर) से हलफनामा दाखिल कराए जाने पर नाराजगी जताई है. जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने कुबेर सिंह की याचिका पर यह आदेश पारित किया.
कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 के आदेश में गृह मंत्रालय के उस सचिव को, जो राष्ट्रीय साइबर अपराध मामलों को देखते हैं, जांच की स्थिति पर हलफनामा देने का निर्देश दिया था. मकसद यह जानना था कि बैंक ने क्या कार्रवाई की.
सचिव ने खुद हलफनामा देने के बजाय इसे इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के एक डिप्टी डायरेक्टर से दाखिल करवा दिया. पीठ ने कहा कि संभव है कि गृह मंत्रालय में राष्ट्रीय साइबर अपराध देखने वाला कोई अलग “सचिव” पद न हो, लेकिन जब सचिव, गृह मंत्रालय को हलफनामा देने का निर्देश दिया गया है, तो हलफनामा मंत्रालय के किसी सचिव की ओर से ही आना चाहिए, किसी अन्य अधिकारी की ओर से नही. मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी.
कोर्ट ने याची के अधिवक्ता को अपने खाते के विभिन्न लेनदेन स्पष्ट करते हुए पूरक प्रति-शपथपत्र दाखिल करने का समय दिया. साथ ही कहा कि जो भी तथ्य वे बहस में रखना चाहते हैं, वे सब उसमें दर्ज करें. कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह आदेश 24 घंटे के भीतर रजिस्ट्रार जनरल, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा, दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से सचिव, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली को भेजा जाए. तामील की रिपोर्ट प्राप्त कर अगली तारीख से पहले रिकॉर्ड पर रखी जाएगी.
तीन नवंबर को होगा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की नव निर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की वर्ष 2026-27 की नव निर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह तीन नवंबर को आयोजित किया जाएगा. समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य राधाकांत ओझा विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे.
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी और सदस्यों की ओर से जारी आमंत्रण पत्र के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार तीन नवंबर को शाम चार बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट के क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित होगा. इसमें नव निर्वाचित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी.
समारोह में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है. कार्यक्रम के लिए एल्डर्स कमेटी के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता वीके सिंह और मुख्य निर्वाचन अधिकारी वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी की ओर से अधिवक्ताओं को आमंत्रित किया गया है.