बदलेगा इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन का Manual, मतदान के नतीजे घोषित, संशोधन के पक्ष में 3950 मत पड़े

सोमवार को लाइब्रेरी हॉल में सीक्रेट बैलट के माध्यम से हुए मतदान के बाद मंगलवार को मतपत्रों की छंटाई और उनकी गणना का कार्य संपन्न हुआ. एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे एवं महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा की अनुमति के क्रम में मतगणना चेयरमैन वरिष्ठ उपाध्यक्ष केके द्विवेदी, वाइस चेयरमैन संयुक्त सचिव प्रशासन बैरिस्टर सिंह और सदस्य उपाध्यक्ष राजकुमार त्रिपाठी व हनुमान प्रसाद मिश्र की देखरेख में संपन्न हुई मतगणना के बाद संयुक्त सचिव प्रेस रामेश्वर दत्त पांडेय के अनुसार प्रयोग किए गए कुल मतों की संख्या 5260 थी. Manual में संशोधन के पक्ष में 3950 और विपक्ष में 1310 मत पड़े.
Manual में संशोधन के पक्ष में 3950 और विपक्ष में 1310 मत पड़े
पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा ने पूरी मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह गलत करार दिया है. श्री ओझा ने आरोप लगाया कि यह मतदान सही तरीके से नहीं हुआ है. मतदान के दौरान उचित मॉनिटरिंग नहीं की जा रही थी, जिसका फायदा उठाकर कुछ मतदाताओं ने दस या उससे भी अधिक वोट डाल दिए हैं. उनका यह भी कहना है कि यह पूरी कवायद और Manual में कुछ संशोधन व्यक्तिगत हित को साधने के लिए किए जाने की योजना का हिस्सा हैं.
पूर्व अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता के मानकों पर खरी नहीं उतरती. उन्होंने कहा कि यदि वह भविष्य में फिर से एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्वाचित होते हैं, तो Manual में गलत व विवादास्पद संशोधनों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर देंगे और बार के कल्याण के लिए एक आदर्श बाईलाज लाएंगे.
अधिवक्ता चेंबर रखरखाव खर्च के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन, कहा अधिवक्ताओं को न बनाये किरायेदार
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन देकर बहुमंजिला अधिवक्ता चेंबर व पार्किंग भवन का सरकारी खर्च से रखरखाव करने का अनुरोध किया है. अधिवक्ता मृत्यंजय तिवारी, नरेंद्र कुमार चटर्जी,बी डी पांडेय,प्रदीप कुमार द्विवेदी, अमित कुमार दूबे, देवेंद्र नाथ मिश्र, विवेक दूबे, बृजेंद्र त्रिपाठी आदि अधिवक्ताओं का कहना है कि अधिवक्ताओं के चेंबर भवन का निर्माण राज्य निधि से किया गया है.
हाईकोर्ट भवन का रख-रखाव राज्य सरकार लोक निर्माण विभाग के मार्फत करती है.चेंबर भवन भी हाईकोर्ट का भवन है. जब हाईकोर्ट भवन का किराया नहीं लिया जाता तो वकीलों से किराया लेने का औचित्य नहीं है. अधिवक्ताओं ने खर्च के नाम पर सिक्योरिटी राशि के अलावा मासिक किराया लेने की हाईकोर्ट की नीति को अनाधिकार करार दिया और कहा कि सरकारी खर्च पर भवन के रख-रखाव की व्यवस्था की जाय. अधिवक्ताओं द्वारा चेंबर आवंटन समिति के मासिक किराया लेने के फैसले का विरोध किया जा रहा है. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पत्र पर महानिबंधक ने भी प्रमुख सचिव न्याय को पत्र लिखकर खर्च की भरपाई का अनुरोध किया है.