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प्रदेश सरकार ने मंजूर कर ली ग्रांट तो अधिवक्ताओं से नहीं लिया जायेगा Chamber का मेंटीनेंस चार्ज, 25 सदस्यीय प्रतिज्ञनिधिमंडल चीफ जस्टिस से मिला

प्रदेश सरकार ने मंजूर कर ली ग्रांट तो अधिवक्ताओं से नहीं लिया जायेगा Chamber का मेंटीनेंस चार्ज, 25 सदस्यीय प्रतिज्ञनिधिमंडल चीफ जस्टिस से मिला

Chamber आवंटन संघर्ष समिति का 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल समिति के संयोजक राजेश खरे और समिति के अध्यक्ष आरपी तिवारी के संयुक्त नेतृत्व में सोमवार 6 जुलाई को इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरूण भंसाली से मिला और अधिवक्ता ओं की समस्याओं से संबंधित 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा. न्यायाधीशगणो ने प्रतिनिधिमंडल को एक सप्ताह के अंदर Chamber आवंटन में आ रही समस्याओं को लिखित में सुझाव देने को कहा, ताकि उन पर विचार कर समाधान निकाला जा सके.

कहा कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार धनराशि उपलब्ध कराती है तब अधिवक्ताओं से Chamber का मासिक मेंटीनेंस चार्ज नहीं लिया जायेगा. वार्ता के समय मुख्य न्यायाधीश के अलावा Chamber आवंटन कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस एमसी त्रिपाठी, समिति के सदस्यों में जस्टिस एसडी सिंह, जस्टिस अजय भनोट, जस्टिस  विकास बुधवार, जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल आदि मौजूद रहे.

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Chamber आवंटन संघर्ष समिति ने 7 जुलाई को मिलने का समय मुख्य न्यायाधीश से मांगा था किंतु उन्होंने Chamber आवंटन की समस्याओं को देखते हुए समिति के अनुरोध को तत्काल स्वीकार कर लिया और उन्होंने साथ 6 जुलाई सोमवार की शाम 5:00 बजे ही प्रतिमंडल को वार्ता हेतु बुला लिया. जज लाइब्रेरी हाल में वार्ता करीब डेढ़ घंटा चली वार्ता के क्रम में समिति ने Chamber आवंटन सूची पर आपत्ति जताई कि सूची में मृत अधिवक्ताओं के नाम शामिल हैं एवं सुप्रीम कोर्ट व अन्य जगहों पर वकालत करने वाले अधिवक्ताओं के भी नाम शामिल है.

आपत्तियां जमा कर चुके सैकड़ो अधिवक्ताओं का नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है जिन्हें शामिल किया जाए इस पर विचार करने का आश्वासन दिया गया साथ ही नवनिर्मित मल्टीनेशनल लेवल बिल्डिंग में Chamber की तीन श्रेणियां बनी है जिसमें अधिवक्ताओं के बैठने की संख्या कमेटी द्वारा निर्धारित की गई है कक्ष जरूरत से ज्यादा छोटे होने के कारण बैठने में समस्याएं होंगी.

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इसलिए अधिवक्ताओं की संख्या हर श्रेणी में कम की जाए. अधिवक्ता ऑफिसर आफ द कोर्ट माना जाता है और नि:शुल्क न्याय उपलब्ध कराने के लिए कार्य करता है इसलिए Chamber में फर्नीचर की व्यवस्था निशुल्क उपलब्ध कराई जाए जिससे Chamber में फर्नीचर की एक रूपता बनी रहे. Chamber आवंटन नियमावली में टेनेंट एवं को टेनेंट का नाम दिया गया है जिसे बदलकर मुख्य आवंटी, को आवंटी अधिवक्ता किया जाए, इसपर मुख्य न्यायाधीश ने तुरंत सुधार करने का आदेश दिया.

Chamber आवंटन में निर्धारित धरोहर राशि बहुत अधिक है

Chamber आवंटन में मासिक किराएदारी ₹1500 को पूरी तरह से खत्म किया जाए. Chamber आवंटन में निर्धारित धरोहर राशि बहुत अधिक है मुख्य आवंटी को 75000 से घटाकर ₹25000 किया जाए को आवंटी अधिवक्ता को ₹30000 से घटाकर ₹15000 किया जाए एवं जूनियर अधिवक्ताओं की कंसल्टेशन सीट आवंटन शुल्क ₹10000 से घटाकर ₹5000 किया जाए. साथ ही हाईकोर्ट की Chamber आवंटन समिति में दोनों बार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए एवं मल्टी लेवल बिल्डिंग की प्रशासनिक नियंत्रण व्यवस्था समिति में दोनों बार एशोसिएशन के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए.

संघर्ष समिति की सात सूत्रीय मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन न्यायमूर्ति गणों ने दिया एवं एक हफ्ते के अंदर जो भी समस्याएं हैं उनको लिखित रूप मे सुझाव मांगे ताकि उनका तुरंत निराकरण कर Chamber आवंटन की प्रक्रिया को शुरू किया जा सके.

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वार्ता के समय मुख्य रूप से समिति के संयोजक राजेश खरे, समिति के अध्यक्ष आरपी तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता, कृष्ण कुमार मिश्रा, महासचिव जगदीश सिंह बुंदेला, संतोष पांडे, जेएस बघेल, एसी तिवारी, वीर सिंह, सुनील कुमार, हरबंस सिंह, श्रीमती सरिता सिंह, प्रशांत सिंह रिंकू, रत्नेश खरे, रत्नेश शंकर दीक्षित, आलोक श्रीवास्तव, अहमद अली सिद्दीकी, प्रभु नारायण तिवारी, राजीव द्विवेदी, विनोद जायसवाल, राजेश कुमार, अभिषेक निगम, एसएन चौहान, अमन श्रीवास्तव शामिल रहे.

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