Family dispute को लेकर याचिका पर एकलपीठ ने पति याची पर लगाया 15 लाख रुपए हर्जाना, डबल बेंच ने लगायी रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच ने सिंगल बेंच द्वारा Family dispute को लेकर पति पर लगाये गये 15 लाख रुपये हर्जाना की वसूली पर रोक लगा दी है और पत्नी से इस सबंध में जबाब मांगा है. कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया हर्जाना हुए नुकसान के एवज में लगाया जाता है. सिंगल बेंच के फैसले से लगता है कि नुकसान का कोई आंकलन नहीं किया गया और भारी हर्जाना लगा दिया गया है. दो जजों की बेंच ने इस मुद्दे को विचारणीय माना और पत्नी को नोटिस जारी करके चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है.
यह आदेश जस्टिस एसडी सिंह और जस्टिस सत्यवीर सिंह की बेंच ने रणजीत सिंह की तरफ से Family dispute को लेकर दाखिल की गयी स्पेशल अपील को सुनवाई योग्य मानते हुए दिया है. अपील पर वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा व अरूण कुमार सोनी ने बहस की. इनका कहना था कि याची ने अधीनस्थ अदालत में विचाराधीन Family dispute मुकद्दमे के शीघ्र निस्तारण के लिए समादेश जारी करने की मांग की.
याची की पत्नी विपक्षी नीतू सिंह हाईकोर्ट में जज की स्टाफ है. तलाक का केस चल रहा है. परिवार अदालत प्रयागराज ने पति के खर्च के लिए पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया है. एकलपीठ ने Family dispute को लेकर याचिका खारिज करते हुए याची पर 15 लाख का हर्जाना लगाया. जिसे अपील में चुनौती दी गई है.
बता दें कि इस Family dispute की सुनवाई सिंगल बेंच के जस्टिस विनोद दिवाकर ने की थी. सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दायर याचिका में ईमानदारी की कमी है और इसमें इस अदालत के पास मौजूद सुपरवाइजरी अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने की कोई जरूरत नहीं है. कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और पति पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.
Family dispute याचिका रणजीत सिंह की तरफ से हाई कोर्ट में दाखिल की गयी थी

Family dispute याचिका रणजीत सिंह की तरफ से हाई कोर्ट में दाखिल की गयी थी. इसमें मांग की गयी थी कि फैमिली कोर्ट में चल रहे भरण पोषण मामले संख्या 523/2025 की कार्यवाही में तेजी लाई जाए. यह मामला बीएनएसएस की धारा 144 (Family dispute के बाद पत्नियों, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण का आदेश) के तहत दायर किया गया था जो ‘रणजीत सिंह बनाम नीतू सिंह’ फैमिली कोर्ट इटावा की अदालत में पेंडिंग है.
कोर्ट में पेश किये गये तथ्यों के अनुसार विवाह 2019 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार इटावा में संपन्न हुआ. विवाह के समय दोनों पक्ष बेरोजगार थे और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे. विवाह के तुरंत बाद पत्नी को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ‘अतिरिक्त निजी सचिव’ के पद पर नौकरी मिल गई लेकिन पति को सरकारी नौकरी नहीं मिली. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हुए याचिकाकर्ता पति ने कानून की पढ़ाई पूरी की और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया.
Family dispute के बाद भरण-पोषण के आवेदन में पति की तरफ से तर्क दिया गया कि नौकरी मिलने के बाद पत्नी ने याचिकाकर्ता और उसकी माँ के साथ झगड़ा और दुर्व्यवहार शुरू कर दिया. उसने पति को उसके परिवार से अलग करने के लिए हर संभव प्रयास किया और पुलिस को प्रभावित करके याचिकाकर्ता तथा उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ झूठे आपराधिक मुकदमे दायर कर दिए.
याचिका में जानकारी दी गयी कि Family dispute के बाद पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक की एक याचिका भी दायर की है जो विवाह केस नंबर 2504/2023 के रूप में पंजीकृत है. जिस पर प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट प्रयागराज के समक्ष सुनवाई चल रही है. दलील दी कि पति ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत भी एक आवेदन दायर किया है, जो इटावा के प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट के समक्ष केस संख्या 43/2024 के रूप में पंजीकृत है.
प्रतिवादी पत्नी ने फैमिली कोर्ट की प्रोसीडिंग में भाग नहीं लिया है. वास्तव में प्रतिवादी पत्नी ने इस न्यायालय के समक्ष स्थानांतरण आवेदन दायर किया था जिसमें इटावा के फैमिली कोर्ट के समक्ष विचाराधीन केस संख्या 43/2024 को स्थानांतरित करने की मांग की गई थी. इस न्यायालय की एक समन्वय पीठ ने 14.11.2024 के आदेश से उक्त कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.
प्रतिवादी पत्नी की तरफ से कहा गया था कि पति एक राजनीतिक परिवार से आता है और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में एक पंजीकृत अधिवक्ता है. याचिकाकर्ता के चाचा इटावा निर्वाचन क्षेत्र से 15वीं लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं. उसकी माँ ग्राम प्रधान थीं. याचिकाकर्ता निर्माण के व्यवसाय में भी संलग्न रहा है.
याचिकाकर्ता एक धोखेबाज आदतन झूठा और लालची व्यक्ति है. वह एक अय्याशी भरा जीवन जीने के लिए मुफ्त का पैसा चाहता है. पत्नी के नाम से दो बार लोन लेकर वह राशि को हड़प चुका है और उस पैसे को अय्याशी में उड़ा चुका है. इसी के आधार पर सिंगल बेंच ने पति पर 15 लाख रुपये जुर्माना लगाया था.