Advocate’s Chamber के आवंटन में सिक्योरिटी मनी, मासिक किराया और दंडात्मक उपबंधो का विरोध, 5 जुलाई तक आवेदन की डेट बढ़े

बार और बेंच को न्याय का दो पहिया कहा जाता है. अधिवक्ता केवल अपने निजी हित के लिए नहीं, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली को चलाने के लिए न्यायालय परिसर में उपस्थित रहते हैं. ऐसे में सामान्य अधिवक्ताओं पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डालना क्या न्यायसंगत है?
सरकारी धन से निर्मित Advocate’s Chamber का उद्देश्य अधिवक्ताओं को सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि उन्हें आर्थिक रूप से बोझिल बनाना. इंडियन लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने महानिबंधक से मिलकर कहा अधिवक्ता आफीसर आफ कोर्ट है उन्हें किरायेदार न बनायें.
उपाध्यक्ष भानुदेव पांडेय ने कहा इससे पहले हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के समय एक हजार जमा कराकर Advocate’s Chamber आवंटित हुए थे. इसके दशकों बाद बने Advocate’s Chamber ढाई हजार जमा कराकर आवंटित किए गए थे. अतिरिक्त कुछ नहीं लिया गया. फिर लगभग आठ साल पहले पांच हजार जमा कराकर चेंबर आवंटित किए गए थे. अब सिक्योरिटी मनी के अलावा प्रतिमाह किराया मांगा जा रहा.
पूर्व कार्यकारिणी सदस्य सर्वेश्वर लाल श्रीवास्तव व लीगल एड फोरम के अध्यक्ष ईशान शिशु का कहना है कि अधिवक्ता भवन सेंट्रलाइज्ड ए सी है. छत पर सोलर पैनल से बिजली मिलेगी. सरकारी व्यवस्था है. एक्सिलरेटर व लिफ्ट की व्यवस्था की गई है. बिजली खर्च में काफी कमी आई है. श्रीवास्तव ने कहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने हाईकोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में कहा था करोड़ों लेकर अधिवक्ता भवन व पार्किंग बनावाई है. जरुरत पड़ेगी तो और धन मुहैया करायेगे.
पूर्व संयुक्त सचिव प्रशासन संतोंष कुमार मिश्र का कहना है कि जब सारा खर्च सरकार ने अधिवक्ताओं के लिए किया और आवंटन की जिम्मेदारी हाईकोर्ट को सौंपी तो आवंटन के लिए भारी धनराशि की वसूली कहा तक जायज है. मेंटिनेंस के लिए बहुत जरूरी हो तो सीनियर अधिवक्ता से 50 हजार व तीस साल से अधिक वकालत अनुभव वाले अधिवक्ता से 25 हजार और इससे नीचे के अधिवक्ता से 10 हजार तथा केवल सीट लेने वाले अधिवक्ताओं से 5 हजार लिया जाना उचित हो सकता है.
अधिवक्ता आलोक मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं से हस्ताक्षरित बार एसोसिएशन की आम सभा बुलाने का अध्यक्ष महासचिव के नाम ज्ञापन एसोसिएशन कार्यालय में सौंपा गया. वकीलों का कहना है कि किराया व सिक्योरिटी मनी समाप्त करने पर आम सभा में विचार किया जाय.
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*हाई कोर्ट में Advocate’s Chamber एलॉटमेंट रूल्स में मासिक किराए में डिफॉल्ट होने पर अधिवक्ता का रोल नंबर सस्पेंड करने का प्रावधान बेहद आपत्तिजनकि मानते हुए* ऑल इंडिया लायर्स यूनियन इलाहाबाद हाई कोर्ट इकाई ने हाई कोर्ट बार एसोसिएशन से ऐसे प्रावधान पर कड़ी आपत्ति दर्ज करने की मांग किया है. साथ ही मासिक किराया और एक मुश्त राशि लिए जाने के प्रावधान पर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की आम सभा बुलाए जाने की मांग का समर्थन किया है.
आम सभा बुलाए जाने का प्रस्ताव आज पूर्व उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह यादव ने 520 अधिवक्ता सदस्यों का दस्तख़त कराकर बार एसोसिएशन कार्यालय में प्रस्तुत किया है. यूनियन के अध्यक्ष अरविंद कुमार राय व सचिव आशुतोष कुमार तिवारी ने कहा कि जनता के धन से बनी पार्किंग और चैंबर बिल्डिंग में अलॉटमेंट राशि और मासिक किराए के बहाने आम अधिवक्ताओं के खिलाफ प्रावधान किए गए हैं जो स्वीकार करने योग्य नही है. यूनियन आम अधिवक्ताओं के आगे आकर ऐसे प्रावधानों का विरोध करने की मांग करती है. अधिवक्ता मनीष द्विवेदी ने निःशुल्क Advocate’s Chamber आवंटित करने की मांग की है.
नहीं थम रहा हाईकोर्ट में Advocate’s Chamber आवंटित करने के लिए किराया मांगने का विरोध
बुंदेलखंड अधिवक्ता महासंघ ने महानिबंधक को Advocate’s Chamber आवंटन में किराया लेने के खिलाफ ज्ञापन सौंपा. साथ ही इसी मुद्दे पर विचार के लिए बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महासचिव से आमसभा बुलाने की मांग की. अधिवक्ताओं ने Advocate’s Chamber आवंटन रूल्स संशोधन की भी मांग की. कहा अधिवक्ताओ से किराया लेने अनुचित ही नहीं गरिमा के खिलाफ है. चेंबर आवंटन के लिए जारी अधिवक्ता सूची पर आपत्ति की अवधि 5 जुलाई तक बढ़ाने की भी मांग की. अभी 5 जून तक आपत्ति मांगी गई है.
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12 बजे महानिबंधक को पांच सूत्री मांगपत्र सौंपा. कहा रूल्स अधिवक्ता विरोधी है. सूची पर जून छुट्टी में आपत्ति मांगना नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन है. एडवोकेट रोल से नाम हटाने की धमकी अलोकतांत्रिक है. कहा अधिवक्ता आफीसर आफ कोर्ट है, सस्ता सुलभ न्याय के लिए सिक्योरिटी मनी लेकर आवंटन किया जाय किराया समाप्त हो. भवन में पानी बिजली सफाई व फर्नीचर मुफ्त दिया जाय.
ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष अशोक गुप्ता, महासचिव जगदीश सिंह बुंदेला उपाध्यक्ष सुनील कुमार यादव, पीके राव, सचिव चंद्र कांत द्विवेदी, सार्थक सिंह, कोषाध्यक्ष सोम नारायण मिश्र, बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष राजेश करें, वरिष्ठ अधिवक्ता सीपी उपाध्याय, आरपी तिवारी, धर्मैद्र प्रताप सिंह, हरवंश सिंह, मृत्यंजय तिवारी, आशुतोष त्रिपाठी, आशुतोष पाण्डेय, एके तिवारी, सुभाष चन्द्र सिंह, राय साहब यादव, धर्मेंद्र सिंह, वीपी शुक्ल आदि अधिवक्ता शामिल थे.