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पुलिस कमिश्नर आगरा से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा 2009 से Non-bailable warrant पर क्यों नहीं हो सकी कार्रवाई

पुलिस कमिश्नर आगरा से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा 2009 से Non-bailable warrant पर क्यों नहीं हो सकी कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. पूछा है कि 2009 में जारी Non-bailable warrant का तामीला क्यो नही किया जा सका यह आदेश जस्टिस जय प्रकाश तिवारी ने कड़े सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है. आगरा के तत्कालीन जेलर कड़े सिंह जिनके विरुद्ध वर्ष 2009 से Non-bailable warrant और कुर्की कार्यवाही लंबित चल रही है. उन्होंने अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की है.

मामले के अनुसार वर्ष 2008 में पुलिस चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए याची को सम्मन जारी किया. 8 अप्रैल 2009 को पहली बार Non-bailable warrant जारी हुआ. 10 फरवरी 2012 को संबंधित न्यायालय ने जमानत बॉन्ड जब्त कर पुनः धारा 82-83 की कार्यवाही शुरू की और गृह सचिव उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर आवेदक को गिरफ्तार कराने का अनुरोध किया.

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याची अधिवक्ता का कहना था कि उसके इन आदेशो की कोई जानकारी नहीं थी. नवंबर 2025 में जब वे ट्रेजरी में जीवन प्रमाण पत्र जमा करने गए तब एक सहकर्मी से Non-bailable warrant मामले का पता चला. इसके बाद उन्होंने तत्काल संबंधित न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, जिसे 15 दिसंबर 2025 को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया कि Non-bailable warrant और धारा 82-83 की कार्यवाही पहले से लंबित है.

Non-bailable warrant और कार्यवाही निष्पादित क्यों नहीं हो सकी

न्यायालय ने कहा याची एक सरकारी कर्मचारी था उसके निवास और कार्यस्थल की जानकारी अधिकारियों को थी, फिर भी 2009 से लेकर अब तक Non-bailable warrant और कार्यवाही निष्पादित क्यों नहीं हो सकी. न्यायालय ने पुलिस आयुक्त आगरा को जांच कर व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 5 जून 2026 को निर्धारित की गई है.

अब्बास अंसारी ने एसपी गाजीपुर के खिलाफ दाखिल की अवमानना याचिका, आदेश का पालन न करने का आरोप

मऊ से विधायक अब्बास अंसारी ने गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. इराज राजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है. अपने अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय के माध्यम से दायर याचिका में उन्होंने कहा है कि राजनीतिक दबाव में उनके और उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है. गाजीपुर पुलिस ने उनके परिवार के खिलाफ  फर्जी हिस्ट्रीशीट खोल दी है. हालांकि कोर्ट ने अभी इस याचिका पर सुनवाई की कोई तिथि नहीं नियत की है.

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अवमानना याचिका के लिए शपथपत्र के साथ दायर आवेदन में यह भी कहा गया है कि आपराधिक  याचिका में पारित जुलाई 2025 में हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है. कोर्ट ने कहा था कि याची पहले अपना मामला राज्य सरकार के समक्ष रखें. दो सप्ताह के भीतर एसपी गाजीपुर को प्रत्यावेदन दें, जिस पर एसपी एक महीने में तर्कपूर्ण आदेश पारित करेंगे. अब्बास अंसारी ने 12 दिसंबर 2022 को खोली गई हिस्ट्रीशीट रद करने की मांग उक्त याचिका में थी. यह हिस्ट्रीशीट मोहम्मदाबाद थाने में खोली गई है.

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