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मौलाला खुर्शीद जमाल कादरी की तलाश में कौन सी Agency लगायी जाय, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केन्द्र सरकार से कहा 24 घंटे में बतावें

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केन्द्र सरकार से पूछा, मौलाला खुर्शीद जमाल कादरी की तलाश में कौन सी Agency लगायी जाय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पाये और जमानत मिलने पर गायब हुए मौलाना खुर्शीद जमाल कादरी की तलाश के लिए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से पूछा है कि कौन सी agency लगाई जाय जो कादरी को अदालत में पेश कर सके. राज्य की पुलिस की विफलता के बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार का रूख किया है और डिप्टी सालिसिटर जनरल एसके पाल से 24 घंटे में जानकारी मांगी है. जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजय कुमार बेंच ने यह निर्देश दिया है. कहा है कि राज्य पुलिस कादरी की तलाश में असफल रही है. इसलिए केंद्रीय एजेंसियों (agency) को इस कार्य में शामिल जा सकता है.

भारत सरकार के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल एसके पाल से कोर्ट ने कहा  कि वह  सचिव गृह मंत्रालय से निर्देश प्राप्त कर बतायें किस agency को कादरी को अदालत में पेश करने की जिम्मेदारी सौंपी जाय. शुक्रवार 19 दिसंबर को प्रकरण में फिर सुनवाई होगी. खंडपीठ ने पूर्व में पुलिस को आदेश दिया था कि हर संभव प्रयास कर उसे हर हाल में अदालत में पेश किया जाए. 

गृह मंत्रालय से निर्देश प्राप्त कर बतायें किस agency को कादरी को अदालत में पेश करने की जिम्मेदारी सौंपी जाय

कोर्ट ने कहा था अभियुक्त की मृत्यु होने अथवा देश छोड़कर भाग जाने के अलावा हर हाल में आदेश का पालन होना चाहिए.  मौलाना खुर्शीद जमाल कादरी ही याची है. यह याचिका 1984 में दायर की गई थी. धूमनगंज थाने में दर्ज हत्या व डकैती के मुकदमे में ट्रायल कोर्ट ने उसे इसी साल आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

मौलाना ने सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की और जमानत के बाद से लापता हो गया. हाई कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था. पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार याची प्रयागराज छोड़कर जा चुका है तथा दोनों जमानतदारों की भी मृत्यु हो चुकी है. मौलाना का स्थायी पता मुजफ्फरपुर बिहार का है.  हंडिया में जहां वह मुस्लिम बच्चों को अरबी पढ़ाता था, वहां उसका कोई स्थायी पता नहीं था.

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