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Retirement के बाद कर्मचारी से नहीं की जा सकती अधिक वेतन की वसूली व पेंशन में कटौती: हाई कोर्ट

Retirement के बाद कर्मचारी से नहीं की जा सकती अधिक वेतन की वसूली व पेंशन में कटौती: हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद वेतनमान का पुनर्निर्धारण सुप्रीम कोर्ट के जगदीश प्रसाद सिंह केस व 16 जनवरी 07 के शासनादेश के विरुद्ध है. इसलिए न तो अधिक भुगतान की वसूली की जा सकती है और न ही पेंशन में कटौती की जा सकती है. कोर्ट ने पेंशन कटौती के एसएसपी रेलवे प्रयागराज के आदेश 7 जनवरी 26 को रद कर दिया और चुनौती याचिका स्वीकार करते हुए अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन का निर्धारण करने का निर्देश दिया है.

यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने बाबूराम की याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर व राज्य सरकार के अधिवक्ता को सुनकर दिया है. इनका कहना था कि याची 31 नवंबर 25 को सेवानिवृत्त (Retirement) हुआ. इसके बाद 1 जुलाई 11 की तिथि से वेतनमान पुनरीक्षित कर घटा दिया गया. याची को कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया. 2008 में गलत वेतन निर्धारण किया गया था.

धिक भुगतान की वसूली सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद नहीं की जा सकती

अधिक भुगतान की वसूली सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने रफीक मसीह केस में स्पष्ट कहा है कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद उससे अधिक वेतन भुगतान की वसूली नहीं की जा सकती और न ही पेंशन में कमी की जा सकती है. कोर्ट ने सुशील कुमार सिंघल केस के हवाले से कहा कि एस एसपी रेलवे का आदेश विधि विरुद्ध है. विभागीय गलती के लिए सेवानिवृत्त (Retirement) कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता.

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डीसीपी यमुनापार को धोखाधड़ी मामले की विवेचना की प्रगति की जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थाना कौंधियारा में दर्ज धोखाधड़ी मामले की निष्पक्ष विवेचना की मांग में दाखिल याचिका पर डीसीपी यमुनापार को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर विवेचना की प्रगति की जानकारी मांगी है. तथ्य दें ताकि तार्किक निष्कर्ष निकाला जा सके. याचिका की अगली सुनवाई 29 मई को होगी. कोर्ट ने सीजेएम के मार्फत आदेश की जानकारी डीसीपी व थानाध्यक्ष को देने का निर्देश दिया है.

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यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने झूंसी की चंद्र कली की याचिका पर दिया है. याचिका पर अधिवक्ता पंकज कुमार तिवारी व सौरभ कुमार तिवारी ने बहस किया. इनका कहना है कि कौंधियारा थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 419,420,467 व 468 के तहत एफआईआर दर्ज है. कोर्ट ने अपर शासकीय अधिवक्ता शशि शेखर तिवारी को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है और अन्य दो निजी विपक्षियों को नोटिस जारी की है. याची का कहना है कि सही विवेचना का आदेश दिया जाय.

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