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Arya Samaj सिविल लाइंस प्रयागराज के गठन व वैधता की जांच का आदेश, हाई कोर्ट ने डीएम से 30 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

Arya Samaj सिविल लाइंस प्रयागराज के गठन व वैधता की जांच का आदेश, हाई कोर्ट ने डीएम से 30 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल लाइंस प्रयागराज में एक ही पंजीकरण व एक पते से कार्यरत Arya Samaj प्रयागराज व Arya Samaj संस्थान सेवा समिति प्रयागराज की स्थापना व वैधता की जांच का आदेश दिया है. कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को निबंधक फर्म चिट व सोसायटी व पुलिस कमिश्नर द्वारा नामित सीनियर पुलिस अधिकारी की जांच समिति गठित करने तथा 30 दिन में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. याचिका की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी.

यह आदेश जस्टिस समित गोपाल ने साधना गुप्ता व सुहानी गुप्ता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता राम विशाल मिश्रा व सचिन मिश्र व Arya Samaj के सचिव सत्येन्द्र कुमार यादव के अधिवक्ता राम साहब यादव ने पक्ष रखा. याची अधिवक्ता राम विशाल मिश्रा का कहना था कि याची की बेटी को मिर्जापुर के विपक्षी राजेश कुमार गुप्ता व अन्य की अवैध निरूद्धि से मुक्त कराकर स्वतंत्र किया जाय.

कोर्ट ने Arya Samaj के सचिव से पूछा कि कितने प्रमाणपत्रो में चाका नैनी के राहुल व आकाश गवाह है

कोर्ट ने एसएचओ विंध्याचल, मिर्जापुर को निर्देश दिया और सुहानी गुप्ता पेश हुई बताया कि बालिग है अपनी मर्जी से राजेश कुमार गुप्ता के साथ Arya Samaj में शादी कर रहे रही है. उसे किसी ने निरूद्ध नहीं किया है. जिस पर कोर्ट ने उसे स्वतंत्र कर दिया. दूसरी तरफ कोर्ट ने Arya Samaj के सचिव को जारी कर पूछा कि कितने प्रमाणपत्रो में चाका नैनी के राहुल व आकाश गवाह है और पिछले पांच महीनों में कितने प्रमाणपत्र जारी किए.

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Arya Samaj के सचिव ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि दोनों गवाह विपक्षी के है, पहली बार आये है. उनका Arya Samaj से कोई सरोकार नहीं है. 29 जुलाई 25 को विवाह संस्कार प्रमाणपत्र व 28 जुलाई 25 को शुद्धि प्रमाणपत्र जारी किया गया है. पता चला कि एक ही पंजीकरण, एक ही पते पर दोनों संस्थान काम कर रहे.

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सचिव अधिवक्ता है तो वह सचिव के रूप में कैसे काम कर रहे. यह धोखाधड़ी है. सचिव ने कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है. कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है. दोनों संस्थाओं (Arya Samaj) का गठन 28 जुलाई 24 को किया गया है. ये फर्जी विवाह संस्कार प्रमाणपत्र व शुद्धि प्रमाणपत्र जारी कर रही है. जिसकी वैधता की जांच की जाय.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ अवमानना याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका  खारिज कर दी है. आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी. आरोप लगाया था कि शंकराचार्य ने जमानत की शर्तों उल्लंघन किया है. इसलिए उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना के आरोप में केस चलाया जाए.

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हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुक्तानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ दायर अवमानना याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी. आशुतोष महाराज ने प्रयागराज में पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत देते समय लगाई गई शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का अनुरोध किया था.

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