इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी Assistant Teacher भर्ती की अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठने की अंतरिम राहत, UPPSC ने 5 मई को उनका आवेदन निरस्त कर दिया था

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Assistant Teacher (एलटी ग्रेड) भर्ती परीक्षा 2026 के संबंध में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है. हाईकोर्ट ने Assistant Teacher भर्ती की अभ्यर्थी को दी परीक्षा में बैठने की अंतरिम राहत प्रदान कर दी है. जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने Assistant Teacher भर्ती की अभ्यर्थी नीतू गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. याचिकाकर्ता ने राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में Assistant Teacher के पद के लिए ओबीसी और उत्कृष्ट खिलाड़ी श्रेणी के तहत आवेदन किया था, लेकिन अनिवार्य खेल प्रमाण पत्र ऑनलाइन अपलोड न कर पाने के कारण उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 5 मई 2026 को उनका आवेदन निरस्त कर दिया था.
आयोग की ओर से तर्क दिया गया कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार सभी दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य था और अभ्यर्थी ने सुधार के लिए दी गई समय सीमा का लाभ भी नहीं उठाया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता और 16 मई 2026 से शुरू होने वाली परीक्षा की तात्कालिकता को देखते हुए मानवीय आधार पर हस्तक्षेप किया. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अभ्यर्थी को इस स्तर पर रोका गया, तो उसे अपूरणीय क्षति होगी.
Assistant Teacher के पद के लिए इस शर्त पर परीक्षा में बैठने की अनंतिम अनुमति दी कि उसे तत्काल अपना वैध खेल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा
न्यायालय ने याचिकाकर्ता को Assistant Teacher के पद के लिए इस शर्त पर परीक्षा में बैठने की अनंतिम अनुमति दी है कि उसे तत्काल सक्षम अधिकारी के समक्ष अपना वैध खेल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा. यदि अभ्यर्थी वैध प्रमाण पत्र पेश करने में विफल रहती है, तो उसका अभ्यर्थन स्वतः ही निरस्त माना जाएगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल इस मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे भविष्य में किसी अन्य भर्ती प्रक्रिया के लिए नजीर के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. याचिका को इन निर्देशों के साथ निस्तारित कर दिया गया है.
प्रोफेसर अजीत सिंह को भी एचयू आर्थोपेडिक विभाग का एचओडी नियुक्त करने के लिए कुलपति को निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के वरिष्ठतम प्रोफेसर अजीत सिंह को आर्थोपेडिक विभाग का एचओडी नियुक्त करने पर कुलपति को तीन हफ्ते में नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि कुलपति निर्णय नहीं ले पाते तो कार्यकारिणी परिषद चार हफ्ते में कानून के मुताबिक निर्णय ले.
यह आदेश जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने अजीत सिंह की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता एके मालवीय और बीएचयू के अधिवक्ता हेम प्रताप सिंह ने बहस की. याची का कहना था कि वह 2011 से आर्थोपेडिक विभाग में कार्यरत हैं. वरिष्ठतम होने के नाते उसे तीन साल के लिए एचओडी बनने का अधिकार है.
किंतु कुलपति ने माडर्न मेडिसिन संकाय के डीन आईएमएस को आर्थोपेडिक विभाग का एचओडी नियुक्त किया है जबकि याची का इस पद पर अधिकार है. विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने कहा कुलपति या कार्यकारिणी परिषद दोनों निर्णय ले सकते हैं. दोनों को ही अधिकार है.इसपर कोर्ट ने कुलपति को आदेश दिया है.