‘एक दुर्घटना के 2 Eyewitness और उन दोनों के बयान एक दूसरे से मेल नहीं खाते तो महत्वपूर्ण हो जाता है पुलिस की तरफ से मौके पर बनाया गया स्पॉट मैप’
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से दाखिल की गयी अपील, कहा: ट्रिब्यूनल के फैसले में कोई खामी नहीं

एक दुर्घटना के दो Eyewitness हैं और उन दोनों के बयान एक दूसरे से मेल नहीं खाते तो पुलिस की तरफ से मौके पर बनाया गया स्पॉट मैप बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. स्पॉट मैप में जो तथ्य अंकित किये गये थे, वह जिस किसी भी Eyewitness के बयान से मैच करते हैं, उसी Eyewitness की गवाही को सही माना चाहिए चाहिए. इस पर विस्तार से चर्चा के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को खारिज कर दिया है. बेंच ने क्लेम ट्रिब्यूनल कानपुर नगर के फैसले को सही ठहराया है.
यह अपील ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी की तफर से मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल कानपुर नगर द्वारा M.A.C.P. नंबर 748/2012 (श्रीमती सुनीता और अन्य बनाम शिवनंदन, मृतक – उनके कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से) में 18.5.2017 को दिए गए फैसले और अवार्ड को रद्द करने की मांग के साथ दायर की गई थी. इस फैसले में, ट्रिब्यूनल ने अपीलकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे दावेदारों (मृतक मिंटू उर्फ राजेश कुमार के माता-पिता) को 4,64,000 रुपये का मुआवजा और उस पर 7% सालाना की दर से ब्याज का भुगतान करें.
अपीलकर्ता के वकील ने कहा कि ट्रिब्यूनल मृतक और बाइक चालक की मिली-जुली लापरवाही पर विचार करने में विफल रहा. ट्रिब्यूनल ने इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया कि मारुति वैन नंबर LPG किट लगाकर चलाया जा रहा था जिसके लिए इसके मालिक ने 60 रुपये का अतिरिक्त प्रीमियम नहीं दिया था. ऐसा करना बीमा पॉलिसी की शर्तों और नियमों का उल्लंघन था.
तर्क दिया गया कि मारुति वैन की मालकिन श्रीमती सुमन पाल (Eyewitness) से ट्रिब्यूनल के सामने पूछताछ की गई थी. उन्होंने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि वह अपने पति के साथ रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर 2.8.2012 को उसी गाड़ी से घर लौट रही थीं. वे टटियागंज रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुँचे तो मृतक जो मोटरसाइकिल पर पीछे बैठा था और उसका चालक अजीत बाबू उर्फ राहुल (Eyewitness) रांग साइड से आए.
दोनों गाड़ियों के बीच एक पिकअप ट्रक भी चल रहा था. पिकअप ट्रक के ड्राइवर ने मोटरसाइकिल सवारों को बचाने की कोशिश की लेकिन वह मारुति वैन से टकरा गया. टक्कर की वजह से मारुति वैन का संतुलन बिगड़ गया और वह पास ही लगे बिजली के खंभे से जा टकराई. पिकअप ड्राइवर ने ही मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मारी थी, जिससे मोटरसाइकिल और उस पर सवार लोग जमीन पर गिर पड़े.
ट्रिब्यूनल ने गाड़ी की मालकिन Eyewitness श्रीमती सुमन पाल के बयान को नजरअंदाज कर दिया
तर्क दिया गया कि ट्रिब्यूनल ने गाड़ी की मालकिन श्रीमती सुमन पाल (Eyewitness) के बयान को नजरअंदाज कर दिया और उनके बयान को खारिज करने का कोई कारण नहीं बताया. ट्रिब्यूनल ने सिर्फ अजीत बाबू उर्फ राहुल (Eyewitness) के बयान पर भरोसा किया, बिना यह बताए कि केस साबित करने के लिए सिर्फ उनका बयान ही क्यों काफी था. यह भी कहा गया कि गाड़ी में लगी एलपीजी किट के लिए हर साल 60 रुपये का अतिरिक्त प्रीमियम न देना पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन था.
प्रतिवादियों के वकील ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने जो मुद्दे तय किये थे कि क्या मारुति वैन के मालिक/ड्राइवर ने सड़क की गलत तरफ से आकर बाइक को टक्कर मारी थी, जिससे मिंटू उर्फ राजेश कुमार घायल हो गए और उनकी मौत हो गई.
ट्रिब्यूनल ने अजीत बाबू उर्फ राहुल (Eyewitness) के बयान और दुर्घटना के संबंध में दर्ज FIR के आधार पर जांच अधिकारी द्वारा तैयार किए गए स्पॉट मैप पर भी विचार किया. Eyewitness अजीत बाबू उर्फ राहुल जिनकी मोटरसाइकिल पर मृतक पीछे बैठे थे ने क्लेम याचिका में कही गई बातों का समर्थन किया. IPC की धाराओं 279, 304-A, 338 और 427 के तहत केस क्राइम नंबर 179/2012 में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर द्वारा तैयार किए गए स्पॉट मैप से भी उनकी गवाही की पुष्टि होती है.
ट्रिब्यूनल के सामने दिखाए गए स्पॉट मैप से पता चलता है कि मोटरसाइकिल सड़क के बाईं ओर थी जबकि दुर्घटना करने वाली मारुति वैन दाईं ओर से आई और बाइक को टक्कर मारी. स्पॉट मैप से यह भी पता चलता है कि दुर्घटना के बाद मारुति वैन पास ही स्थित बिजली के खंभे से टकरा गई थी. तर्क दिया गया कि यदि Eyewitness अजीत बाबू उर्फ राहुल की गवाही और इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर द्वारा तैयार स्पॉट मैप को एक साथ पढ़ा जाए तो केवल एक ही निष्कर्ष निकलता है जो दावेदारों के मामले का समर्थन करता है.
मुद्दा नंबर 2 इस बात पर तय किया गया था कि क्या कथित दुर्घटना में शामिल गाड़ी, यानी मारुति वैन की दुर्घटना की तारीख पर वैध और प्रभावी बीमा पॉलिसी थी. यह मुद्दा क्लेम करने वालों के पक्ष में तय किया गया था और ट्रिब्यूनल के सामने पेश हुए एसबी सिंह ने साबित किया कि मारुति वैन में लगी एलपीजी किट 2.12.2011 से 1.2.2016 तक कानूनी और वैध थी.
अपील करने वाले द्वारा पेश की गई बीमा पॉलिसी से पता चलता है कि मालिक द्वारा 60 रुपये का अतिरिक्त प्रीमियम ठीक से चुकाया गया था. इसलिए, मिली-जुली लापरवाही का तर्क बेबुनियाद है. इसी तरह, अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान न करने का तर्क भी बिना किसी आधार के है क्योंकि कार्यवाही के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों से साबित होता है कि बीमा पॉलिसी वैध और प्रभावी थी.
कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया कि पक्षों के वकीलों की बात सुनी गई और 18.5.2017 के फैसले को देखा गया. जहाँ तक मिली-जुली लापरवाही के मुद्दे की बात है रिकॉर्ड में ऐसा कोई संतोषजनक सबूत नहीं लाया गया है जिससे पता चले कि कथित दुर्घटना में कोई पिकअप ट्रक शामिल था.
कोर्ट ने माना कि Eyewitness श्रीमती सुमन पाल की गवाही पर विचार करना जरूरी है क्योंकि दुर्घटना के समय वह भी मारुति वैन के अंदर मौजूद थीं. ट्रिब्यूनल ने इस मुद्दे के संबंध में पक्षों द्वारा पेश किए गए सभी सबूतों पर विचार किया है. यदि Eyewitness श्रीमती सुमन पाल को घटना का चश्मदीद गवाह माना जाता है तो यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि Eyewitness अजीत बाबू उर्फ राहुल भी चश्मदीद गवाह हैं क्योंकि वह उस मोटरसाइकिल के ड्राइवर थे जिसे कथित तौर पर मारुति वैन ने टक्कर मारी थी.
यह स्पष्ट है कि Eyewitness अजीत बाबू उर्फ राहुल और Eyewitness श्रीमती सुमन पाल के बयान एक-दूसरे के विपरीत हैं और दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं. ऐसी परिस्थितियों में, कोर्ट को पुष्टि करने वाले सबूतों को देखने की आवश्यकता है.
इस मामले में अजीत बाबू उर्फ राहुल की गवाही को केस क्राइम नंबर 179/2012 में जांच अधिकारी द्वारा तैयार किए गए स्पॉट मैप से पुष्टि मिलती है. इसलिए, ट्रिब्यूनल ने दावेदारों/प्रतिवादियों के मामले को स्वीकार करते हुए अजीत बाबू उर्फ़ राहुल की गवाही पर भरोसा करने में कोई गलती नहीं की है. कोर्ट ने कहा कि मारुति वैन के बीमा के सवाल में भी कोई दम नहीं है क्योंकि ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट रूप से पाया है कि मालिक द्वारा भुगतान किया गया ₹60/- का अतिरिक्त प्रीमियम बीमा पॉलिसी में ही दर्ज है.