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प्रयागराज के मेजा में सगाई से पहले दुल्हन को भगा ले जाने वाले युवक की गिरफ्तारी (Arrest) पर रोक

प्रयागराज के मेजा में सगाई से पहले दुल्हन को भगा ले जाने वाले युवक की गिरफ्तारी (Arrest) पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सगाई से पहले लड़की को भगाने में सहयोगी पप्पी यादव की 26 मई तक गिरफ्तारी (Arrest) पर रोक लगा दी है और याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 25 मई नियत की है. कोर्ट ने राज्य सरकार से जानकारी मांगी थी किंतु जानकारी नहीं आ सकी. स्टेट की तरफ से जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय की मांग किये जाने पर कोर्ट ने आरोपित को यह अंतरिम राहत प्रदान की है.

यह आदेश जस्टिस राजीव मिश्र और जस्टिस पीएन मिश्र की बेंच ने पप्पी यादव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता शैलेश कुमार उपाध्याय ने बहस की. इनका कहना था कि प्रयागराज की मेजा तहसील के अकबर शाहपुर गांव की पीड़िता अपने प्रेमी राहुल यादव के साथ गईं हैं. जिसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है. उसे झूठा फंसाया गया है.

मेजा थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता की बेटी की सगाई होने वाली थी. युवती 21 मार्च 26 को घर से कालेज जाने के लिए बढ़ने निकली और लापता हो गई. काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला तो परिवार के सदस्यों ने थाने को सूचना दी. इसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्ध आरोपितों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी.

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गिरफ्तारी (Arrest)  से बचने के लिए यह अपील दायर करके राहत की मांग की गयी थी. याचिका में कहा गया कि राहुल यादव फोटोस्टेट की दूकान चलाता है. उसका दोस्त याची की मोटरसाइकिल लेकर गया था. इसी बाइक का इस्तेमाल युगल ने भागने में किया है. युवती के परिवार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि वह अपने साथ शादी के लिए बनवाये गये जेवरात और दो लाख रुपये कैश भी ले गयी. इस मामले में  अन्य तमाम लोगों के सहयोग करने का भी आरोप है.

अवैध निरुद्धी (Arrest)  पर पर हाई कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि देखने में आया है कि पुलिस कमिश्नर अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हैं. बांड जमा करने के बाद भी आसानी से रिलीज नहीं करते. कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद को निर्देश दिया है कि वह पिछले एक हफ्ते में अपने आदेश से अवैध निरूद्ध (Arrest) किए गए लोगो की सूची पेश करें.

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यदि वह विफल रहते हैं तो 6 मई अगली सुनवाई के दिन सुबह दस बजे कोर्ट में हाजिर हो. यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस वके द्विवेदी की बेंच ने चंद्रपाल सिंह व अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है.

याचिका पर अधिवक्ता गौतम जितेन्द्र राणा ने बहस की. कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार की तरफ से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया.जिससे साफ हो गया कि पुलिस कमिश्नर गाजियाबाद ने याची को अवैध निरूद्ध (Arrest) रखा. याची के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 170, 126, व 135 के तहत कार्रवाई की गई और उसे जेल भेज दिया गया. कानूनी उपबंधो पर विचार नहीं किया गया और नियमानुसार रिहाई नहीं की गई. जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया है.

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