लखनऊ डायोसिस के Former Bishop पीटर बलदेव की 2ndअपील मंजूर, निचली अदालतों के फैसलों पर अगली सुनवाई तक रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया की लखनऊ डायोसिस के Bishop पद से Dr. Peter Baldev को हटाए जाने से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है. जस्टिस पीयूष अग्रवाल ने मामले में उठाए गए कानूनी प्रश्नों को विचारण योग्य मानते हुए Former Bishop पीटर बलदेव की दूसरी अपील स्वीकार कर ली. साथ ही, निचली अदालतों द्वारा पारित दोनों आदेशों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी गई है. कोर्ट ने अपील को मेमो ऑफ अपील में दर्ज कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न संख्या 2, 4, 6 और 7 पर स्वीकार किया है.
हाई कोर्ट ने निचली अदालत का रिकॉर्ड तलब करते हुए प्रतिवादियों को छह सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसके बाद अपीलकर्ता को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है. अपीलकर्ता के अनुसार, उनका 5 अगस्त 2015 को नई दिल्ली स्थित सीएनआई भवन में लखनऊ डायोसिस के Bishop के रूप में चुनाव हुआ था. 9 अगस्त 2015 को कलकत्ता के सेंट पॉल कैथेड्रल में उनका अभिषेक और 11 अगस्त 2015 को प्रयागराज के ऑल सेंट्स कैथेड्रल में स्थापना समारोह हुआ था.
10 मार्च 2023 को सीएनआई सिनोड की ओर से जारी पत्र के जरिए उन्हें Bishop पद से हटाने की जानकारी दी गई
दावा है कि 10 मार्च 2023 को सीएनआई सिनोड की ओर से जारी पत्र के जरिए उन्हें Bishop पद से हटाने की जानकारी दी गई. इसके खिलाफ उन्होंने प्रयागराज की सिविल अदालत में वाद दाखिल कर बर्खास्तगी आदेश को चुनौती दी थी. साथ ही, नई Bishop चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने और पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने की मांग की गई थी.
सिविल जज सीनियर डिवीजन, फास्ट ट्रैक कोर्ट, प्रयागराज ने 16 मई 2024 को प्रतिवादियों की अर्जी स्वीकार करते हुए वादपत्र खारिज कर दिया था. अदालत ने माना था कि Bishop की नियुक्ति निजी सेवा अनुबंध से जुड़ी है और विशिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 14 के कारण मुकदमा बाधित है. इसके बाद Former Bishop पीटर बलदेव ने प्रथम अपील दाखिल की.
अपर जिला जज, न्यायालय संख्या-दो, प्रयागराज ने 6 अगस्त 2026 को प्रथम अपील खारिज कर दी. इसके खिलाफ Former Bishop पीटर बलदेव ने हाई कोर्ट में दूसरी अपील दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अब निचली अदालतों के दोनों आदेशों पर रोक लगा दी है.
सीएनआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि चर्च का संविधान और उपनियम Bishop को सीधे सिविल कोर्ट का रुख करने से रोकते हैं. उनका तर्क था कि अपीलकर्ता को सीएनआई के कोड ऑफ सिनोड्स के अध्याय पांच, खंड चार के तहत उपलब्ध आंतरिक अपीलीय व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहिए था.
अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि निचली अदालतों ने सीएनआई के संविधान, Bishop पद की प्रकृति, समझौता ज्ञापन और विशिष्ट अनुतोष अधिनियम की संशोधित धारा 14 पर समुचित विचार नहीं किया. यह भी तर्क दिया गया कि आदेश सात नियम 11 सीपीसी के तहत वादपत्र खारिज करते समय अदालत को वादपत्र में लिखे तथ्यों तक ही सीमित रहना चाहिए था.
हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में कुछ विचारणीय कानूनी प्रश्न मौजूद हैं और प्रकरण पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है. आदेश के अनुसार, 16 मई 2024 तथा 6 अगस्त 2026 को पारित निचली अदालतों के आदेशों का प्रभाव और क्रियान्वयन अगली तारीख तक स्थगित रहेगा. न्यायालय ने अभी मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई निर्णय नहीं दिया है.