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दूल्हे के हत्या मामले में आरोपी को राहत, 2 महीने में समर्पण कर Bail लेने तक Arrest पर लगी रोक

दूल्हे के हत्या मामले में आरोपी को राहत, 2 महीने में समर्पण कर Bail लेने तक Arrest पर लगी रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जौनपुर जिले के भोले राजभर की अग्रिम Bail याचिका खारिज करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया  है लेकिन 60 दिन के भीतर रेग्युलर कोर्ट में हाजिर होकर Arrest पर रोक या रेग्युलर Bail की अर्जी पर सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक ​लगा दी.  जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है.

याची भोले राजभर के विरुद्ध 2 मई 2026 को थाना खेतासराय, जिला जौनपुर में धारा 103(1) बीएनएस के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई थी. याची अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है. राज्य की ओर से लगाए गए आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि यह एफआईआर रद्द किए जाने योग्य मामला नहीं है और याचिका खारिज कर दी. याची को राहत देते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि वे आज से 60 दिनों के भीतर निचली अदालत में उपस्थित होकर नियमित Bail या अग्रिम Bail के लिए आवेदन करते हैं तो उसे सुप्रीम कोर्ट के लाल कमलेंद्र प्रताप सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2009)मामले के निर्देशों के अनुसार विचार किया जाएगा.

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 60 दिनों की इस अवधि में याची को Arrest नहीं किया जाएगा, बशर्ते वे पहले से Arrest न हों. लेकिन यदि वे निर्धारित समय में निचली अदालत में उपस्थित नहीं हुए, तो उनके विरुद्ध  कार्रवाई की जाएगी. कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अदालत में समर्पण के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा.

एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता के बेटे की शादी बिंद समाज की लड़की से तय थी. किंतु आजमगढ़ के उसके रिश्तेदार शादी के खिलाफ थे.जब बारात लेकर जा रहे थे तो मोटरसाइकिल पर आये अभियुक्तों ने  कार में बैठे उसके बेटे दूल्हे आजाद की गोली मारकर हत्या कर दी.इस हत्याकांड में याची भी शामिल था.

फर्जी फर्म बनाकर धोखाधड़ी के आरोपी को मिली सशर्त Bail

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को मुजफ्फरनगर के फर्जी जीएसटी  फर्म घोटाले में Arrest आरोपी मोहम्मद हाफिज को सशर्त Bail प्रदान कर दी. जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की एकलपीठ ने यह आदेश पारित किया. थाना कोतवाली नगर, मुजफ्फरनगर में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोप है कि  निर्दोष लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड हासिल कर फर्जी जीएसटी फर्में बनाते थे. इन फर्जी फर्मों के जरिए लोगों से ठगी की जाती थी और फर्जी बिल व ई-वे बिल तैयार कर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुँचाया जाता था.

याची अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मोहम्मद हाफिज का नाम एफआईआर में नहीं था, बल्कि उसका नाम केवल एक सह-अभियुक्त के कबूलनामे के आधार पर सामने आया. अन्वेषण के दौरान अभियुक्त का एफआईआर में नामजद सह-अभियुक्त सलीम से कोई संबंध स्थापित नहीं हो सका. साथ ही, सह-अभियुक्त मोनिस अली और अफजल को पहले ही इसी कोर्ट  से Bail मिल चुकी है.

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न्यायालय ने मामले की समस्त परिस्थितियों, जेलों में भीड़भाड़, अदालतों में मुकदमों के भारी बोझ तथा सर्वोच्च न्यायालय के कपिल वधावन केस के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए Bail मंजूर की. अभियुक्त 31 जनवरी 2026से न्यायिक हिरासत में था.

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