2013 में Land acquisition हो चुका है तो चुनौती पर हस्तक्षेप की कोई अवश्यकता नहीं : इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की मुरादाबाद के मदरसा अरबिया हयातुल उलूम की याचिका

मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा ‘नया मुरादाबाद’ योजना के तहत आवासीय और व्यावसायिक कॉलोनी विकसित करने के लिए 175.44 हेक्टेयर Land acquisition किया था. मदरसे ने तर्क दिया था कि उनकी भूमि पर 1979-80 से शैक्षणिक संस्थान चल रहा है और Land acquisition की कार्यवाही नए Land acquisition अधिनियम, 2013 की धारा 24(2) के तहत रद्द हो जानी चाहिए क्योंकि उन्हें मुआवजा नहीं मिला और भौतिक कब्जा भी नहीं लिया गया.
Land acquisition पर पहले ही एक आवासीय कॉलोनी विकसित की जा चुकी

अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने इस Land acquisition को चुनौती देने के लिए पहले भी चार बार याचिकाएं दायर की थीं, जो अलग-अलग समय पर निस्तारित या खारिज कर दी गई थीं. प्राधिकरण की दलील थी कि भूमि का कब्जा 7 नवंबर 2000 को ही लिया जा चुका था और निर्धारित मुआवजे की राशि भी सरकारी खजाने में जमा करा दी गई थी. यह भी बताया गया कि Land acquisition पर पहले ही एक आवासीय कॉलोनी विकसित की जा चुकी है और कई लोगों को भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं.
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहर लाल’ मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 2013 के अधिनियम की धारा 24(2) का उपयोग उन मामलों को पुनर्जीवित करने के लिए नहीं किया जा सकता जो पहले ही समाप्त हो चुके हैं. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार जब भूमि का कब्जा लेकर वह राज्य में निहित हो जाती है, तो उसे acquisition से मुक्त नहीं किया जा सकता. याचिकाकर्ता द्वारा बार-बार याचिकाएं दायर करने को अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना और याचिका खारिज कर दिया.
हाई कोर्ट के नकल विभाग की अनियमितता की जांच कर कार्रवाई की मांग
इलाहाबाद हाईकोर्ट के नकल विभाग में व्याप्त अनियमितता को लेकर शिवकुटी के अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्र ने महानिबंधक को शिकायत कर जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है. पत्र की प्रति हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है.
अधिवक्ता मिश्र का कहना है कि हाईकोर्ट से 25 अप्रैल 26 को मैसेज आया कि आपराधिक याचिका संख्या 7699/2026 में आदेश की नकल तैयार है प्राप्त कर लें. मैसेज देखकर बड़ी हैरानी हुई क्योंकि ऐसी याचिका में वह अधिवक्ता नहीं है और न ही उसने आदेश की नकल का कोई आवेदन दिया है तो मैसेज उसके मोबाइल फोन पर क्यों आया .
अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्र ने स्टेटस रिपोर्ट से पता चला कि उस आपराधिक याचिका दो अन्य अधिवक्ताओं द्वारा दाखिल की गई है. जिनका नाम दीपक कुमार पाण्डेय व संदीप पाण्डेय दर्ज है. नकल विभाग ने बताया कि आवेदन पर अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्र और मोबाइल नंबर लिखा है और आदेश की नकल भी प्राप्त कर ली गई है.याचिका 23 अप्रैल 26 को निस्तारित कर दी गई.
दिनेश कुमार मिश्र ने महानिबंधक से आदेश के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए जांच कर कार्रवाई करने की मांग में पत्र लिखा है और कहा है कोई भी किसी के नाम से अर्जी दाखिल कर आदेश की नकल लेकर गलत इस्तेमाल कर सकता है.जो न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है. इस पर कड़ाई से रोक लगाई जाए.