Illegal Arrest पर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश, रिमांड मजिस्ट्रेट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मांगा 24 मार्च तक स्पष्टीकरण

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अरेस्ट मेमो के प्रावधानों का स्पष्ट रूप से पालन सुनिश्चित न करने पर गिरफ्तारी को अवैध (Illegal Arrest) माना है और पीलीभीत जिले के जहानाबाद थाना के इंवेस्टिगेशन आफिसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आवेदक की बेल मंजूर करते हुए पीलीभीत में नियुक्त रिमांड मजिस्ट्रेट से गलत रिमांड जारी करने पर स्पष्टीकरण मांगा है. यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जयकृष्ण उपाध्याय की बेंच ने मोहम्मद हारून की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उसके अधिवक्ता जीके दीक्षित एवं अनुराग त्रिपाठी को सुनकर दिया है. इसी के साथ कोर्ट ने गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश निरस्त कर दिया है.
मामला पीलीभीत के जहानाबाद थाने का है, जहां अभियुक्त मोहम्मद हारून की गिरफ्तारी हुई थी और रिमांड मजिस्ट्रेट ने रिमांड का आदेश दिया था. यह पिटीशन हेबियस कॉर्पस के तौर पर दाखिल की गयी थी. इसमें मांग की गयी थी कि पिटीशनर के कॉर्पस को उनकी गैर-कानूनी कस्टडी (Illegal Arrest) से रिलीज करने का निर्देश दिया जाए,
साथ ही गिरफ्तारी, डिटेंशन और रिमांड को गैर-कानूनी, शून्य और अमान्य घोषित किया जाए क्योंकि रिमांड मजिस्ट्रेट ने मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य (2025) SCC ऑनलाइन SC 2356 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया और इस कोर्ट ने हेबियस कॉर्पस रिट पिटीशन नंबर 35/2026, उमंग रस्तोगी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य में 22.01.2026 को दिए गए रिमांड ऑर्डर को रद्द कर दिया.
पिटीशनर्स के वकील का कहना था कि 15 फरवरी 2026 का अरेस्ट मेमो, डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के सर्कुलर के मुताबिक नहीं है. फैक्ट्स और हालात को देखते हुए और इस कोर्ट के हैबियस कॉर्पस रिट पिटीशन नंबर 35/2026, उमंग रस्तोगी बनाम स्टेट ऑफ यूपी एंड अदर्स में दिए गए फैसले को ध्यान में रखते हुए 15 फरवरी का अरेस्ट मेमो और रिमांड ऑर्डर रद्द कर दिया.
कोर्ट ने रेस्पोंडेंट्स के लिए पिटीशनर के खिलाफ कानून के मुताबिक नया ऑर्डर पास करने का ऑप्शन ओपन रखा. कोर्ट ने आदेश दिया कि पिटीशनर को इस ऑर्डर की सर्टिफाइड कॉपी मिलने का इंतजार किए बिना तुरंत कस्टडी (Illegal Arrest) से रिहा किया जाय.
Illegal Arrest पर ऐसा ऑर्डर क्यों पास किया

कोर्ट ने कहा कि जिस रिमांड मजिस्ट्रेट ने 15 फरवरी 2026 का विवादित रिमांड ऑर्डर पास किया है, वह यह एक्सप्लेनेशन सबमिट करेगा कि क्या उसे मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य (2025) SCC ऑनलाइन SC 2356 में पास किए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले और हैबियस कॉर्पस रिट पिटीशन नंबर 35/2026, उमंग रस्तोगी बनाम यूपी राज्य और अन्य में पास किए गए इस कोर्ट के फैसले के बारे में पता है या नहीं. अगर उसे ऊपर बताए गए फैसलों के बारे में पता है, तो उसे यह बताना होगा कि उसने Illegal Arrest पर ऐसा ऑर्डर क्यों पास किया.
कोर्ट ने सुनवाई की नेक्स्ट डेट 24 मार्च तय की है और पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे इस मामले के जांच अधिकारी के खिलाफ उमंग रस्तोगी (ऊपर) के मामले में इस कोर्ट द्वारा और मिहिर राजेश शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों के उल्लंघन (Illegal Arrest) के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करें. वह अगली तय तारीख को या उससे पहले एक अनुपालन हलफनामा भी दाखिल करें.
कोर्ट ने यह माना कि याची की गिरफ्तारी विधि सिद्धांतके अनुसार नहीं (Illegal Arrest) की गई थी. याची की ओर से अधिवक्ता जीके दीक्षित एवं अनुराग त्रिपाठी ने तर्क दिया कि उमंग रस्तोगी के केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय में अवधारित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने पर अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी के आधार से संबंधित कॉलम स्पष्ट रूप से उल्लिखित किए जाने चाहिए.
याची के मामले में अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी के आधार से संबंधित कोई कॉलम पुलिस महानिदेशक के 25 जुलाई 2025 एवं गत तीन फरवरी के सर्कुलर के अनुरूप नहीं (Illegal Arrest) है इसलिए अरेस्ट मेमो और रिमांड ऑर्डर दोनों ही अवैधानिक (Illegal) है तथा निरस्त किए जाने योग्य है. साथ ही याची को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए.