पुलिस की गलत सूचना के कारण 15 अतिरिक्त दिन Jail में बिताने पर अभियुक्त को 50 हजार मुआवजा देने का निर्देश

कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही के कारण 15 दिन बाद जमानत मंजूर होने और इतने समय तक Jail में रहने के लिए आरोपी को 50 हजार रूपये मुआवजा पाने का हकदार माना और राज्य सरकार को एक माह में भुगतान करने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने अलीगढ़ निवासी फुरकान की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए दिया है.
इस संबंध में केस क्राइम नंबर 1108/2025, सेक्शन 303(2), 317(2), 317(4) BNS, थाना क्वार्सी जनपद अलीगढ़ में दर्ज किया गया था. आवेदक ने गिरफ्तार करके Jail भेजे जाने के बाद ट्रायल कोर्ट में बेल के लिए आवेदन किया. वहां से खारिज होने के बाद बेल एप्लीकेशन इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल की गयी थी. हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 23 फरवरी को 2026 को हुई थी.
उस तारीख को इस कोर्ट द्वारा बेल ऑर्डर डिक्टेट करते समय, एजीए ने यह ऑब्जेक्शन रेज किया कि Jail में बंद आवेदक ने पांच केस की क्रिमिनल हिस्ट्री बताई है जबकि केस डायरी के अनुसार उसके खिलाफ कुल 12 केस हैं. यह तथ्य सामने आने के बाद कोर्ट ने आवेदक को बाकी क्रिमिनल हिस्ट्री बताने का निर्देश दिया गया था. इस पर आवेदक के अधिवक्ता का कहना था कि DCRB में दिखाए गए पांच क्रिमिनल केस के अलावा उसकी कोई और क्रिमिनल हिस्ट्री नहीं है.
इसके बाद कोर्ट ने ADG (टेक्निकल सर्विसेज), यूपी लखनऊ को कोर्ट की मदद के लिए कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया. कोर्ट के ऑर्डर के मुताबिक एडीजी (टेक्निकल सर्विसेज) नवीन अरोड़ा वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए पेश हुए और बताया कि अब CCTNS के जरिए किसी भी आरोपी की क्रिमिनल हिस्ट्री का पता लगाना बेहद आसान है क्योंकि वहाँ ऑप्शन मौजूद है और संबंधित इंवेस्टिगेशन आफिसर की गलती की वजह से, क्रिमिनल हिस्ट्री पाँच केस के बजाय 12 केस के तौर पर भेज दी गई है.
एडीजी ने बताया कि अब ICJS के जरिए केस डायरी लाने का एक्सेस ज्वाइंट डायरेक्टर, प्रॉसिक्यूशन, हाई कोर्ट इलाहाबाद को दे दिया गया है, लेकिन ज्वाइंट डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन ने खुद अपने ऑफिस में स्टाफ की कमी की वजह से यह सुविधा लेने से मना कर दिया. एडीजी ने पुलिस डिपार्टमेंट की तरफ से माफी मांगी और रिक्वेस्ट की है कि इस गलती को सही माना जाए.
बिना किसी गलती के 15 दिन Jail में रहा
इसके उलट, आवेदक के वकील ने कहा है कि उसे 23.02.2026 को जमानत पर Jail से रिहा किया जा सकता था, लेकिन पुलिस ने पाँच केस के बजाय 12 केस की क्रिमिनल हिस्ट्री के बारे में गलत जानकारी दी, इसलिए वह बिना किसी गलती के 15 दिन Jail में रहा. इसलिए, पुलिस डिपार्टमेंट के खिलाफ सही निर्देश जारी किया जा सकता है.
आवेदक के वकील ने कहा कि उसका नाम FIR में नहीं था. फिर भी आवेदक को गाड़ी और 7800 रुपये रिकवरी के आधार पर झूठा फंसाया गया है. कहा कि पुलिस चार्जशीट दायर कर चुकी है. अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं है. जमानत पर रिहा होने पर वह आदेश का पालन करेगा. कोर्ट ने कहा, अभिलेखों के अवलोकन से यह भी स्पष्ट है कि जांच अधिकारी की ओर से कोई दुर्भावना नहीं थी, लेकिन उनकी लापरवाही के कारण गलती हुई.
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. – 6607 of 2026; Furkan Versus State of U.P.
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