डिस्ट्रिक्ट बार एसो. के चुनाव Regulate नहीं कर सकता यूपी बार कौंसिल, नवंबर 25 से फरवरी 26 के बीच चुनाव पर रोक का आदेश रद

उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के पास जिलों के बार एसोसिएशन के चुनावों को कंट्रोल या Regulate करने का अधिकार नहीं है क्योंकि वे अपने खुद के नियमों से चलते हैं. इस कमेंट के साथ जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल द्वारा जारी उस निर्देश को रद कर दिया है जिसमें 15 नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच राज्य के सभी बार एसोसिएशन के चुनाव कराने पर अस्थायी रोक लगाई गई थी.
हाई कोर्ट के दो जजों की बेंच ने कहा कि बार कौंसिल ऑफ इंडिया के पास यूपी बार कौंसिल या देश के किसी भी स्टेट के बार कौंसिल पर सामान्य निगरानी और नियंत्रण का अधिकार है. ऐसा इसलिए है क्योंकि, उनके बाइलाज में इस तरह का प्रावधान किया गया है. यह अधिकार स्टेट बार काउंसिल को डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के चुनावों को रेगुलेट करने का निर्देश देने (Regulate) तक विस्तारित नहीं है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट में यह याचिका कानपुर बार एसोसिएशन के प्रैक्टिसिंग वकील और सदस्य रमानंद श्रीवास्तव ने दाखिल की थी. याचिका में उन्होंने खुद को 2025-26 में होने वाले बार एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद का संभावित उम्मीदवार बताया है.
याचिका में उन्होंने उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के उस आदेश पर आपत्ति दर्ज करायी थी जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के बार एसोसिएशन को 15 नवंबर, 2025 से फरवरी 2026 तक की अवधि के दौरान चुनाव न कराने या अधिसूचित न करने का निर्देश दिया गया. यह निर्देश बार काउंसिल ऑफ इंडिया के एक कम्युनिकेशन के बाद जारी किया गया, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के चुनाव की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के आगे बढ़े.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बार कौंसिल आफ इंडिया और स्टेट बार कौंसिल से उस खास अधिकार या कानून के प्रावधान के बारे में सवाल किया, जिसने उन्हें ऐसी रोक लगाने (Regulate) का अधिकार दिया था. बार कौंसिल आफ इंडिया के वकील ने कोर्ट का ध्यान एडवोकेट्स एक्ट की धारा 7(g) और धारा 48-B की ओर यह तर्क देते हुए दिलाया कि बार कौंसिल आफ इंडिया स्टेट बार काउंसिल पर सामान्य निगरानी और नियंत्रण रखता है.
“इस कोर्ट की राय है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास बार एसोसिएशन के चुनावों को कंट्रोल करने या Regulate करने का अधिकार नहीं है. जिलों के बार एसोसिएशन अपने बायलॉज से चलते हैं. उनके पास स्टेट बार काउंसिल को वह लेटर जारी करने का अधिकार है, लेकिन मौजूदा कानून के तहत स्टेट बार कौंसिल के पास राज्य की बार एसोसिएशनों को चुनाव रोकने का निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है.”
याचिका का निस्तारण करते हुए हाई कोर्ट ने कानपुर बार एसोसिएशन को अपने बायलॉज के अनुसार चुनाव कराने की इजाजत दी गई. कोर्ट ने निर्देश दिया कि शेड्यूल जारी करते समय बार एसोसिएशन को यह सिक्योर करना होगा कि यूपी बार कौंसिल और बार एसोसिएशन के चुनाव की तिथियों में कम से कम दस दिनों का अंतराल जरूर हो.
Case – Dinesh Kumar Shukla vs. State Of U.P. And 4 Others