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एफआईआर Public Document, भाषा संयमित हो, एफआईआर में भद्दी गाली सभ्य समाज  के लिए सही नहीं

हाईकोर्ट ने गृह सचिव व डीजी को सर्कुलर जारी कर एफआईआर भाषा सही रखने का दिया निर्देश

एफआईआर Public Document, भाषा संयमित हो, एफआईआर में भद्दी गाली सभ्य समाज  के लिए सही नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट Public Document होता है. एफआईआर लिखे जाने पर भाषा संयमित होनी चाहिए. एफआईआर में भद्दी गाली सभ्य समाज के लिए सही नहीं है. हाईकोर्ट ने प्रदेश के गृह सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया है कि पुलिस एफआईआर (Public Document) दर्ज करते समय सावधान रहे. देखें कि एफआईआर (Public Document) सभ्य समाज की छवि धूमिल करने वाले शब्द या गाली न लिखी जाय. कोर्ट ने दोनों शीर्ष अधिकारियों को शासनादेश या सर्कुलर जारी कर सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी करने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने मारपीट कर गंभीर रूप से दो लोगों को घायल करने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. यह आदेश जस्टिस हरवीर सिंह ने प्रेमशंकर राम की जमानत अर्जी पर दिया है. अर्जी का अधिवक्ता डीके गुप्ता व राघवेंद्र सिंह ने विरोध किया. याची के खिलाफ बलिया के थाना रेवती में एफआईआर (Public Document) दर्ज है. दोनों पक्षों में मारपीट हुई. बचाव पक्ष से पांच लोग गंभीर रूप से घायल है. पुलिस बता नहीं सकी कि कौन पक्ष हमला करने में आगे रहा.

एफआईआर Public Document है उसकी भाषा आम आदमी के पढ़ने लायक होनी चाहिए

याची 15 फरवरी 26 से जेल में बंद हैं. कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. याची पर लगी डंडा कुल्हाड़ी लेकर परिवार पर हमला कर कई को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है.एक की हड्डी टूट गई है. कोर्ट ने एफआईआर में भद्दी गाली लिखे होने पर कहा कि गणतांत्रिक देश में समाज सभ्य होता है. एफआईआर (Public Document) पब्लिक दस्तावेज है. उसकी भाषा आम आदमी के पढ़ने लायक होनी चाहिए. ऐसा नहीं होना चाहिए. कोर्ट ने कहा तत्काल रोक लगाना कठिन है, यह गंभीर टास्क है किन्तु एफआईआर (Public Document) दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों को सावधान रहना चाहिए. एफआईआर की भाषा सभ्य होनी चाहिए.

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सात सौ ग्राम स्मैक की तस्करी के आरोपी की सशर्त जमानत मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 700 ग्राम स्मैक की तस्करी के आरोपी सैयद मोहम्मद सिराज रब्बानी की एनडीटीएस एक्ट के तहत सशर्त जमानत मंजूर कर ली है और पचास हजार रुपए के मुचलके व दो प्रतिभूति लेकर रिहा करने का आदेश दिया है. यह आदेश जस्टिस जेके सिन्हा ने वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस मिश्र व चंद्र केश मिश्र को सुनकर दिया है.

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इनका कहना था कि दो पैकेट स्मैक की बरामदगी व सैंपल लेने में धारा 52की शर्तों का पालन नहीं किया गया. याची 10 जून 25 से जेल में है. इसलिए निरूद्धि कार्यवाही अवैध है. जबकि सरकारी वकील ने जमानत का विरोध किया कहा कार्यवाही नियमानुसार की गई है. याची के खिलाफ प्रयागराज के एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. कोर्ट ने केस के गुण-दोष पर विचार न करते हुए जमानत मंजूर कर ली है.

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