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Advocate Welfare Stamp की अनिवार्यता से मुख्य न्यायाधीश ने दी छूट, अधिवक्ता कल्याण योजना पर लग सकता है ग्रहण

Advocate Welfare Stamp की अनिवार्यता से मुख्य न्यायाधीश ने दी छूट, अधिवक्ता कल्याण योजना पर लग सकता है ग्रहण

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने Advocate Welfare Stamp की कमी को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है. महानिबंधक द्वारा जारी अधिसूचना में Advocate Welfare Stamp की उपलब्धता सुनिश्चित होने तक स्टैंप की अनिवार्यता में छूट दे दी है. स्टैंप वेंडर ने बताया कि पिछले दो हफ्ते से ट्रेजरी से अधिवक्ता कल्याण स्टैंप नहीं मिल रहा है. जिसके चलते पिछले हफ्ते से Advocate Welfare Stamp विक्री हाईकोर्ट में बंद हो गई थी. नियमानुसार इस स्टैंप के बगैर वकालतनामा या पर्चा दाखिल नहीं हो सकता.

स्टैंप की कमी के कारण अधिवक्ताओं को कैबिएट, वकालतनामा दाखिल करने में ब्लैक में Advocate Welfare Stamp लेना पड़ रहा था. इसी कमी का फायदा उठाकर ब्लैक में Advocate Welfare Stamp विक्री धड़ल्ले से चल रही थी. टिकट न मिल पाने के चलते नए मुकदमों को दाखिल करने में भी दिक्कत आने लगी थी. इसके चलते तमाम अधिवक्ताओं को केवल एक नाम का वकालतनामा दाखिल करना पड़ रहा था. टिकट की कमी हाई कोर्ट में गर्मी के अवकाश के ठीक पहले आई इस दिक्कत की शिकायत महानिबंधक कार्यालय तक पहुंचने लगी थी.

हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं ने ने महानिबंधक कार्यालय में शिकायत की. एकाउंट निबंधक और एडीएम वित्त सहित प्रमुख सचिव विधि से बात करने और Advocate Welfare Stamp की उपलब्धता अनिश्चित होने के कारण पहली बार मुख्य न्यायाधीश अरूण भंसाली ने कड़ा कदम उठाया और निर्देश दिया कि Advocate Welfare Stamp बिना भी फाइलिंग संभव होगी.

बार काउंसिल के प्रयास से Advocate Welfare कोष की स्थापना राज्य सरकार ने की

बता दें कि बार काउंसिल के प्रयास से Advocate Welfare कोष की स्थापना राज्य सरकार ने की. इस Advocate Welfare कोष से अधिवक्ताओं को एक निश्चित अवधि के बाद डेढ़ लाख रुपए के फंड देने की व्यवस्था की गई. फंड इकट्ठा करने के लिए 10 रूपये का कूपन यानि Advocate Welfare Stamp जारी किया गया. यह हर वर्ष राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है.

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इसी फंड  से अधिवक्ताओं की अचानक मौत होने पर पांच लाख रुपए की परिवार को सहायता दी जाती है. साथ ही नये वकीलों को पांच साल तक पांच हजार देने की घोषणा भी की गई. Advocate Welfare Stamp की विक्री रूकने से Advocate Welfare कोष की राशि में कमी आयेगी. यह पहली बार हुआ है कि राज्य सरकार अधिवक्ता कल्याण स्टैंप छापने में विफल रही है और मुख्य न्यायाधीश को स्टैंप की अनिवार्यता से छूट देनी पड़ी है.

वकील पर जीएसटी डिप्टी कमिश्नर के एफआईआर, पुलिस चार्जशीट व मजिस्ट्रेट के संज्ञान को चुनौती देने की छूट, तीनों अधिकारी 21 मई को तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के वकील के खिलाफ वकालत पेशे के कारण डिप्टी कमिश्नर जीएसटी रामपुर द्वारा एफआईआर दर्ज करने सीओ द्वारा तुरंत चार्जशीट दाखिल करने व मजिस्ट्रेट का उसपर उसी दिन संज्ञान लेने को गंभीरता से लिया है और कहा कि डिप्टी कमिश्नर, संदेश कुमार जैन, सीओ अपराध कीर्ति निधि आनंद व विवेचना अधिकारी अनुपम शर्मा के दबाव के कारण ऐसा हुआ.

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कोर्ट के आदेश पर व्यक्तिगत हलफनामा सहित डिप्टी कमिश्नर हाजिर हुए. उनका पक्ष अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने रखा. कोर्ट पहले ही याची समर्पण जैन की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है. याचिका का सुनवाई करते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने याची को चार्जशीट व संज्ञान आदेश कौन चुनौती देने का समय दिया और अगली सुनवाई की तिथि 21 मई 26 नियत की है और तीनों अधिकारियों डिप्टी कमिश्नर, सीओ और आईओ को बिना विफलता के हाजिर होने का निर्देश दिया है.

पुलिस कमिश्नर आगरा बतायें कानून के खिलाफ रिटायर कर्मचारी से अधिक भुगतान की वसूली का आदेश कैसे दिया -हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर आगरा को 27 मई तक जवाब देने का निर्देश दिया है कि अधिक भुगतान की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद किन परिस्थितियों में वित्त नियंत्रक को याची के सेवानिवृति परिलाभो से 600091 रूपये की वसूली का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस कमिश्नर चाहे तो नया आदेश पारित कर सकते हैं. कोर्ट की राय में उनका आदेश कानून के खिलाफ है. याचिका की अगली सुनवाई 27 मई को होगी.

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यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने ज्ञान सिंह यादव की याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर को सुनकर दिया है. इनका कहना था कि याची की सेवानिवृत्ति के बाद पुलिस कमिश्नर ने बिना नोटिस व सुनवाई का मौका दिए व बिना किसी कारण के अधिक भुगतान की वसूली का आदेश दिया है जो ओम प्रकाश केस के फैसले के अनुसार अवैध है.

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