उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में ,70,000 शिक्षामित्र, Gratuity, भविष्य निधि व पारिवारिक पेंशन पर विचार तो होना चाहिए

यह आदेश जस्टिस मंजू रानी चौहान ने शहनाज बेगम की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने बहस की. इनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में लगभग कुल 1,70,000 शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं जिन्हें मात्र Rs. 10000 प्रत्येक माह दिया जाता था जो की वर्तमान में 18000 कर दिया गया है.
रिटायरमेंट के उपरांत न तो Gratuity और न ही पेंशन
परंतु उनके रिटायरमेंट के उपरांत न तो Gratuity और न ही पेंशन दिया जा रहा है जबकि ऐसे शिक्षामित्र विगत 25 वर्षों से निरंतर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं. इतना ही नहीं यदि किसी शिक्षा मित्र की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी एवं परिवार को कोई सहायता नहीं दे है. जबकि Gratuity पेमेंट एक्ट व कर्मचारी भविष्य निधि कानून शैक्षणिक संस्थाओं में लागू है.
संविधान की धारा 39, 42, 43, 47 में भी दैनिक भोगी, संविदा कर्मी एवं अन्य कार्मिको को सामाजिक सुरक्षा देने का दायित्व राज्य का है. जनपद वाराणसी में कार्यरत शिक्षामित्र की 48 वर्ष में मृत्यु हो जाने के कारण उनकी पत्नी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी वाराणसी से पारिवारिक पेंशन एवं Gratuity भुगतान हेतु निवेदन किया गया परंतु उनके द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया तो यह याचिका दायर की गई थी.
अधिक भुगतान की वसूली आदेश पर रोक, राज्य सरकार से जवाब तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लेखाकार पद से सेवानिवृत्त याची धर्मपाल सिंह से अधिक वेतन भुगतान की वसूली आदेश पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार से जानकारी मांगी है. याचिका की अगली सुनवाई अगस्त 26 के दूसरे हफ्ते में होगी. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने याची अधिवक्ता धनंजय कुमार मिश्र को सुनकर दिया है.
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इनका कहना है कि 2011 में वेतनमान पुनरीक्षित किया गया और डायरेक्टर आंतरिक देखा एवं आडिट निदेशालय लखनऊ ने अधिक भुगतान की वसूली का आदेश दिया। अधीक्षक जिला जेल मेरठ ने आदेश के अनुपालन में वसूली आदेश जारी किया. दोनों आदेशो को चुनौती दी गई है।याची का कहना है कि ये आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लघंन है। इसे रद किया जाना चाहिए। याची 31 दिसंबर 23 को सेवानिवृत्त हुआ और 27 फरवरी 25 और 23 फरवरी 26 को वसूली आदेश पारित किए गए. जिसके तहत 492167 रूपये अधिक भुगतान की वसूली की जानी है। फिलहाल हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है.
गौर यमुना सिटी पार्क से इलेक्ट्रिकल सब स्टेशन एक माह में शिफ्ट करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के गौर यमुना सिटी पार्क में बने इलेक्ट्रिकल सब स्टेशन को एक माह में शिफ्ट करने का मेसर्स गौरसन रीलटेक प्रा लि को समय दिया है और कहा है कि पार्क को खाली कर पूर्ववत बहाल करें. कोर्ट ने यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को भी आदेश दिया है कि किसी भी पार्क का अतिक्रमण या अन्य उपयोग करने की अनुमति न दें.
यह आदेश जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने राजेन्द्र सिंह सोलंकी व चार अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता प्रेम कुमार चौरसिया ने बहस की.इनका कहना था कि कंपनी के सब स्टेशन के कारण पार्क ढंक गया है. पार्क याचीगण के सिवा के सामने स्थित है. एडा की तरफ से कहा गया कि कार्रवाई की गई है. पार्क खाली होगा. कंपनी ने एडा को पत्र लिखकर सब स्टेशन शिफ्ट करने की इच्छा जताई है. कंपनी की तरफ से कहा गया कि सब स्टेशन शिफ्ट करने के लिए कुछ समय दिया जाय.जिसपर कोर्ट ने एक माह का समय दिया है.