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High Court Decision

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हाई कोर्ट का जज पाता है कि Article 226 के तहत दायर याचिका आदर्श रूप से Article 227 के तहत दायर किया जाना चाहिए था तो वह उस पर सुनवाई और फैसला नहीं कर सकता

अगर हाई कोर्ट के जज को उसके चीफ जस्टिस द्वारा Article 226 के तहत याचिकाएं सुनने और फैसला करने के लिए सौंपी गई हैं और वह पाता है कि Article 226 के तहत दायर याचिका को आदर्श रूप से Article 227 के तहत दायर किया जाना चाहिए था, तो वह…

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जब तक कोई विशेष कानून नकारात्मक बोझ नहीं डालता, आरोपी को निर्दोषता साबित करने के लिए Evidence पेश करने की जरूरत नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपहरण और बलात्कार में सुनायी गयी सजा को रद किया, आरोपित को जेल से रिहा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले इस बात की पुष्टि करते हैं कि जब तक कोई विशेष कानून नकारात्मक बोझ नहीं डालता, आरोपी को निर्दोषता साबित करने के लिए Evidence…

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Poisonous Cough Syrup मामले में मैरियन बायोटेक और निदेशकों की याचिकाएं खारिज, उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत हो चुकी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने Poisonous cough syrup मामले में मैरियन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों को बड़ा झटका देते हुए उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इन याचिकाओं के जरिए गौतम बुद्ध नगर की निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश को चुनौती दी गई थी. मामला मैरियन…

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शादी का वादा शुरू से ही झूठा साबित होने पर ही 376 आईपीसी के तहत Rape माना जा सकता है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई पुरुष आपसी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों (Rape) के बाद शादी करने से इनकार कर देता है, तो उसे तब तक बलात्कार (धारा 376 आईपीसी Rape) नहीं माना जा सकता जब तक कि यह साबित न…

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Order के खिलाफ Appeal मात्र से Court Proceeding पर रोक नहीं लग जाती, सेशन व मजिस्ट्रेट कोर्ट धारा 228 CrPC और 240 CrPC में आरोप तय करने के लिए बाध्य

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी Order के खिलाफ अपील दायर करने मात्र से संबंधित अदालत की कार्यवाही (Court Proceeding) पर रोक नहीं लग जाती. कोर्ट की रोक नहीं है तो Order के तहत कार्रवाई की जायेगी. जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने धोखाधड़ी से जुड़े दो दशक…

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मानसिक रूप से अस्वस्थ अभियुक्त की 10 दिन में Medical Board से जांच कराने का निर्देश, बयान दर्ज करने का सम्मन आदेश रद्द

कोर्ट ने कहा पता करें अभियुक्त अदालत में बयान दर्ज करने लायक है या नहीं, रिपोर्ट पर अदालत को कानूनी कार्यवाही करने का निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिर में गंभीर चोट के कारण सोचने समझने, लिखने बोलने में असमर्थ याची की Medical Board से मेडिकल जांच कर रिपोर्ट देने का…

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SARFAESI Act की धारा 14 के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क करने का अधिकार एक ठोस वैधानिक उपाय, 30 दिन में पूरी करें कार्यवाही

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि SARFAESI Act की धारा 14 के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क करने का अधिकार एक ठोस वैधानिक उपाय है और इस पर विचार करने में कोई भी अत्यधिक देरी ऐसे उपाय से इनकार करने के बराबर है, जिसे कानून में सही नहीं ठहराया जा…

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Final Report से नहीं चलेगा काम, झूठी सूचना देने वाले पर BNSS की धारा 215(1)(a) के तहत शिकायत दर्ज कराएं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जारी किया ज्यूडिशियल ​मजिस्ट्रेट और डीजीपी के लिए निर्देश, केस दर्ज न कराने पर अफसरों पर होगी कार्रवाई यदि कोई जांच अधिकारी जांच करता है और अंततः पाता है कि कोई अपराध नहीं हुआ है, तो वह न केवल उत्तर प्रदेश पुलिस विनियमों के पैराग्राफ 122…

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IAS का प्रोबेशनर के तौर पर रिटायर हो जाना Salary-Pension लाभ देने से इनकार करने का आधार नहीं माना जा सकता, 2 माह में लाभ दें

इलाहाबाद HC ने रिटायर IAS के वेतन रिवाइज करने को दी मंजूरी, सरकार को दो ​महीने में फैसला लेना होगा, ब्याज भी देना होगा याचिकाकर्ता दो साल की प्रोबेशन अवधि खत्म होने के तीन महीने बाद प्रोबेशनर के तौर पर रिटायर हो गया था, इसलिए इसे Salary-pension लाभ देने से…

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अच्छे इरादे वाले नेक विचार भी तब विफल हो जाते हैं जब वे खराब Administrators के हाथों में पड़ते हैं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

गैंगस्टर एक्ट और कमिश्नरेट प्रणाली पर हाईकोर्ट सख्त, अपर मुख्य सचिव गृह को कारण बताओ नोटिस जारी सबसे अच्छे इरादे वाले और स्पष्ट रूप से नेक विचार भी तब विफल हो जाते हैं जब वे खराब Administrators के हाथों में पड़ते हैं. यानी, जो Administrators अपर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हैं…