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Arrest Memo व रिमांड आदेश अवैध तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पोषणीय, मजिस्ट्रेट का रिमांड आदेश रद, याची को तुरंत रिहा करें

एसएसपी जालौन को विवेचना अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश, रिमांड मजिस्ट्रेट से भी मांगी सफाई

Arrest Memo व रिमांड आदेश अवैध तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पोषणीय, मजिस्ट्रेट का रिमांड आदेश रद, याची को तुरंत रिहा करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीपी के परिपत्र व कोर्ट आदेश की अनदेखी कर तैयार Arrest Memo व रिमांड आदेश को अवैध करार देते हुए कहा है ऐसे आदेश के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका ग्राह्य है. कोर्ट ने एसीजेएम जालौन, उरई के रिमांड आदेश को रद कर दिया और याची को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने एसएसपी जालौन को विवेचना अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच कार्यवाही कर 25 मार्च तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने रिमांड मजिस्ट्रेट से भी सफाई मांगी है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाना चाहिए या नहीं, यदि पालन किया जाना चाहिए तो बिना न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किए रिमांड आदेश क्यों पारित किया. याचिका की सुनवाई 25 मार्च को होगी.

Arrest Memo नियमानुसार तैयार नहीं किया गया

यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जेके उपाध्याय की बेंच ने अमन कुमार सिंह उर्फ मिक्की की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस मिश्र व चंद्रकेश मिश्र ने बहस की. याची के अधिवक्ता का कहना था कि कोतवाली कोंच की पुलिस को निर्देश दिया जाय कि वह याची को गिरफ्तार न करें. Arrest Memo नियमानुसार तैयार नहीं किया गया है.

विवेचना अधिकारी ने कारण खाली रखे हैं इससे स्पष्ट है कि सर्कुलर का पालन नहीं किया गया है. पुलिस का ऐसा करना उमंग रस्तोगी केस के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लघंन है. Arrest Memo व रिमांड आदेश अवैध है. कोर्ट ने कहा Arrest Memo अवैध होने पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पोषणीय है. सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला भी दिया.

मंसूर अंसारी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति की कुर्की रद, रिलीज करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई मंसूर अंसारी  को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने डीएम गाजीपुर द्वारा गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही में कुर्क की गई संपत्ति को रिलीज करने का  आदेश दिया है. साथ ही  एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट गाजीपुर द्वारा डीएम की कार्रवाई को सही ठहराने के आदेश को भी रद्द कर दिया है. यह आदेश जस्टिस राजबीर सिंह ने याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है.

याची अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय का कहना है कि गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में अंसारी की 23 दुकानों को डीएम  ने गैंगस्टर एक्ट में कुर्क किया था.कोर्ट ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद 17 फरवरी को फैसला सुरक्षित कर लिया था., कोर्ट ने सभी 23 दुकानों को गैंगस्टर से अर्जित संपत्ति न मानते हुए कुर्की आदेश रद कर दिया.

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