Election अधिकरण को 2012 में जारी जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर फैसले का अधिकार नहीं, चुनाव की वैधता की चुनौती याचिका खारिज

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा Election में रामकोला सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. याचिकाकर्ता का आरोप था कि विनय प्रकाश गोंड वास्तव में अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं, लेकिन उन्होंने 2012 में जारी एक अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर फर्जी तरीके से Election में नामांकन दाखिल किया. रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष शिकायत दी गई थी, पर उसे खारिज कर दिया गया था. Election 3 मार्च 2022 को हुआ, जिसमें गोंड विजयी घोषित हुए.
अदालत ने पहले यह तय किया कि क्या Election Commission को किसी जाति प्रमाण पत्र को फर्जी घोषित करने का अधिकार है. याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं का हवाला देते हुए तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल को यह अधिकार प्राप्त है, जबकि प्रतिवादी ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र की वैधता केवल जिला स्तरीय, मंडल स्तरीय और राज्य स्तरीय समिति ही तय कर सकती है.
जाति प्रमाण पत्र को केवल संबंधित सांविधिक तंत्र (स्क्रूटनी कमेटी) के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है, न कि Election petition में
जस्टिस नीरज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के कुमारी माधुरी पाटिल मामले और हाल के ‘ए. राजा’ मामले सहित कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जाति प्रमाण पत्र को केवल संबंधित सांविधिक तंत्र (स्क्रूटनी कमेटी) के जरिए ही चुनौती दी जा सकती है, न कि Election petition में. चूंकि प्रतिवादी का प्रमाण पत्र अब तक किसी भी सक्षम समिति द्वारा रद्द नहीं किया गया था, अदालत ने कहा कि निर्वाचन न्यायाधिकरण को इसकी प्रामाणिकता जांचने का अधिकार नहीं है.
12 साल से लंबित चकबंदी कार्यवाही, कोर्ट ने दिया निपटारे का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर जिले के अहमदपुर गांव में बीते 12 वर्षों से लंबित चकबंदी कार्यवाही को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया है. परगना हवेली गांव के निवासी विवेक कुमार यादव ने राज्य सरकार व अन्य के खिलाफ यह याचिका दाखिल की थी.
याचिकाकर्ता के अनुसार, वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश चकबंदी अधिनियम 1953 की धारा 4 के तहत अहमदपुर गांव में चकबंदी की अधिसूचना जारी हुई थी. लेकिन 12 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद न तो कार्यवाही शुरू हुई, न पूरी हुई, और न ही धारा 4 की अधिसूचना को निरस्त किया गया. याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि चकबंदी आयुक्त, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को एक निश्चित समयसीमा में यह कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया जाए.
जस्टिस दिनेश पाठक की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि यह मामला उचित रूप से चकबंदी आयुक्त, लखनऊ द्वारा ही निपटाया जा सकता है. उन्होंने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई कि याचिकाकर्ता को एक नया प्रत्यावेदन देने और उसके शीघ्र निस्तारण का निर्देश दिया जाए.
कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिका का निस्तारण कर दिया. साथ ही याचिकाकर्ता को छूट दी गई कि वह तीन सप्ताह के भीतर आदेश की प्रमाणित प्रति और याचिका की स्व-सत्यापित प्रति के साथ चकबंदी आयुक्त के समक्ष नया प्रत्यावेदन प्रस्तुत करे. कोर्ट ने निर्देश दिया कि चकबंदी आयुक्त इस प्रत्यावेदन पर विधि के अनुसार विचार करते हुए तीन महीने के भीतर, यथासंभव शीघ्रता से, निर्णय लें.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तेजो महालय मंदिर मामले में केंद्र समेत पक्षकारों से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित तेजो महालय मंदिर प्रकरण में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को विचारणीय माना है. न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद प्रतिवादी संख्या-4 को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया तथा सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने की अनुमति दी है.
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने अदालत को बताया कि मूल वाद में आदेश 26 नियम 9 सीपीसी के तहत स्थानीय आयुक्त नियुक्त करने का आवेदन ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया था. इसके विरुद्ध दायर पुनरीक्षण याचिका भी पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दी गई, जिसके बाद हाईकोर्ट में अनुच्छेद 227 के तहत याचिका दाखिल की गई.
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामला विचारणीय है. इसके साथ ही प्रतिवादी संख्या-4 को नोटिस जारी करने और 10 दिनों के भीतर आरपीएडी सहित सामान्य प्रक्रिया से नोटिस की तामील कराने का निर्देश दिया. अदालत ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक सभी प्रतिवादी अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल कर सकते हैं. मामले की अगली सुनवाई नोटिस में निर्धारित तिथि पर होगी.