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Malicious and False FIR पर बिना सबूत आपराधिक केस, न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग, हाईकोर्ट ने पूरी केस कार्यवाही की रद 

रिश्तेदारों को चिट्ठी लिख शादी नहीं होने देने का आरोप, बिना पत्र बरामद किए पुलिस ने दाखिल की थी चार्जशीट

Malicious and False FIR पर बिना सबूत आपराधिक केस, न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग, हाईकोर्ट ने पूरी केस कार्यवाही की रद 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Malicious and False FIR पर बिना सबूत पुलिस चार्जशीट पर अदालत के संज्ञान लेने को लेकर गंभीर टिप्पणी की है और कहा है कि याची पर शिकायतकर्ता के रिश्तेदारों को आपत्तिजनक पत्र लिखकर शादी होने में व्यवधान डालने के आरोप का कोई पत्र बरामद किए बगैर बिना सबूत के पुलिस ने चार्जशीट दे दी और यांत्रिक तरीके से अदालत ने उसपर संज्ञान लेकर सम्मन भी जारी कर दिया. जबकि कोई वाद कारण नहीं है. एक Malicious and False एफआईआर और बिना साक्ष्य बयान के आधार पर आपराधिक केस चला दिया गया.

गाजीपुर के राजकुमार व तीन अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि शिकायतकर्ता का केस Malicious and False दुर्भावनापूर्ण अभियोजन है. जिसका कोई भविष्य नहीं है. याचीगण के खिलाफ कोई केस नहीं बनता. कोर्ट ने चार्जशीट, संज्ञान व सम्मन आदेश सहित राज्य बनाम आशीष चौहान व अन्य  केस कार्यवाही को रद कर दिया है. याचीगण के खिलाफ Malicious and False FIR गाजीपुर के कसीमाबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. जो न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मदाबाद की अदालत में विचाराधीन था.

विवेचना अधिकारी ने Malicious and False FIR पर कोई सबूत इकट्ठा नहीं किए

याची के अधिवक्ता गणेश पाण्डेय का कहना था कि विवेचना अधिकारी ने Malicious and False FIR पर कोई सबूत इकट्ठा नहीं किए और निराधार बयान और एफआईआर के आधार पर चार्जशीट दाखिल की. अपमानजनक पत्र लिखने का आरोप लगाया गया किंतु पुलिस ने एक भी पत्र बरामद नहीं किया और बीएएस की धारा 351(3) 352 के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी. कोर्ट ने पूरी केस कार्यवाही को दुर्भावना पूर्ण करार देते हुए रद कर दिया.

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सरकार की अर्जी पर याची के पक्ष में पारित डिक्री रद कर मेरिट पर सुनने के बजाय पत्रावली दाखिल दफ्तर क्यों की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन एसडीएम पीलीभीत से स्पष्टीकरण के साथ व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है कि जब राज्य सरकार की अर्जी पर याची के पक्ष में पारित डिक्री आपने रद कर दी, तो केस मेरिट पर सुनें जाने के बजाय दाखिल दफ्तर कैसे कर दिया.

कोर्ट ने पीलीभीत के जिलाधिकारी को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने का आदेश दिया और कहा कि तबादला हो गया हो तो आदेश एसडीएम को उपलब्ध कराया जाए. कोर्ट ने राज्य सरकार सहित विपक्षियों से याचिका पर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए जुलाई के प्रथम सप्ताह की तिथि तय की है. कोर्ट ने विवादित संपत्ति की यथास्थिति कायम रखने का निर्देश दिया है.

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यह आदेश जस्टिस मनीष कुमार निगम ने रानी देवी की याचिका पर दिया है. याची का कहना था कि राज्य सरकार ने सीपीसी के आदेश 9 नियम 13 के अंतर्गत अर्जी दाखिल की.जिसकी सुनवाई करते हुए एसडीएम ने याची के पक्ष में पारित डिक्री रद कर दी. केस की मेरिट पर आगे सुनवाई करने के बजाय पत्रावली दाखिल दफ्तर कर दी. कहा एसडीएम ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकते. याची के पक्ष में डिक्री रद कर पत्रावली दाखिल दफ्तर नहीं की जा सकती. जबकि आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी भी खारिज हो चुकी थी.

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