15 दिन से Advocate Welfare Stamp जारी न होने से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालतनामे व मेमो आफ अपियरेंस दाखिल होना बंद

इलाहाबाद हाईकोर्ट में Advocate Welfare Stamp की अनुपलब्धता के कारण वकालतनामा व मेमो आफ अपियरेंस महानिबंधक कार्यालय स्वीकार नहीं कर रहा. जिसके कारण वकालतनामा व मेमो आफ अपियरेंस का दाखिला ठप हो गया है. महानिबंधक द्वारा 18 मई को जारी अधिसूचना में जब तक Advocate Welfare Stamp छप कर नहीं आ जाता तब तक के लिए दाखिल होने वाले नये मुकद्दमों में Advocate Welfare Stamp की उपलब्धता पर लगाने केआश्वासन की अर्जी देने पर छूट दी गई है. यह अर्जी अधिवक्ता या वादकारी द्वारा दाखिल किया जायेगा. किंतु वकालतनामे व मेमो आफ अपियरेंस का जिक्र नहीं किया गया है.
केंद्र सरकार के अधिवक्ता मेमो आफ अपियरेंस दाखिल करते हैं. जिसमें Advocate Welfare Stamp लगाना अनिवार्य है. राज्य सरकार समय से Advocate Welfare Stamp जारी करने में विफल रही. जिसके कारण पिछले 15 दिन से टिकट मिलना बंद हो गया है. हाईकोर्ट में कोई भी अर्जी या अथारिटी दाखिल करने पर Advocate Welfare Stamp लगाना अनिवार्य है.
अब टिकट नहीं मिल रहा तो हाईकोर्ट का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. वकीलों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही. वकालतनामा या मेमो आफ अपियरेंस दाखिल न हो पाने के कारण अधिवक्ता का नाम काजलिस्ट में नहीं छपेगा और वे सूचना न होने के कारण अदालत में नहीं पहुंच सकेगे और मुकदमे की सुनवाई बाधित होगी या अदालत के एकपक्षीय आदेश से अधिवक्ता का कैरियर प्रभावित होगा.
बार काउंसिल की अधिवक्ताओं की भविष्य निधि योजना को राज्य सरकार ने मंजूरी दी और फंड बनाया गया. जिसमें धन जमा करने के लिए हर वकालतनामे या मेमो आफ अपियरेंस में 10 रूपये का Advocate Welfare Stamp जारी किया गया. मुख्य न्यायाधीश की सहमति से हाईकोर्ट व सभी जिला अदालतों में लागू किया गया. हर साल राज्य सरकार स्टैंप जारी कर ट्रेज़री से स्टैंप वेंडर को उपलब्ध कराती है.
Advocate Welfare योजना लागू करने में संकट
विभाग की लापरवाही के कारण अभी तक स्टैंप जारी नहीं किए जाने से अधिवक्ता कल्याण (Advocate Welfare) योजना लागू करने में संकट पैदा हो गया है. इसी फंड से मृत अधिवक्ताओं के परिवार को पांच लाख रुपए की सहायता भी दी जाती है और नये वकीलों को स्टाइपेंड देंने की योजना घोषित की गई थी. जो अभी तक अधर में लटकी है. आदर्श अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सभाजीत सिंह व महासचिव पीयूष त्रिपाठी ने राज्य सरकार के राजस्व विभाग से Advocate Welfare Stamp शीघ्र जारी करने की मांग की है.
एसडीएम को जमीन का सीमांकन तय अवधि में करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसडीएम निजामाबाद, आजमगढ़ को मीना देवी केस में जारी दिशा-निर्देश के तहत चार हफ्ते में जमीन का सीमांकन पूरा करने का निर्देश दिया है. मीना देवी केस हाईकोर्ट ने कहा है कि सभी एसडीओ और जिलाधिकारी पर राजस्व संहिता की धारा 24 का पालन करना बाध्यकारी है. यह संक्षिप्त कार्यवाही है और अर्द्ध न्यायिक कार्य है.
यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने मोहम्मद खालिद की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता अखिलेश यादव व आरएन यादव ने बहस की. इनका कहना था कि आराजी संख्या 2114 के सीमांकन के लिए एसडीएम को अर्जी दी गई और मीना देवी केस में 20 जनवरी 25 को पारित आदेश का पालन करने की मांग की. किंतु तय गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया जबकि तय अवधि में सीमांकन करने का बाध्यकारी आदेश है.