Without Notice पुलिस किसी को अपराध की विवेचना में पूछताछ के लिए नहीं बुला सकती
बार बार थाने बुलाकर उत्पीड़न करने व धमकाने के खिलाफ सुरक्षा की मांग में याचिका पर दिया आदेश
विवेचना या पूछताछ के लिए किसी संभावित अभियुक्त या व्यक्ति को बुलाना जरूरी हो तो बीएनएसएस की धारा 35 को Notice देना अनिवार्य है. बिना Notice पुलिस किसी को थाने पूछताछ के लिए नहीं बुला सकती. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि स्थापित विधि सिद्धांत है और इसकी शर्तों का पालन किया जाना अनिवार्य है. यह आदेश जस्टिस राजीव मिश्र और जस्टिस पद्म नारायण मिश्र की खंडपीठ ने थाना सोनौली, महाराजगंज की ज्ञानमती व अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है.

याचिका पर अधिवक्ता अतुल कुमार पांडेय ने बहस की. इनका कहना था कि उसके बेटे हरिश्चंद्र पर लड़की को भगाने में मदद करने का शक है. लड़की के गायब हो जाने के संबंध में शिकायतकर्ता राहुल दिवाकर ने 20 जनवरी 26 को महराजगंज जिले के सोनौली थाने में एफआईआर दर्ज करायी है.
कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए याची के अधिवक्ता ने कहा कि याची एफआईआर में नामजद नहीं किया गया है. इसके बाद भी पुलिस बिना Notice याची को बार बार थाने बुलाकर धमकाती और परेशान करती है. इसके चलते वह डरा हुआ है और परिवार के लोग भी डर के साये में जी रहे हैं. अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस का बिना Notice याची को बार बार थाने बुलाना याची के के जीवन स्वतंत्रता के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मूल अधिकारों का खुला उल्लघंन है.
कोर्ट ने कहा कि बिना Notice पुलिस याची को थाने न बुलाए
याची का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अतुल कुमार पांडेय का कहना था कि राज्य व वरिष्ठ अधिकारियों का दायित्व है कि वह नागरिक अधिकारों का संरक्षण करें. इसके विपरीत पुलिस निर्दोष को बिना Notice बार बार थाने बुलाकर धमका रही है. उन्होंने कोर्ट से गुजारिश की कि सरकार को कानून के खिलाफ काम करने वाले पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही करने का निर्देश दिया जाय. कोर्ट ने कहा कि बिना Notice पुलिस याची को थाने न बुलाए.