+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

स्टाफ की कमी के बावजूद शासकीय अधिवक्ता, महाधिवक्ता कार्यालय में Vacant Post न भरने पर विधि सचिव से मांगा जवाब, सुनवाई 30 मार्च को

स्टाफ की कमी के बावजूद शासकीय अधिवक्ता, महाधिवक्ता कार्यालय में Vacant Post न भरने पर विधि सचिव से मांगा जवाब, सुनवाई 30 मार्च को

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज व लखनऊ शासकीय अधिवक्ता/महाधिवक्ता कार्यालय में स्टाफ की कमी के बावजूद खाली पदों (Vacant Post) को भरने में उदासीनता को लेकर तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा 27 जनवरी 23 से 26 फरवरी 26 तक राज्य सरकार ने महाधिवक्ता कार्यालय से Vacant Post की स्थिति की कई बार जानकारी मांगी किंतु उसका कोई जवाब नहीं दिया गया. जिसके चलते Vacant Post भरने की कार्यवाही नहीं हो पा रही है.

कोर्ट ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए नाखुशी जताई और कहा कि कोर्ट में न तो महाधिवक्ता पक्ष रखने के लिए उपस्थित हैं और न ही कोई अपर महाधिवक्ता. हालांकि मुख्य स्थाई अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया की सरकार की तरफ से इस केस में अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी पक्ष रखेंगे. कोर्ट ने सरकार से उचित हलफनामा मांगा है और  अपर महाधिवक्ता चतुर्वेदी को अगली सुनवाई की तिथि 30 मार्च को पक्ष रखने को कहा है.

यह आदेश जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की बेंच ने सूबेदार यादव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता आशीष मल्होत्रा ने बहस की. इससे पहले कोर्ट ने 26 फरवरी को सरकार से स्टाफ की कमी पूरी करने पर जानकारी मांगी थी. कहा था सचिव जवाबी हलफनामा दाखिल करें.

महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया था कि Vacant Post पर भर्ती प्रक्रिया करेंगे

कोर्ट ने कहा पद भारी संख्या में खाली (Vacant Post) है किन्तु भरने की कार्यवाही नहीं की जा रही है. इसी तरह से कपिल कुमार केस में 2023 में कोर्ट ने पूछा था. भर्ती क्यों नहीं की जा रही है कोई कारण नहीं बताया गया. महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया था कि Vacant Post पर भर्ती प्रक्रिया करेंगे.

इसे भी पढ़ें…न्यायिक मजिस्ट्रेट पर पुलिस दबाव डाले तो हाईकोर्ट में अवमानना ​​का मामला भेजें

सचिव का हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, मुख्य स्थाई अधिवक्ता ने समय मांगा और सरकार से मिली जानकारी पेश की. जिसमें खुलासा हुआ कि सरकार महाधिवक्ता से रिक्ति (Vacant Post) की स्थिति की जानकारी मांग रही है किन्तु कोर्ट जवाब नहीं था रहा. फिलहाल कोर्ट ने कहा यदि हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो कोर्ट इसे गंभीरता से लेगी. याचिका की सुनवाई 30 मार्च को होगी.

प्रमुख सचिव विधि स्पष्टीकरण सहित 25 मार्च को तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता कार्यालय में चार साल पहले लगी आग में जली फाइलों का पुनर्निर्माण नहीं करने और सुनवाई करने पर कडा रूख अपनाया है और प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय उप्र को इस स्पष्टीकरण के साथ 25 मार्च को हाजिर होने का निर्देश दिया है कि जली फाइलों के पुनर्निर्माण के लिए फोटो स्टेट मशीनों को फिर से चालू क्यों नहीं किया जा सका.

कोर्ट ने कहा सरकारी अधिवक्ता कार्यालय प्रयागराज में चार साल पहले लगी आग से हजारों फाइलें जल गई थी. लापरवाही भरे रवैए के कारण जिनका पुनर्निर्माण नहीं किया जा सका और केस की सुनवाई नहीं हो पा रही. यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने संतोष कुमार सिंह की याचिका की सुनवाई करते समय सरकारी फाइल न होने के उत्पन्न स्थिति को देखते हुए दिया है.

कोर्ट ने मुख्य स्थाई अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह को बुलाया और पूछा कि यह तीसरे राउंड की याचिका है. लंबे समय बाद केस सुनवाई के लिए लगा. याची अधिवक्ता प्रतीक थे नागर ने बहस की जब सरकार की बारी आई तो स्थाई अधिवक्ता ने कहा फाइल नहीं आई है, सुनवाई काली जाय. मुख्य स्थाई अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकारी कार्यालय की फोटोस्टेट मशीनें हाईकोर्ट परिसर में लगी थी. हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें वहां से हटा दिया गया. इस कारण जली फाइलों का पुनर्निर्माण नहीं हो पा रहा है.

कोर्ट ने कहा यह समझ से परे है कि प्रमुख सचिव विधि सरकारी कार्यालय का प्रबंधन किस तरह से कर रहे हैं. फोटो स्टेट मशीन हटाई गई तो उसे अन्यत्र क्यों नहीं लगाया गया.ताकि फाइलों का पुनर्निर्माण किया जाय. कोर्ट ने कहा आये दिन ऐसा हो रहा है फाइल न होने से सुनवाई टल रही है.आग लगे चार साल बीते फिर भी जली फाइलों का पुनर्निर्माण नहीं किया जा सका. याचिका की सुनवाई 25 मार्च को होगी.

इसे भी पढ़ें…बेटे के इलाज के नाम पर मां का बलात्कार करने वाले तांत्रिक को राहत से इंकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *