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Allahabad high court

High Court Decision

MV Act, 1988 के तहत Claim case में Compensation का आकलन करते समय मृतक को मिल रहे सभी भत्तों पर विचार किया जाना चाहिए: हाई कोर्ट

Claim case में Compensation का आकलन करते समय मृतक को उसके नियोक्ता द्वारा दिए जा रहे सभी भत्तों पर विचार किया जाना चाहिए. मृतक की नेट आय तक पहुँचने के लिए केवल इनकम टैक्स और सरचार्ज की ओर काटी गई राशि पर ही विचार किया जाना चाहिए. Compensation का आकलन…

High Court Decision

Blacklisting जैसे उपाय न तो अत्यधिक दंडात्मक हों और न ही तर्कसंगत कानूनी औचित्य से रहित, 2 फर्मों को अनिश्चितकाल के लिए Blacklist करने का बीएसए का आदेश रद

यह सुनिश्चित करते हुए कि Blacklisting जैसे प्रशासनिक उपाय न तो अत्यधिक दंडात्मक हों और न ही तर्कसंगत कानूनी औचित्य से रहित हों. अनिश्चित Blacklisting आदेश को कानूनी रूप से उचित नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि इसके गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं. न्यायालय को जनहित की रक्षा की आवश्यकता और…

High Court Decision

Exam में शामिल होना संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के समान

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया छात्रा के लिए 15 दिन में सेमेस्टर Exam कराने और रिकॉर्ड अपडेट करने का आदेश Exam में शामिल होना संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के समान है, और जब याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं है, तो…

High Court Decision

TGT शिक्षक भर्ती 2024 में बी एड डिग्री वालों की ही नियुक्ति की अनुमति

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कला विषय के सहायक अध्यापक TGT शिक्षक भर्ती 2024 में बीएड डिग्री वालों की ही नियुक्ति करने की अनुमति दी है और कहा है कि जो बीएड डिग्री धारक नहीं है उनकी नियुक्ति पर रोक रहेगी. कोर्ट ने राज्य सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है.…

High Court Decision

हाई कोर्ट का जज पाता है कि Article 226 के तहत दायर याचिका आदर्श रूप से Article 227 के तहत दायर किया जाना चाहिए था तो वह उस पर सुनवाई और फैसला नहीं कर सकता

अगर हाई कोर्ट के जज को उसके चीफ जस्टिस द्वारा Article 226 के तहत याचिकाएं सुनने और फैसला करने के लिए सौंपी गई हैं और वह पाता है कि Article 226 के तहत दायर याचिका को आदर्श रूप से Article 227 के तहत दायर किया जाना चाहिए था, तो वह…

High Court Decision

जब तक कोई विशेष कानून नकारात्मक बोझ नहीं डालता, आरोपी को निर्दोषता साबित करने के लिए Evidence पेश करने की जरूरत नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपहरण और बलात्कार में सुनायी गयी सजा को रद किया, आरोपित को जेल से रिहा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले इस बात की पुष्टि करते हैं कि जब तक कोई विशेष कानून नकारात्मक बोझ नहीं डालता, आरोपी को निर्दोषता साबित करने के लिए Evidence…

High Court Decision

Poisonous Cough Syrup मामले में मैरियन बायोटेक और निदेशकों की याचिकाएं खारिज, उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत हो चुकी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने Poisonous cough syrup मामले में मैरियन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों को बड़ा झटका देते हुए उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इन याचिकाओं के जरिए गौतम बुद्ध नगर की निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश को चुनौती दी गई थी. मामला मैरियन…

High Court Decision

शादी का वादा शुरू से ही झूठा साबित होने पर ही 376 आईपीसी के तहत Rape माना जा सकता है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई पुरुष आपसी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों (Rape) के बाद शादी करने से इनकार कर देता है, तो उसे तब तक बलात्कार (धारा 376 आईपीसी Rape) नहीं माना जा सकता जब तक कि यह साबित न…

High Court Decision

Order के खिलाफ Appeal मात्र से Court Proceeding पर रोक नहीं लग जाती, सेशन व मजिस्ट्रेट कोर्ट धारा 228 CrPC और 240 CrPC में आरोप तय करने के लिए बाध्य

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी Order के खिलाफ अपील दायर करने मात्र से संबंधित अदालत की कार्यवाही (Court Proceeding) पर रोक नहीं लग जाती. कोर्ट की रोक नहीं है तो Order के तहत कार्रवाई की जायेगी. जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने धोखाधड़ी से जुड़े दो दशक…

High Court Decision

मानसिक रूप से अस्वस्थ अभियुक्त की 10 दिन में Medical Board से जांच कराने का निर्देश, बयान दर्ज करने का सम्मन आदेश रद्द

कोर्ट ने कहा पता करें अभियुक्त अदालत में बयान दर्ज करने लायक है या नहीं, रिपोर्ट पर अदालत को कानूनी कार्यवाही करने का निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिर में गंभीर चोट के कारण सोचने समझने, लिखने बोलने में असमर्थ याची की Medical Board से मेडिकल जांच कर रिपोर्ट देने का…