शादी का झूठा वादा कर Physical Relation बनाना बलात्कार (376 IPC) का अपराध माना जायेगा, सच्चाई का परीक्षण ट्रायल कोर्ट में होगा

इस संबंध में फतेहपुर जिले के किशनपुर थाने में 19 अगस्त 2024 को दर्ज एफआईआर के अनुसार पीड़िता अपने तीन बच्चों के पालन-पोषण के लिए चाय की दुकान चलाती थी. लगभग दो वर्ष पहले उसकी मुलाकात आरोपी राहुल सिंह से हुई. यहां दोनों में बातचीत शुरू हुई तो वह उसकी दुकान पर अक्सर आने जाने लगा. धीरे धीरे दोनों में दोस्ती हो गयी और दोनों एक दूसरे पर भरोसा करते हुए बातें करने लगे. इस दौरान आरोपित ने खुद को अविवाहित बताया था.
एफआईआर के अनुसार युवक ने पीड़िता के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा तो उसने इस पर भरोसा कर लिया. इसी भरोसे के आधार पर युवक ने पीड़िता के साथ कई बार Physical Relation बनाये. Physical Relation बनाने के चलते इसी दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई.
एफआईआर के मुताबिक 17 जून 2024 को आरोपी अन्य लोगों के साथ उसके घर आया और बताया कि वह पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं. आरोप है कि इसके बाद उसे जबरन गर्भपात की दवा खिलाई गई जिससे उसका गर्भपात हो गया. इतना ही नहीं उसके साथ मारपीट की गयी और धमकी दी गयी कि इसकी शिकायत करने पर उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
एफआईआर पर जांच के बाद पुलिस ने Physical Relation बनाने पर राहुल सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 313, 323 और 506 के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया. आरोपी की ओर से कहा गया कि पीड़िता वयस्क व तीन बच्चों की मां है और दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे.
Physical Relation बनाने के समर्थन में कोई चिकित्सीय साक्ष्य नहीं
आरोपित के अधिवक्ता की तरफ से कहा गया कि घटना (Physical Relation बनाने) के समर्थन में कोई चिकित्सीय साक्ष्य नहीं है और मामला झूठा है. कोर्ट ने कहा कि यदि किसी महिला की सहमति (Physical Relation बनाने) गलत तथ्य या धोखे के आधार पर प्राप्त की जाती है तो वह वैध सहमति नहीं मानी जाएगी. आरोपी ने शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा किया और Physical Relation बनाया तो यह गंभीर मामला है और इसका अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा. कोर्ट ने चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है.
गुंडा नियंत्रण कानून के तहत जारी नोटिस रद नहीं होगी जवाब दाखिल कीजिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीरेंद्र बहादुर यादव को एडीएम वित्त एवं राजस्व आजमगढ़ द्वारा गुंडा नियंत्रण कानून के तहत जारी नोटिस का जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए याचिका खारिज कर दी है. यह आदेश जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस लक्ष्मीकांत शुक्ल की खंडपीठ ने बीरेंद्र बहादुर यादव की याचिका पर दिया है. याचिका पर अधिवक्ता अभिषेक यादव व आरएन यादव ने बहस की.
इनका कहना था कि एडीएम ने जरूरी तथ्य पर विवेक का इस्तेमाल किए मनामानी नोटिस जारी की है. यह कार्यवाही हाईकोर्ट के आंचल यादव केस के फैसले के विपरीत की गई है. इसलिए गुंडा एक्ट की नोटिस रद की जाय. सरकारी वकील ने कहा समाज में शांति कायम रखने व कानून व्यवस्था के लिए नियमानुसार निरोधात्मक कार्यवाही की गई है. याची को नोटिस का जवाब सक्षम अधिकारी के समक्ष देना चाहिए. इसलिए याचिका खारिज की जाय. इस पर कोर्ट ने याची को कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल करने को कहा है.