उम्र कैद की सजा को चुनौती व Bail अर्जी पर न पत्रावली पहुंची न कमिश्नर का हलफनामा, 19 मार्च को पेश होने का निर्देश

यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस प्रशांत मिश्र की बेंच ने फूलपुर, प्रयागराज के सूरज उर्फ सूर्य भूषण मिश्र की जमानत (Bail) अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है. अपील पर अधिवक्ता आदर्श शुक्ला ने बहस की. बताया कि 26 जुलाई 2018 को ग्राम मिर्जापुर थाना फूलपुर प्रयागराज के निवासी सूरज मिश्रा उर्फ सूर्य भूषण मिश्रा एवं दो अन्य लड़कों के खिलाफ धारा 377, भारतीय दंड संहिता, धारा 5/6 पाक्सो एक्ट व एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2) (5) के तहत एफआईआर दर्ज हुई.

विवेचना के बाद ट्रायल कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गयी. इस रिपोर्ट के आधार पर स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई. पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को परखने के बाद स्पेशल कोर्ट ने आरोपितों को दोषी माना और 27 नवंबर 25 को आजीवन कारावास से दंडित किया. ट्रायल कोर्ट के फैसले को आरोपित की तरफ से हाई कोर्ट में चुनौती दी गयी है.
अपील में ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए निरस्त करने की मांग की गयी थी. इसके साथ ही सुनवाई पूरी होने तक जमानत (Bail) पर रिहा किये जाने की मांग की गयी है. हाई कोर्ट ने इस मामले की पहली सुनवाई के दिन स्टेट और कमिश्नर पुलिस प्रयागराज जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था. नेक्स्ट डेट पर कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि न तो कमिश्नर प्रयागराज का हलफनामा आया है और न ही पत्रावली पेश की गयी है. इसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए यह फैसला सुनाया है.
दूसरे की पत्नी के तौर पर जमीन का बैनामा करने वाली अनपढ़ महिला की सशर्त Bail मंजूर
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इटावा निवासी मीना देवी नामक उस महिला की Bail अर्जी कुछ शर्तों के साथ मंजूर कर ली है जिसे जमीन बैनामे की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया है. जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने कहा याची अनपढ़ महिला है. सह अभियुक्त ने उसे गुमराह कर अपनी पत्नी के स्थान पर खड़ा कर जमीन का बैनामा करा दिया. उसे पता ही नहीं था कि वह क्या कर रही है.
कोर्ट ने पाया कि याची का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 10 जनवरी 2026 से जेल में बंद है. याची के अनुसार जमीन के एक सौदे में इस्तेमाल जाली दस्तावेज में उसे सुमन देवी के रूप में दिखाया गया है. उसने यह सौदा सुमन देवी के पति के कहने पर किया था और उसे इसकी पूरी जानकारी नहीं थी.
जमीन का पूरा पैसा पति ने लिया है और उसे धोखा दिया गया है. यदि शिकायतकर्ता चाहे तो वह जमीन का सौदा रद करने के लिए तैयार है. केस में चार्जशीट दाखिल हो गई है, इसलिए पूछताछ के लिए हिरासत की जरूरत नहीं है. मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि याची ने सह अभियुक्त सेवक राम के बहकावे में आकर उसकी पत्नी के स्थान पर कप्तान सिंह और नेम सिंह के पक्ष में विक्रय विलेख (बैनामा) निष्पादित किया.