+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

जेल में बंद दो Accused राम कृपाल और हेमराज को बेटी/बहन की शादी के लिए 3 दिन की पैरोल

जेल में बंद दो Accused राम कृपाल और हेमराज को बेटी/बहन की शादी के लिए 3 दिन की पैरोल

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हत्या के मामले में बंद दो accused को उनकी बेटी/बहन की शादी में शामिल होने के लिए तीन दिन की अल्पकालिक जमानत (पैरोल) प्रदान की है. जस्टिस दीपक वर्मा और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने यह आदेश जेल में बंद दो Accused राम कृपाल और हेमराज की आपराधिक अपील में दायर अल्पकालिक जमानत आवेदन पर सुनवाई करते हुए पारित किया.

हमीरपुर जिले के थाना मऊदहा में वर्ष 2023 में अभियोग दर्ज हुआ था. Accused राम कृपाल और हेमराज पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34, 308/34 और 323/34 के तहत मुकदमा चल रहा है. दोनों accused वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं. Accused के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि राम कृपाल, वधू कुमारी राधिका के पिता हैं और हेमराज उनके भाई हैं. राधिका का विवाह 26 जून 2026 को सम्पन्न होना है. इसलिए दोनों को तीन सप्ताह की पैरोल दिए जाने की प्रार्थना की गई.

इसे भी पढ़ें….GST Act मौजूद तो सामान्य दंड कानून के प्रावधानों का सहारा तभी सही जब आरोप अपराध के जरूरी तत्वों को स्वतंत्र रूप से दिखाते हों

हालांकि राज्य सरकार की ओर से पैरोल का कड़ा विरोध किया, किंतु वे accused के तर्कों का खंडन नहीं कर सके. सम्बन्धित थाने की रिपोर्ट और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने 24 जून से 26 जून 2026 तक तीन दिन की पैरोल मंजूर की. कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों accused को पुलिस कस्टडी में रिहा किया जाएगा.

इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत मुचलका और दो जमानतदार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हमीरपुर की संतुष्टि पर प्रस्तुत करने होंगे. पुलिस दल के आवागमन हेतु आवश्यक धनराशि जमा करने के बाद ही उन्हें जेल से रिहा किया जाएगा. अदालत ने यह भी आदेश दिया कि राम कृपाल और हेमराज 27 जून 2026 को शाम 5 बजे तक सम्बन्धित सीजेएम  के समक्ष समर्पण करेंगे.

नाबालिग से दुष्कर्म accused लईक की याचिका में हस्तक्षेप से किया इनकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बिजनौर  में नाबालिग से दुष्कर्म के accused लईक की याचिका निस्तारित करते हुए न्यायिक हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है. जस्टिस विकास बुधवार की एकलपीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों की जांच का कार्य ट्रायल कोर्ट का है, उच्च न्यायालय का नहीं.

इसे भी पढ़ें…. यू.पी. आवश्यक वस्तु (बिक्री और वितरण नियंत्रण का विनियमन) आदेश, 2016 के क्लॉज 2(p) में इस्तेमाल ‘Daughter’ शब्द में ऐसी विवाहित बेटी भी शामिल

बिजनौर जिले के थाना श्योहरा में हुई घटना की एफआईआर पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई थी. आरोप है कि 17 दिसंबर 2025 को सुबह 8:30 बजे 17 वर्षीय पीड़िता जब स्कूल जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रही थी, तभी accused एक साथी के साथ कार में आया और उसे जबरदस्ती गाड़ी में बैठाकर पहले एक होटल ले गया और बाद में श्योहरा में दुष्कर्म किया. Accused के वकील ने दलील दी कि अस्थि परीक्षण में पीड़िता की आयु 18 वर्ष से अधिक पाई गई, इसलिए पाक्सो  अधिनियम लागू नहीं होता. साथ ही अगले दिन हुई चिकित्सीय जांच में कोई असामान्यता नहीं मिली.

इसे भी पढ़ें…. दूल्हे के हत्या मामले में आरोपी को राहत, 2 महीने में समर्पण कर Bail लेने तक Arrest पर लगी रोक

न्यायालय ने पाक्सो अधिनियम की धारा 29 का हवाला देते हुए कहा कि जब तक विपरीत साबित न हो, accused को अपराध का दोषी माना जाएगा और यह सिद्ध करना ट्रायल के दौरान ही संभव है. अदालत ने कहा कि पीड़िता की उम्र और मेडिकल रिपोर्ट से जुड़े सवाल ट्रायल का विषय हैं. कोर्ट ने दोनों पक्षों को ट्रायल में अपने सभी कानूनी व तथ्यात्मक आधार रखने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका निस्तारित कर दी.

इसे भी पढ़ें…. याचिकाकर्ता के Defence पर ध्यान न देना और दोषी होने के निष्कर्षों की पुष्टि करते समय कारण दर्ज न करना दर्शाता है कि अनुशासनात्मक प्राधिकरण की तरफ से दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया गया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *