Assistant Prosecution Officer परीक्षा: अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, 28 जून 2026 से प्रारंभ होने वाली मुख्य परीक्षा में शामिल करने का निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की तरफ से चलायी जा रही Assistant Prosecution Officer पदों पर भर्ती के लिए रिक्रूटमेंट ड्राइव की प्री परीक्षा क्वालीफाई कर चुके उन कैंडीडेट्स को बड़ी राहत दे दी है जिन्होंने मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए अनुमति की मांग में याचिका दाखिल की थी. समर बेंच के जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने प्रतियोगी छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला मानते हुए और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों को परखने के बाद सभी को Assistant Prosecution Officer मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान कर दी है.
बेंच ने सभी Assistant Prosecution Officer परीक्षार्थियों को निर्देश दिया है कि वे 29 मई से पहले मेंस परीक्षा में शामिल होने के लिए किये गये आवेदन की प्रति उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के समक्ष पेश करें. हालांकि कोर्ट ने साथ में यह भी एड कर दिया है कि है कि यह आदेश याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा.
बता दें कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की Assistant Prosecution Officer रिक्रूटमेंट ड्राइव के पहले चरण की परीक्षा पास करने वाले छात्रों के लिए अनिवार्य था कि वे मेंस परीक्षा में शामिल होने के लिए निर्धारित समय के भीतर आनलाइन आवेदन और फीस जमा करेंगे. इसके साथ ही यह शर्त भी लगायी गयी थी कि इसकी फिजिकल कापी भी पोस्ट करके आयोग को भेजी जानी थी.
याचिकाकर्ता Assistant Prosecution Officer भर्ती के अभ्यर्थी ज्योति गौतम, मीनाक्षी, वैभव चौधरी, अदिति कश्यप, निशु चौधरी माधव गोविंद दीक्षित, सुमैया खातून की तरफ से कहा गया था कि उन्होंने मेंस एग्जाम में शामिल होने के लिए निर्धारित समय के भीतर आवेदन कर दिया था और उसका प्रिंटआउट आयोग को पोस्ट भी कर दिया था.
सभी को Assistant Prosecution Officer मेंस प्रवेश के लिए प्रवेश पत्र ही जारी नहीं किया गया
इसके बाद भी उनका आवेदन पत्र यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया है कि वह समय से आयोग के कार्यालय में प्राप्त नहीं हुआ. इसके चलते इन सभी को Assistant Prosecution Officer मेंस प्रवेश के लिए प्रवेश पत्र ही जारी नहीं किया गया. परीक्षा नजदीक होने के बाद भी आयोग द्वारा कोई सुनवाई न किये जाने पर इन सभी ने अलग अलग रिट याचिका हाई कोर्ट में दाखिल की थी. सभी याचिकाओं का नेचर एक जैसा होने के चलते कोर्ट ने सातों याचिकाओं पर एक जैसी अंतरिम राहत प्रदान की है.
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि Assistant Prosecution Officer (मुख्य) परीक्षा 28.06.2026 से शुरू होने वाली है. इसलिए अंतरित राहत प्रदान किया जाना जरूरी नहीं है. उन्हें परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिला तो वे Assistant Prosecution Officer रिक्रूटमेंट ड्राइव से बाहर हो जाएंगे.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि दोनों पक्षों ने विस्तृत बहस की है और निर्णय लेने के बिंदु तथा संदर्भ से संबंधित अलग-अलग आदेश पारित किए जा रहे हैं, इसलिए न्यायहित में यह अनुरोध किया गया है कि याचिकाकर्ताओं को आगामी Assistant Prosecution Officer (मुख्य) परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए.
ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए, एक अंतरिम उपाय के तौर पर यह तय किया गया है कि अगर याचिकाकर्ता कट-ऑफ तारीख (यानी 29.05.2026) से पहले Assistant Prosecution Officer परीक्षा मेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन का प्रिंटआउट और जरूरी दस्तावेज स्पीड पोस्ट/रजिस्टर्ड पोस्ट या कूरियर से भेजने का सही सबूत आयोग के सामने पेश करते हैं तो आयोग औपचारिकताएं पूरी करेगा और उन्हें Assistant Prosecution Officer (मेन्स) परीक्षा’ में प्रोविजनल रूप से शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड जारी करेगा.
कोर्ट ने यह निर्देश भी किया कि आयोग, Assistant Prosecution Officer के अभ्यर्थी याचिकाकर्ताओं को बताई गई समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन का प्रिंटआउट, जरूरी दस्तावेज और उन्हें भेजने का सबूत जमा करने की सुविधा देने के लिए एक अलग विंडो खोलेगा.
आयोग, संबंधित रिट याचिकाओं के सभी याचिकाकर्ताओं से सर्टिफाइड कॉपी की मांग किए बिना, इस कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से लिए गए इस आदेश के प्रिंटआउट को स्वीकार करेगा. आयोग चाहे तो आधिकारिक वेबसाइट से खुद आदेशों की पुष्टि कर सकता है. यह अंतरिम राहत प्रदान करने के साथ ही कोर्ट ने याचिका का निबटारा कर दिया है.
न्याय नगर में मार्ग व नाली अतिक्रमण मामले में नगर आयुक्त व एसडीएम फूलपुर से हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा, सुनवाई 25 जून को
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के फूलपुर तहसील स्थित मोहल्ला न्याय नगर, चक हरिहरन में सार्वजनिक मार्ग और नालियों के अतिक्रमण को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़े निर्देश दिए हैं. याचिकाकर्ता अनमोल रतन ने बताया कि मोहल्ले में अवैध अतिक्रमण के कारण नालियां और सार्वजनिक रास्ते बाधित हो गए हैं. नाली की सफाई नहीं हो सकी है. बरसात का मौसम नजदीक आने से क्षेत्र में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने का खतरा है.
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तत्काल सुनवाई के लिए लिया और नगर आयुक्त, नगर निगम प्रयागराज और उप-जिलाधिकारी, फूलपुर को तीन दिन के भीतर अलग-अलग हलफनामा दाखिल कर कारण बताने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 25 जून 2026 को होगी.