पुलिस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट मुरादाबाद के Artist पद पर कार्यरत याची को बढ़ा वेतनमान देने का निर्देश, न देने पर देना होगा 1 लाख हर्जाना
कोर्ट ने कहा, बकाया वेतन व सेवा जनित परिलाभो का तीन माह में भुगतान करें, वेतनमान देने से इंकार का आदेश रद

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट पीटीसी लाइन मुरादाबाद में बतौर Artist कार्यरत बीरेंद्र कुमार सिंह को 9 अक्टूबर 07 के शासनादेश के तहत 5500-9000 वेतनमान का भुगतान करने का पुलिस मुख्यालय प्रयागराज को निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि तीन माह के भीतर बकाया वेतन व सेवा जनित समस्त परिलाभो का भुगतान किया जाय. यदि ऐसा नहीं किया जाता तो सरकार याची को बकाया वेतन सहित एक लाख रुपए बतौर हर्जाना भुगतान करेगी.
कोर्ट ने याची को समता समिति की शिफारिश पर तय वेतनमान देने से इंकार करने के आदेशो को रद कर दिया है और कहा है कि याची एकमात्र Artist है जो मुरादाबाद पुलिस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट मुरादाबाद में कार्यरत हैं. इसलिए वहीं तय वेतनमान पाने का हकदार हैं. यह आदेश जस्टिस अनीस कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने याची अधिवक्ता अरूण कुमार सिंह को सुनकर दिया है.
कोर्ट ने अदम पैरवी में खारिज याचिका बहाल करते हुए मेरिट पर सुनवाई की और कहा अन्य Artist अंबिका शंकर शर्मा भीमराव अंबेडकर एकेडमी मुरादाबाद में बतौर Artist कार्यरत हैं. याची की नियुक्ति 25 अगस्त 81 में पुलिस ट्रेनिंग कालेज पीटीसी मुरादाबाद में हुई थी. दोनों पद अस्थाई थे. 9 अक्टूबर 07 के शासनादेश से पीटीसी मुरादाबाद के Artist का पद स्थाई किया गया.
दो संस्थाओं के Artist के विवाद के कारण याची को बढ़ा वेतनमान नहीं दिया गया
जिस पर याची कार्यरत था. समता समिति की संस्तुति पर 5500-9000 वेतन मान देने का आदेश दिया गया. किंतु दो संस्थाओं के Artist के विवाद के कारण याची को बढ़ा वेतनमान नहीं दिया गया जिसे दोनों ने ही चुनौती दी थी. कोर्ट ने बीरेंद्र कुमार सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए तय वेतनमान बकाये सहित भुगतान करने का निर्देश दिया है.
सायबर ठगी मामले में आपराधिक कार्यवाही पर रोक, शिकायतकर्ता को नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज साइबर ठगी के अपराध की एसीजेएम की अदालत में चल रही आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर राज्य सरकार व शिकायतकर्ता से याचिका पर जवाब मांगा है. अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद होगी. यह आदेश जस्टिस एसके पचौरी ने सचिन कुमार की याचिका पर दिया है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रयागराज के साइबर क्राइम थाना में कार्तिकेय त्रिपाठी निवासी उत्कर्ष विला बलरामपुर हाउस मफोर्डगंज ने राजीव शुक्ला सर्विस एडवाइजर के विरुद्ध 13 लाख ठगी के मामले में धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत वर्ष 2023 में साइबर थाना प्रयागराज में एफआईआर पंजीकृत कराया था. जिसमे फरवरी 2026 में अभियुक्त सचिन कुमार निवासी फिरोजाबाद को न्यायालय द्वारा सम्मन जारी किया गया.
याची ने हाइकोर्ट में चार्जशीट और संज्ञान आदेश को चुनौती दी. याची के अधिवक्ता ने कहा याची एफआईआर में नामजद नही है. याची वर्ष 2023 में इंटरमीडिएट का छात्र था और वह तब से वेबसाइट बनाने का कार्य कर अपना बीसीए की पढ़ाई कर रहा है. याची को राजीव शुक्ला नाम के व्यक्ति ने फोन करके अपना आधार कार्ड व पाँच हजार रुपये भेजकर वाव मोमो फूड प्रा लि कंपनी के नाम से बेबसाइट बनवाई थी. पुलिस ने बेबसाइड की जांच करने पर याची के आईपी एड्रेस का पता चला तो पुलिस ने याची का कंप्यूटर जब्त कर बयान लिया और छोड़ दिया.
याची ने अपने बयान में बताया था की हमने वेबसाइड बनाने के लिए 5 हजार रुपये लिए थे कोई अपराध नही किया. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि याची ने अभी तक 25 से ज्यादा लोगो की वेबसाइड बनाई है. याची का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है.बाद में पुलिस की जांच में राजीव शुक्ला का आधार कार्ड फर्जी निकला था.
मात्र इसी आधार पर पुलिस ने याची के खिलाफ चार्जशीट लगा दिया और न्यायालय ने संज्ञान भी ले लिया जबकि आज तक नामजद अभियुक्त की कोई गिरफ्तारी नही हुई न ही उस गैंग से जुड़े किसी भी व्यक्ति की कोई जानकारी विवेचक को मिली और न ही खाते से धन की कोई रिकवरी. विवेचना अभी भी चल रही है .पुलिस ने याची को ही बलि का बकरा बनाकर गलत चार्जशीट फाइल कर दी.