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‘Executive Directives न्यायिक निर्देशों को रद्द नहीं कर सकते न ही वे अर्जित अधिकारों को समाप्त कर सकते हैं’

2013 की 29334 सहायक अध्यापक भर्ती: कट आफ मार्क से अधिक अंक पाने वाले को नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश

'Executive Directives न्यायिक निर्देशों को रद्द नहीं कर सकते न ही वे अर्जित अधिकारों को समाप्त कर सकते हैं'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कार्यकारी निर्देश (Executive Directives) न्यायिक निर्देशों को रद्द नहीं कर सकते न ही वे अर्जित अधिकारों को समाप्त कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा सुप्रीम कोर्ट नीरज कुमार पाण्डेय केस में तय कर चुका है कि सीनियर बेसिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती में खाली पदों पर कट आफ मार्क से अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर विचार किया जाय. ऐसे अभ्यर्थियों को कानून के अनुसार नियुक्ति की पेशकश की जानी चाहिए.

याचिकाकर्ता शर्तों को पूरा करती है क्योंकि उसने समय रहते ही इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और उसके अंक अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक हैं. इसलिए, याचिकाकर्ता को विचार-सूची से बाहर रखने की प्रतिवादियों की कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के बाध्यकारी निर्देशों का सीधा उल्लंघन है जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत प्रवर्तनीय हैं.

Executive Directives से नियुक्ति से वंचित करना एक प्रकार का भेदभावपूर्ण व्यवहार

कोर्ट ने कहा योग्यता और पात्रता होने के बावजूद याचिकाकर्ता को Executive Directives से नियुक्ति से वंचित करना एक प्रकार का भेदभावपूर्ण व्यवहार है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जिसने कट-ऑफ अंकों से अधिक अंक प्राप्त किए थे नियुक्ति की हकदार हैं.

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कोर्ट ने 03 दिसंबर 2022 के याची को नियुक्ति देने से इंकार के Executive Directives को मनमाना, अवैध और अस्थिर  करार दिया है. कोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुरादाबाद को याची की सहायक अध्यापक साइंस पर नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है और रिपोर्ट मांगी है. याचिका की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी. यह आदेश जस्टिस मंजू रानी चौहान की बेंच ने दीप्ति चौहान की याचिका पर दिया है.

याची का कहना था कि 2013 की सीनियर बेसिक स्कूलों में 29334 सहायक अध्यापक भर्ती में साइंस अध्यापक पद पर चयनित हुईं. किंतु चयन सूची में शामिल नहीं किया गया. हाईकोर्ट ने विचार करने का निर्देश दिया तो बीएसए ने Executive Directives से प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया. जिसे फिर से चुनौती दी गई.

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याची का कहना है कि अभी भी पद खाली है इसलिए उसकी नियुक्ति की जाय. जबकि परिषद का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है. हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करने का आदेश दिया जिसमें कहा गया है कि अंतिम चयनित से अधिक अंक पाने वालों की भी नियुक्ति की जाय. जिस पर हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है.

पीसीएस मुख्य परीक्षा 2025 की अभ्यर्थी को शामिल करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग प्रयागराज को अभ्यर्थी रुबल हुड्डा को 29 मार्च 2026 से शुरू होने वाली पीसीएस मुख्य परीक्षा-2025 में बैठने  की अनुमति देने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया ने दिया है. याचिका में आयोग द्वारा उनके ओटीआर फॉर्म में जन्मतिथि की लिपिकीय त्रुटि के आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द करने वाले 20 मार्च 2026 के नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई थी.

मामले के तथ्यों के अनुसार अभ्यर्थी ने अपने ओटीआर फॉर्म में जन्मतिथि 20 फरवरी 2004 के स्थान पर गलती से 02 फरवरी 2004 भर दी थी. हालांकि, अभ्यर्थी ने प्रारंभिक परीक्षा से पहले ही 30 सितंबर 2025 को इस त्रुटि को सुधार लिया था और संशोधित विवरण ओटीआर फॉर्म में परिलक्षित भी हो रहा था. इसके बावजूद मुख्य परीक्षा के फॉर्म में पुरानी गलत जन्मतिथि ही प्रदर्शित हो रही थी जिसके आधार पर आयोग ने उनकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी थी.

न्यायालय ने मामले की गंभीरता और परीक्षा की निकटता को देखते हुए स्पष्ट किया कि जब अभ्यर्थी ने प्रारंभिक परीक्षा से पहले ही त्रुटि सुधार ली थी तो आयोग के पास उन्हें परीक्षा में बैठने से रोकने का कोई उचित आधार नहीं था.

कोर्ट ने इसे अभ्यर्थी के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए आयोग को तत्काल आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने और अभ्यर्थी को परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया है. हालांकि, न्यायालय ने यह भी साफ किया है कि अभ्यर्थी का अंतिम परिणाम इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा. मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मई 2026 की तिथि निर्धारित की गई है.

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