Poisonous Cough Syrup मामले में मैरियन बायोटेक और निदेशकों की याचिकाएं खारिज, उज्बेकिस्तान में 18 बच्चों की मौत हो चुकी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने Poisonous cough syrup मामले में मैरियन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों को बड़ा झटका देते हुए उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दी हैं. इन याचिकाओं के जरिए गौतम बुद्ध नगर की निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश को चुनौती दी गई थी. मामला मैरियन बायोटेक द्वारा निर्मित cough syrup से जुड़ा है. जांच के दौरान cough syrup के नमूनों में जहरीला तत्व पाया गया. रिपोर्टों के अनुसार, उज्बेकिस्तान में इस cough syrup के सेवन से 18 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.
जस्टिस हरवीर सिंह ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि कंपनी के निदेशक और वरिष्ठ अधिकारी ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 34 के तहत कंपनी के कार्यों और व्यावसायिक आचरण के लिए जिम्मेदार होते हैं. वे केवल तकनीकी दलीलों के आधार पर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कानूनों को तकनीकी आपत्तियों के सहारे कमजोर नहीं किया जा सकता. घटिया और जहरीली दवाओं (cough syrup) का निर्माण स्वास्थ्य प्रणाली के लिए गंभीर खतरा है.
cough syrup निर्माण में औद्योगिक ग्रेड प्रोपलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि कंपनी ने दवा निर्माण में औद्योगिक ग्रेड प्रोपलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल किया, जो पूरी तरह प्रतिबंधित है. साथ ही, कच्चे माल की शुद्धता से जुड़े आवश्यक प्रमाणपत्र भी कंपनी पेश नहीं कर सकी.
हाईकोर्ट ने माना कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतम बुद्ध नगर द्वारा जारी समन आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं है. अदालत ने कहा कि इस स्तर पर मजिस्ट्रेट को केवल प्रथम दृष्टया मामला देखना होता है, न कि पूरे साक्ष्यों का मूल्यांकन. मैरियन बायोटेक और उसके निदेशकों को ट्रायल कोर्ट में आरोप तय के चरण पर अपना पक्ष रख सकते है.
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