अन्तर धार्मिक विवाह करने वाले जोड़े को illegal उठाने वाले पुलिस वालों पर कार्रवाई के निर्देश, 28 को मांगी रिपोर्ट
हाई कोर्ट के आदेश पर पुलिस के चंगुल से मुक्त हुए प्रेमी युगल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ पुलिस द्वारा अवैध रूप से (illegal) निरूद्ध शाने अली व रश्मि को स्वतंत्र कर दिया है और कहा है कि दोनों बालिग है जहां चाहे अपनी मर्जी से जाने के लिए स्वतंत्र हैं. कोर्ट ने बिना कानूनी प्राधिकार के रश्मि व शाने अली की अभिरक्षा में रखने की पुलिस कार्यवाही को अवैध (illegal) व जीवन के मूल अधिकारों का उल्लघंन करार दिया है और एसएसपी अलीगढ़ को इन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच करने तथा एक माह में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है. याचिका की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी.
यह आदेश जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस डीसी सामंत की बेंच ने तहसीम व अन्य की तरफ से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. छुट्टी के बावजूद नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट बैठी और दोनों अंतर धार्मिक शादी करने वाले बालिग जोड़े को पुलिस के illegal चंगुल से छुड़ाया. पुलिस 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट आये दोनों रश्मि व शाने अली को पकड़कर अलीगढ़ ले गयी थी.
जहां शाने अली को थाने में अभिरक्षा में रखा और रश्मि को वन स्टाप सेंटर भेज दिया था. 17 अक्टूबर को लड़की न्यायिक मजिस्ट्रेट अलीगढ़ के समक्ष पेश की गई. जहां उसका बयान दर्ज किया गया. उसने बताया कि अपनी मर्जी से गई थी और उन्होंने शादी कर ली है. अपने शौहर के साथ रहना चाहती है. कोर्ट ने पाया कि वह बालिग है तो उसे स्वतंत्र करने का आदेश दिया.
illegal निरुद्धि के सवाल पर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अंतर धार्मिक शादी को लेकर समाज में तनाव था
हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दोनों को पेश करने का निर्देश दिया था. जिसपर पुलिस ने उन्हें पेश किया. कोर्ट ने उनसे पूछताछ की. बालिग नागरिकों को अवैध (illegal) निरुद्धि के सवाल पर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अंतर धार्मिक शादी को लेकर समाज में तनाव था. समाज के दबाव के कारण दोनों की पुलिस ने अभिरक्षा ली. कोर्ट इस सफाई से संतुष्ट नहीं हुई और कहा पुलिस के खिलाफ विभागीय जांच कार्यवाही की जाय.
कोर्ट ने स्वतंत्र किये गये जोड़े को विवेचना अधिकारी को निर्देश दिया कि पुलिस सुरक्षा में जहां चाहे उन्हें पहुंचाया जाय. साथ ही कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज, एसएसपी अलीगढ़, एसएसपी बरेली को भी जोड़े की सुरक्षा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 28 अक्टूबर को जांच रिपोर्ट के साथ कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने कहा सामाजिक तनाव व सामाजिक दबाव के कारण किसी नागरिक की illegal निरूद्धि को उचित नहीं ठहराया जा सकता. सामाजिक दबाव में illegal निरूद्धि गैर कानूनी है. गणतांत्रिक देश में कानून का शासन होता है. समाज के दबाव में शासन काम नहीं करता. राज्य व कानून लागू करने वाले तंत्र से उम्मीद की जाती है कि अपनी कानूनी शक्ति का इस्तेमाल नागरिक की सुरक्षा के लिए करें न कि सामाजिक दबाव में गलत इस्तेमाल करें. सामाजिक दबाव में पुलिस किसी नागरिक के जीवन के मूल अधिकारों में कटौती नहीं कर सकती.
कोर्ट ने कहा बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में शादी वैध है या नहीं, विचार नहीं किया जा सकता. रश्मि व शाने अली यह अन्तर धार्मिक जोड़ा इसी सप्ताह की शुरुआत में अदालत में पेश होने के तुरंत बाद कथित तौर पर लापता हो गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट सुनवाई के लिए छुट्टी में भी बैठी. 15 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान, रश्मि ने पीठ के समक्ष बयान दिया था कि वह अपनी मर्जी से शाने अली के साथ रह रही है और उससे शादी करना चाहती है.
जोड़े ने पहले भी रश्मि के परिवार से मिल रही धमकियों का हवाला देते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई थी. याचिका के अनुसार, इस साल की शुरुआत में उच्च न्यायालय ने रश्मि और शाने अली को दो महीने की सुरक्षा भी प्रदान की थी. इसके बावजूद पुलिस ने “सुरक्षा प्रदान नहीं की और शाने अली के परिवार के सदस्यों को परेशान करना जारी रखा.
” याचिका में शाने अली के भाई को सितंबर में कथित रूप से अवैध (illegal) हिरासत में रखने का भी उल्लेख किया गया है, जिसे एक अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के बाद रिहा किया गया था. याचिका में दावा किया गया है कि रश्मि और शाने अली दोनों बालिग हैं, सहमति से साथ रह रहे हैं, और उनके लापता होने के पीछे रश्मि के परिवार की भूमिका होने की आशंका है.
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