Appointment का आधार ही कानूनी रूप से दोषपूर्ण पाया जाता है तो कदाचार साबित करने के लिए अनुशासनात्मक जांच का सवाल नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बलिया के चार शिक्षकों की सेवा समाप्ति के BSA और सचिव बेसिक शिक्षा के आदेश को सही ठहराया

इस तय कानून पर भरोसा करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान की बेंच ने बेसिक शिक्षा विभाग से निकाले गये चार शिक्षकों को कोई राहत देने से इंकार कर दिया है. फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि यह कोर्ट इस बात से वाकिफ है कि याचिकाकर्ताओं को Appointment के बाद काफी समय तक ड्यूटी करने की अनुमति दी गई और वेतन भी दिया गया. ऐसी परिस्थितियाँ निस्संदेह सहानुभूति पैदा करती हैं. सार्वजनिक रोजगार से जुड़ी कानूनी आवश्यकताओं पर निष्पक्षता या सहानुभूति के विचारों को हावी नहीं होने दिया जा सकता.
संवैधानिक दायित्व उन व्यक्तिगत दावों से ऊपर है जो ऐसी Appointment पर आधारित हैं जिसे तय योग्यता मानदंडों के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता
सार्वजनिक भर्ती में शुद्धता, पारदर्शिता और एकरूपता बनाए रखने का संवैधानिक दायित्व उन व्यक्तिगत दावों से ऊपर है जो ऐसी Appointment पर आधारित हैं जिसे तय योग्यता मानदंडों के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता. बेंच ने कहा कि कि Appointment को रद करने की चुनौती दिए गए आदेशों में कोई स्पष्ट अवैधता, अधिकार क्षेत्र की कमी या मनमानी नहीं मिली है जिसके लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने विशेष अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए हस्तक्षेप करने की आवश्यकता हो.
याचिकाकर्ता सेवा में बने रहने का कोई कानूनी अधिकार साबित करने में विफल रहे हैं, क्योंकि महत्वपूर्ण तारीख पर उनके पास आवश्यक योग्यता नहीं थी. यह रिट याचिका दिलीप कुमार और तीन अन्य शिक्षकों की ओर से दाखिल की गयी थी. इसमें बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया द्वारा पारित आदेश और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड, प्रयागराज के सचिव द्वारा पारित आदेश Appointment को रद करने को को रद्द करने के साथ ही याचिकाकर्ताओं को बलिया के जूनियर बेसिक स्कूलों में सहायक शिक्षक के पद पर बहाल करने और उन्हें नियमित वेतन भुगतान की मांग के साथ दाखिल की गयी थी.
याचिकाकर्ताओं के वकील का कहना था कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड द्वारा स्थापित और संचालित जूनियर बेसिक स्कूलों में 69,000 सहायक शिक्षक पदों पर Appointment की प्रक्रिया में शामिल हुए. सहायक शिक्षक के पद पर Appointment के लिए आवश्यक योग्यताओं में से एक योग्यता के रूप में दो साल का BTC प्रशिक्षण प्रमाण पत्र होना अनिवार्य किया गया था. वकील का कहना था कि सभी याचिकाकर्ताओं को 2015-16 बैच के लिए दो साल के BTC प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए विधिवत चुना गया था.

आवेदन जमा करते समय, याचिकाकर्ताओं ने अपनी मार्क-शीट में दर्ज अंकों की सही जानकारी दी थी, जिसमें उन्हें BTC परीक्षा में फेल दिखाया गया था. ऐसी जानकारी देने के बावजूद याचिकाकर्ताओं के आवेदनों को सही पाकर स्वीकार कर लिया. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राज्य अधिकारियों द्वारा जारी अंतिम चयन सूची में, सभी याचिकाकर्ताओं को Appointment के लिए अंतिम रूप से चयनित दिखाया गया था और उन्हें बलिया जिला आवंटित किया गया था. काउंसलिंग के आधार पर, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया ने Appointment आदेश जारी किया. बाद में चारों की नियुक्ति रद्द कर दी गयी.
इन आदेशों में मुख्य आधार यह था कि BTC कोर्स के चौथे सेमेस्टर की बैक-पेपर परीक्षा का परिणाम 2019 में घोषित किया गया था इसलिए, प्रतिवादियों के अनुसार, याचिकाकर्ताओं के पास तय कट-ऑफ तारीख तक जरूरी योग्यता नहीं थी और वे इस भर्ती प्रक्रिया में विचार किए जाने के लिए अयोग्य थे. याचिकाकर्ताओं को काफी समय तक नौकरी करने और जारी रखने की अनुमति देने के बाद, बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया ने 24.03.2025 को नोटिस जारी किए, जिनमें एक बार फिर ATRE-2019 परीक्षा में शामिल होने की उनकी योग्यता पर सवाल उठाया गया.
इन नोटिसों के जरिए, याचिकाकर्ताओं को 28.03.2025 को बेसिक शिक्षा अधिकारी के सामने पेश होने और अपनी योग्यता में कथित कमी के बारे में अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया. कारण बताओ नोटिस में मुख्य आपत्ति यह थी कि याचिकाकर्ताओं के BTC ट्रेनिंग सर्टिफिकेट 07.08.2019 को जारी किए गए थे, जो 22.12.2018 के बाद की तारीख थी. याचिकाकर्ता उक्त नोटिसों के जवाब में बेसिक शिक्षा अधिकारी के सामने पेश हुए और अपना लिखित पक्ष पेश किया. इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी ने पाँच कर्मचारियों की सेवाएँ समाप्त करने का निर्देश दिया.
उक्त आदेश से नाराज होकर चार याचिकाकर्ताओं ने रिट-A नंबर 8469 ऑफ 2025, दिलीप कुमार यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 3 अन्य, दायर करके इस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उक्त रिट याचिका का निपटारा 18.08.2025 के आदेश से किया गया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को सचिव, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड, प्रयागराज के समक्ष अपील/अभ्यावेदन दायर करने का उपाय अपनाने की अनुमति दी गई.
उक्त आदेश के अनुपालन में, याचिकाकर्ताओं ने 25.08.2025 को सचिव, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड, प्रयागराज के समक्ष अपनी अपील/अभ्यावेदन प्रस्तुत किया. अधिकारी ने 29.05.2026 के विवादित आदेश द्वारा याचिकाकर्ताओं की अपील/अभ्यावेदन को खारिज कर दिया और उस आदेश की पुष्टि की. इसके बाद यह रिट याचिका दाखिल की गयी थी.
रेस्पॉन्डेंट-बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से पेश वकील का कहना था कि असिस्टेंट टीचर के 69,000 पदों पर Appointment के लिए सरकार ने 01.12.2018 को गाइडलाइंस जारी की थीं. इसके पैरा 4(1) में खास तौर पर कहा गया था कि जो उम्मीदवार जरूरी BTC ट्रेनिंग पास कर चुके हैं, वे टीचर सिलेक्शन एग्जामिनेशन, 2019 के लिए आवेदन कर सकते हैं. याचिकाकर्ताओं द्वारा जमा की गई BTC ट्रेनिंग परीक्षा के चौथे सेमेस्टर की मार्कशीट में मिले नंबरों, जारी होने की तारीखों और रोल नंबरों में गड़बड़ियां पाई गईं.
नतीजतन, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जिनमें उनसे अपने ओरिजिनल BTC ट्रेनिंग सर्टिफिकेट दिखाने और उनके द्वारा जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स में पाई गई गड़बड़ियों के बारे में सफाई देने को कहा गया. रेस्पॉन्डेंट्स के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने जरूरी जानकारी छिपाकर और ऐसे डॉक्यूमेंट्स के आधार पर नौकरी हासिल की थी, जिनसे यह साबित नहीं होता था कि उनके पास आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख तक जरूरी योग्यता थी. इसलिए, उनकी नियुक्तियां टीचर सिलेक्शन एग्जामिनेशन, 2019 के नियमों और शर्तों के खिलाफ थीं.
वकील ने कहा कि 22.12.2018 को याचिकाकर्ताओं के पास जरूरी योग्यता नहीं थी और नतीजतन वे चयन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए अयोग्य थे. विज्ञापन की स्पष्ट शर्तों के विपरीत होने के कारण, उनके बाद के चयन और Appointment को रद्द किया जा सकता था. इसलिए, रद्दीकरण के आदेशों के खिलाफ याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया गया.
वकील ने इस कोर्ट के ‘अंजलि सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 8 अन्य’ (रिट-A नंबर 9826/2021, फैसला 05.10.2021) वाले फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें उनके अनुसार, ऐसा ही विवाद उठा था और रिट याचिका खारिज कर दी गई थी. कहा गया है कि इस कोर्ट ने उस याचिका को खारिज करते हुए उस उम्मीदवार को राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके पास विज्ञापन में तय समय-सीमा के भीतर जरूरी योग्यता नहीं थी.
कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों पर गंभीरता से विचार करने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने के बाद कोर्ट की यह राय है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा विवादित आदेशों को चुनौती देने का आधार स्वीकार करने लायक नहीं है. एक बुनियादी तथ्य जिस पर कोई विवाद नहीं है, वह यह है कि संबंधित भर्ती के लिए आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख तक, याचिकाकर्ताओं ने जरूरी BTC ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी नहीं की थी.
उन्हें BTC योग्यता 07.08.2019 को बैक-पेपर परीक्षा का परिणाम घोषित होने और उसके बाद सर्टिफिकेट जारी होने पर ही मिली. बाद में जरूरी योग्यता हासिल कर लेने से—चाहे वह कितनी भी ईमानदारी से क्यों न की गई हो—भर्ती नोटिफिकेशन में तय निर्णायक तारीख पर मौजूद योग्यता की शर्त खत्म नहीं हो सकती. कोर्ट ने बीएसए बलिया और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के आदेशों को सही ठहराया.