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Land सचेंदी गांव में दर्ज राजस्व गांव बिनोर में, मुआवजे (225 Lakh) पर फंसा पेंच, प्रमुख सचिव राजस्व को जानकारी देने का निर्देश

Land सचेंदी गांव में दर्ज राजस्व गांव बिनोर में, मुआवजे पर फंसा पेंच, प्रमुख सचिव राजस्व को जानकारी देने का निर्देश

जमीन (Land) मूलरूप से कानपुर नगर जिले के सचेंदी गांव में स्थित है और उसे दर्ज कर दिया गया है राजस्व ग्रांव बनोर में. इस जमीन (Land) का अधिग्रहण किया गया और मुआवजा तय किया जाने लगा तो किसानों के कान खड़े हो गये. ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों गावों के सर्किल रेट में जमीन आसमान जैसा अंतर है. किसानों ने सरकारी अफसरों से आग्रह किया कि जमीन (Land) को ग्राम सचेंदी में दर्ज किया जाय और उसी के आधार पर मुआवाजे का भुगतान किया जाय तो अफसरों ने इसे अनदेखा कर दिया.

अब यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच गया तो कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व उत्तर प्रदेश को प्रश्नगत जमीनों (Land) की प्रविष्टि जिस गांव में है, उसी के राजस्व अभिलेख में दर्ज करने और कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है. कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई अब 7 अप्रैल को करेगा. यह आदेश जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की बेंच ने विजय प्रकाश व पांच अन्य व मानसिंह व दो अन्य की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है.

याचिका पर अधिवक्ता विपिन कुमार शुक्ल ने बहस की. उन्होंने बेंच के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गाटा संख्या Land 4199,4202 और 4203 कानपुर नगर के ग्राम सचेंदी उर्फ चकेरी में स्थित है. गलती से इसे राजस्व रिकार्ड में पाकेट ग्राम बिनोर में दर्ज कर दिया गया है लेकिन यह इस गांव के नक्शे में शामिल नहीं है.

गांव के नक्शे में जमीन (Land) के इस हिस्से को खाली प्लाट के रूप में दर्शाया गया है

दूसरी तरफ सचेंदी गांव के नक्शे में जमीन (Land) के इस हिस्से को खाली प्लाट के रूप में दर्शाया गया है. अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू होने के बाद इसका मुआवजा बिनोर गांव के सर्किल रेट के आधार पर ही तय कर दिया गया है.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि याचीगण जमीन (Land) के मालिक हैं. उनकी जमीन (Land) मौके पर मौजूद भी है. उन्होंने कहा कि मुआवजा देने के लिए बिनोर गांव के सर्किल रेट को चुना. इसके चलते उन्हें 69 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा आफर किया गया. दूसरी तरफ सचेंदी गांव का सर्किल रेट 225 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है.

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इसके चलते मुआवजे की राशि में भारी अंतर आ रहा है. राजस्व अभिलेखों में जमीन की स्थिति को दुरुस्त कर दिया जाय तो किसानों को फायदा होगा, अन्यथा की स्थि​ति में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.

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उन्होंने गांव की कि अफसरों को आदेश दिया जाय कि वह जमीन (Land) को सचेंदी गांव में दर्ज करें. कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद मुद्दे को विचारणीय माना और प्रमुख सचिव राजस्व को मामले में पक्षकार बनाते हुए उन्हें निर्देश दिया कि वह उपचारात्मक कदम उठावें. कोर्ट ने अपडेट जानकारी 7 अप्रैल को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. इसी दिन इस प्रकरण में अगली सुनवाई भी होगी.

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