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Murder

High Court Decision

संदेह कितना भी प्रबल क्यों न हो वह प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता, 1987 में Murder के आरोपित की आजीवन कारावास की सजा रद

फर्रुखाबाद में हुई थी घटना, हाई कोर्ट ने कहा, जब तीन के खिलाफ समान साक्ष्य थे और दो को बरी कर दिया गया तो केवल एक आरोपी को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद के वर्ष 1987 के बहुचर्चित Murder मामले में आरोपी खुन्नी लाल की आजीवन कारावास…

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Murder के 3 आरोपियों को सशर्त जमानत, सजा निलंबित, सजा के खिलाफ अपील पर पत्रावली तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Murder मामले में सिद्ध दोष कैदियों की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है और केस पत्रावली तलब करते हुए मिली सजा निलंबित रखने का भी आदेश दिया है. सत्र अदालत बलिया ने Murder के आरोप में आरोपियों को 10 साल की कैद की सजा सुनाई है जिसे…

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100 साल के Accused को 40 साल बाद मिला न्याय, हाई कोर्ट ने किया बरी, 1982 के हुए मर्डर केस में था आरोपित

जब कोई व्यक्ति (accused) जीवन के आखिरी पड़ाव पर कोर्ट के सामने खड़ा होता है तो दशकों की प्रक्रियात्मक देरी के बाद दंडात्मक परिणामों पर ज़ोर देना न्याय को एक ऐसे अनुष्ठान में बदलने का जोखिम पैदा करता है जो अपने मूल उद्देश्य से अलग हो जाता है. जब सिस्टम…

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Wife की हत्या के आरोपी की उम्रकैद की सजा रद, आरोप से बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Wife की हत्या के आरोपी की उम्रकैद की सजा रद करते हुए बरी कर दिया है और कहा है कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की  कड़ी स्थापित करने में विफल रहा, जो आरोप साबित कर सकती हो. अन्य ठोस साक्ष्य भी नहीं पेश कर सका. घटनास्थल पर…

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पत्नी की Murder के आरोपी वकील को 1 जज ने किया बरी, दूसरे ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

तीसरे न्यायाधीश के नामांकन के लिए केस चीफ जस्टिस के समक्ष रखा गया इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के बीच फतेहपुर के एक वकील द्वारा (Murder) दायर 29 साल पुरानी आपराधिक अपील पर फैसला सुनाते समय आपस में मतभेद हो गया. वकील को 1991 में अपनी पत्नी की हत्या (Murder)…

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NRI पति की हत्या की दोषी ब्रिटिश लेडी को सजा ए मौत, उम्र कैद में तब्दील

हाई कोर्ट ने साथी की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 38 वर्षीय ब्रिटिश महिला को अपने NRI पति की हत्या का जुर्म साबित होने पर सुनायी गयी मृत्युदंड की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया है. उसे लोअर कोर्ट ने सजा ए मौत…

High Court Decision

41 साल बाद Murder आरोपी को मिली दोषमुक्ति

हत्या की साझा मंशा सिद्ध करने को सिर्फ ‘मारो साले को’ कहना काफी नहीं: HC इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी ठोस साक्ष्य के बिना केवल घटनास्थल पर उपस्थिति और “मारो साले को” कहकर ललकारना हत्या (Murder) के लिए धारा 34 भारतीय दंड संहिता के तहत सामान्य आशय…

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अभियुक्तों की चोट छिपाने से अभियोजन की कहानी संदिग्ध

हत्या के 48 साल पुराने मामले में दो अभियुक्त हाईकोर्ट से बरी  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी  घटना में यदि आरोपित और शिकायतकर्ता दोनों को चोट आती हैं तथा अभियोजन पक्ष द्वारा अभियुक्त की चोट के बारे में नहीं बताया जाता है तो यह संदेह पैदा करता…