+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

125 Cr PC के तहत Maintenance देने का मकसद यह पक्का करना है कि पत्नी पति की स्थिति के हिसाब से इज्जत से जी सके

125 Cr PC के तहत Maintenance देने का मकसद यह पक्का करना है कि पत्नी पति की स्थिति के हिसाब से इज्जत से जी सके

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 125 (Maintenance) का मकसद सिर्फ गरीबी को रोकना नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि पत्नी पति की स्थिति के हिसाब से इज्जत से जी सके. Maintenance  के मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मदन पाल की बेंच ने कहा कि सिर्फ पत्नी का नौकरी करना या कमाई करना, अपने आप में गुजारा भत्ता (Maintenance) देने से मना करने का कोई आधार नहीं है.

इस पृष्ठभूमि में बेंच ने यह नतीजा निकाला कि फैमिली कोर्ट द्वारा दिया गया भरष-पोषण (Maintenance) सही, वाजिब और रिविजनिस्ट की हैसियत और कमाने की क्षमता के हिसाब से था. यह पाते हुए कि जिस ऑर्डर पर सवाल उठाया गया उसमें कोई ऐसी गड़बड़ी, गैर-कानूनी या बड़ी गड़बड़ी नहीं थी जिसके लिए दखल देना जरूरी हो, कोर्ट ने क्रिमिनल रिविजन खारिज कर दिया.

कोर्ट रविन्दर सिंह बिष्ट की तरफ से दाखिल रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई कर रहा था. रिविजनिस्ट ने गाजियाबाद के फैमिली कोर्ट नंबर एक के एडिशनल प्रिंसिपल जज का ऑर्डर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. फैमिली कोर्ट ने उसे अर्जी की तारीख से अपनी पत्नी को हर महीने Maintenance के तौर पर 15 हजार रुपये देने का आदेश दिया था. फैमिली कोर्ट के इस फैसले को पति ने चुनौती दी थी और ट्रायल कोर्ट का आदेश रद करने की मांग की थी.

हाईकोर्ट के सामने पति ने कहा कि Maintenance कि यह रकम गलत है

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने पति ने कहा कि Maintenance कि यह रकम गलत है, क्योंकि पत्नी एक पढ़ी-लिखी, काम करने वाली महिला है. वह खुद काम करके इनकम जेनरेट करती है. रिवीजनिस्ट का पक्ष रखते हुए उसके अधिवक्ता ने मई, 2018 के इनकम टैक्स रिटर्न/फॉर्म-16 का हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि पत्नी की सालाना सैलरी 11,28,780 है.

यह भी कहा गया कि पत्नी ने अपनी मर्जी से शादी का घर छोड़ दिया था. वह अपनी शादी की जिम्मेदारियों को पूरा करने को तैयार नहीं थी. उसने पति के बूढ़े माता-पिता के साथ रहने से भी मना कर दिया था. पति की ओर से पेश अधिवक्ता ने अपनी फाइनेंशियल कैपेसिटी के बारे में कहा कि उसे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी, क्योंकि अपने बीमार माता-पिता की देखभाल करनी थी जिसकी वजह से उसके पास Maintenance देने के लिए काफ़ी साधन नहीं थे.

पति के अधिवक्ता के तरफ से पेश किये गये तथ्यों का जवाब देते हुए पत्नी के वकील ने कहा कि रिविजनिस्ट ने कोर्ट के सामने अपनी असली इनकम और रहन-सहन के स्टैंडर्ड के बारे में नहीं बताया था. यह कहा गया कि ट्रायल कोर्ट के सामने रिकॉर्ड किए गए रिविजनिस्ट के बयान के अनुसार, उसने माना कि अप्रैल, 2018 और अप्रैल, 2020 के बीच वह जेपी मॉर्गन में नौकरी करता था और लगभग 40 लाख रुपये का सालाना पैकेज ले रहा था.

यह भी कहा गया कि सिर्फ पत्नी की नौकरी भरण-पोषण से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती, खासकर तब जब पार्टियों की इनकम और स्टेटस में साफ अंतर हो. जस्टिस सिंह ने कहा कि पति ने अपनी कमाई की कैपेसिटी में उसी हिसाब से कमी दिखाने के लिए रिकॉर्ड पर कोई पक्का सबूत नहीं रखा था. पत्नी की इनकम के बारे में कोर्ट ने कहा कि यह मान भी लें कि पत्नी के पास इनकम का कोई सोर्स है तो भी रिकॉर्ड से साफ पता चलता है कि पार्टियों की कमाने की क्षमता और फाइनेंशियल स्टेटस में काफी फर्क है.

बेंच ने कहा कि पत्नी को बताई गई इनकम इतनी काफी नहीं है कि वह अपनी शादीशुदा जिंदगी के दौरान जिस तरह की जिंदगी जी रही थी, उसी तरह का जीवन-यापन कर सके. पति की कथित फाइनेंशियल तंगी और देनदारियों के बारे में कोर्ट ने इसे एक बेबुनियाद दावा कहा, क्योंकि उसने कहा कि रिकॉर्ड में कोई भी ऐसा ठोस या भरोसेमंद सबूत नहीं दिया गया, जिससे यह साबित हो सके कि उसके पास अपनी कानूनी जिम्मेदारी से छुटकारा पाने के लिए काफी साधन नहीं थे. 

Ravinder Singh Bisht vs. State of U.P. and Another

इसे भी पढ़ें….

केस स्थानांतरण अर्जी पर पति-पत्नी के बीच तलाक केस की सुनवाई पर रोक, पति को नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश परिवार अदालत फिरोजाबाद में विचाराधीन पति-पत्नी के बीच तलाक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है और पत्नी की केस मैनपुरी स्थानांतरित करने की अर्जी पर पति मानवीर सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह आदेश जस्टिस डा योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने श्रीमती प्रियंका की अर्जी पर दिया है.

इनका कहना है कि याची की शादी विपक्षी से18 दिसंबर 22 को हुई थी. दहेज उत्पीड़न के कारण याची ने घर छोड़ दिया और अपने माता पिता के साथ रह रही है. उसके जीविका का कोई साधन नहीं है. उसने मैनपुरी में गुजारे के लिए केस दर्ज किया है. इसके बाद पति फिरोजाबाद में तलाक का केस कायम किया है. आय न होने के कारण उसे फिरोजाबाद आने में दिक्कत होती है. इसलिए तलाक का केस मैनपुरी स्थानांतरित किया जाय. कोर्ट ने मामला विचारणीय माना और अगली सुनवाई की तिथि 10 मार्च नियत की है.

इसे भी पढ़ें….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *